हरियाणा के प्रसिद्ध | Famous in Haryana

By Reacher

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हरियाणा के प्रसिद्ध | Famous in Haryana

प्रसिद्ध व्यक्ति, उपनाम, ब्रांड एम्बेसडर, ऋषि-मुनि, किले-दुर्ग, मजार-दरगाह, गुरुद्वारे, मंदिर, मेले, संग्रहालय, तीर्थ स्थल, आभूषण-वेशभूषा, वाद्ययंत्र, लोक नृत्य, त्यौहार, सांग, फिल्म जगत, पुलिस विशेष, साहित्य, खेल जगत, प्रथम महिला-पुरुष और अधिक — HSSC CET, Group D, Police, Patwari व अन्य हरियाणा परीक्षाओं के लिए पूर्ण अध्याय। साथ में हरियाणा सामान्य परिचय भी पढ़ें।

हरियाणा के प्रसिद्ध व्यक्ति

कपिल देव राम लाल निखंज (ऑल राउंडर)

जन्म 7 जनवरी 1959 पाकिस्तान (पंजाब प्रांत) में; परिवार चंडीगढ़ आकर बस गया। कपिल देव को ‘पाजी’ भी कहते हैं; हरियाणा में इन्हें ‘हरिकेन’ के नाम से जाना जाता है (हरिकेन एक तूफान का नाम है जो मेक्सिको की खाड़ी में आता है)। कपिल देव की कप्तानी में भारत ने 25 जून 1983 को विश्व कप जीता — 1983 विश्व कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ 175 रन की पारी खेली, जो उनका उच्चतम स्कोर था।

  • 1979-80 अर्जुन अवार्ड, 1982 पद्म श्री, 1983 विसडेन क्रिकेटर ऑफ द ईयर, 1991 पद्म भूषण; 2002 में विसडेन इंडियन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी से सम्मानित।
  • पहला अंतरराष्ट्रीय मैच 1978 पाकिस्तान के खिलाफ, आखिरी मैच 1994 न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला — करियर में टेस्ट (131 मैच) में 434 विकेट व 5248 रन, तथा एकदिवसीय (225 मैच) में 253 विकेट व 3783 रन बनाए। 1994 में क्रिकेट को अलविदा कहा।
  • फिल्म “83” में कपिल देव का किरदार रणबीर सिंह ने निभाया (निर्देशक कबीर खान)। आत्मकथा — ‘बाई गॉड डिक्री’, ‘क्रिकेट माई स्टाइल’ और ‘स्ट्रेट फ्रॉम द हार्ट’।

अन्य प्रसिद्ध व्यक्ति

  • मोनिका सोनी — संगीतकार, जन्म रेवाड़ी जिले में; ‘हरियाणा की लता मंगेशकर’ नाम से जानी जाती हैं।
  • मानुषी छिल्लर — झज्जर जिले की मॉडल, जन्म 14 मई 1997; 2017 में मिस वर्ल्ड का खिताब जीता।
  • गीता जुत्शी — महान धाविका; 800मी व 1500मी दौड़ में कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ख्यातियाँ प्राप्त कीं; अर्जुन अवार्ड व पद्मश्री से सम्मानित।
  • सुभाष चन्द्रा — हिसार निवासी; एसेल ग्रुप के चेयरमैन व Zee TV के संचालक; हरियाणा से राज्यसभा सदस्य रहे।
  • कर्नल होशियार सिंह — सिसाना, सोनीपत में जन्मे; हरियाणा के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता; 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध में सराहनीय कार्य हेतु सम्मानित; परमवीर चक्र भारतीय सेना का सबसे बड़ा पुरस्कार है।
  • कैप्टन हवा सिंह — भारत के भूतपूर्व सेना अध्यक्ष; जन्म उमरवास गाँव (भिवानी); 1966 बैंकाक व 1970 बैंकाक एशियाई खेलों दोनों में बॉक्सिंग स्वर्ण पदक जीता; वर्ष 2000 में बॉक्सिंग कोच व मेंटर के रूप में द्रोणाचार्य पुरस्कार; एशियाई खेलों में दो स्वर्ण जीतने वाले एकमात्र भारतीय मुक्केबाज हैं। कैप्टन हवा सिंह बॉक्सिंग अकादमी भिवानी में है (नोट- राष्ट्रीय बॉक्सिंग अकादमी SAI रोहतक में है, स्थापना 2017)।
  • बाबा रामदेव — असली नाम राम कृष्ण यादव; जन्म 1965, महेंद्रगढ़ के सैयद अलीपुर में; पिता राम निवास, माता गुलाबो देवी; गुरु आचार्य बलदेव; हरिद्वार में 2006 पतंजलि योग पीठ की स्थापना; पुस्तक ‘माई लाइफ माई मिशन’।
  • दलबीर सिंह सुहाग — भारत के भूतपूर्व सेना अध्यक्ष, जन्म झज्जर जिले में।
  • सुषमा स्वराज — जन्म 14 फरवरी 1952, अम्बाला में; 13 अक्टूबर-3 दिसम्बर 1998 दिल्ली की प्रथम महिला मुख्यमंत्री; 26 मई 2016-24 मई 2019 भारत की पहली महिला विदेश मंत्री; सूचना-प्रसारण मंत्री (2000-2003), स्वास्थ्य-परिवार कल्याण मंत्री (2003-2004); मरणोपरांत 2020 पद्म विभूषण; मृत्यु 6 अगस्त 2019; अम्बाला बस स्टैंड का नाम इन्हीं के नाम पर। (हरियाणा के सभी मुख्यमंत्रियों व राजनीतिक इतिहास की जानकारी हरियाणा की राजनीति में पढ़ें।)
  • चन्द्रावती — चरखी दादरी के डालावास गाँव की; हरियाणा की पहली महिला सांसद (MP), 1977-80 भिवानी सीट से; पुदुचेरी की उप-राज्यपाल (1990)।
  • स्नेह लता — हरियाणा की पहली महिला विधायक; हिसार की रहने वाली।
  • ओम प्रभा जैन — जन्म कैथल जिले में; हरियाणा की पहली महिला वित्त मंत्री (1967)।
  • लेखवती जैन — जन्म अम्बाला जिले में; हरियाणा की दूसरी महिला डिप्टी स्पीकर (पहली महिला डिप्टी स्पीकर शन्नो देवी थीं, 1 नवम्बर-6 दिसम्बर 1966)।
  • चाँद बाई — सिरसा जिले की; हरियाणा की पहली महिला सत्याग्रही; असहयोग आंदोलन के दौरान 16 माह लाहौर जेल में रहीं।
  • कल्पना चावला — जन्म 17 मार्च 1962 करनाल में; भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री; 1994 में नासा में चयन; 1997 में पहली बार अंतरिक्ष में गईं; दूसरी बार 16 जनवरी 2003 को (7 यात्रियों संग); धरती पर लैंडिंग से 16 मिनट पहले 1 फरवरी 2003 को प्लेन क्रैश में मृत्यु। कल्पना चावला पुरस्कार HBSE दसवीं-बारहवीं में राज्य में प्रथम स्थान पाने वाली छात्रा को दिया जाता है; कुटैल गाँव (करनाल) में कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज स्थापित है।
  • साक्षी मलिक — कुश्ती खिलाड़ी, जन्म 3 सितम्बर 1992 रोहतक के मोखरा गाँव में; राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप 2017 स्वर्ण; 2018 राष्ट्रमंडल खेल कांस्य; राष्ट्रमंडल खेल 2022 (62kg) स्वर्ण; ओलंपिक कुश्ती में पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला (2016 रियो, कांस्य)। 2015 में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की पूरे हरियाणा की ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त।
  • गौरी श्योराण (निशानेबाज) — जन्म 1997 गांगडवास (भिवानी); हरियाणा सरकार द्वारा 2016-17 के भीम अवार्ड से सम्मानित।
  • पंडित जसराज — पहले तबला वादक थे, बाद में शास्त्रीय संगीत सीखा; जन्म 28 जनवरी 1930, फतेहाबाद के पीलीमंदौरी गाँव में; मेवाती घराने से सम्बंधित; इन्हें ‘स्वर सम्राट’ व ‘संगीत मार्तंड’ भी कहते हैं; 17 अगस्त 2020 अमेरिका में मृत्यु; नासा ने VP-32 क्षुद्र ग्रह का नाम बदलकर पंडित जसराज रखा; 1975 पद्म श्री, 1990 पद्म भूषण, 2000 पद्म विभूषण; 1987 संगीत नाटक पुरस्कार।
  • गजेंदर वर्मा — सिरसा में जन्मे संगीतकार; “तूने मेरे जाना” गाने के लिए प्रसिद्ध।
  • शेखर गुरेरा — गुरुग्राम के कार्टूनिस्ट; कारगिल युद्ध पर कार्टून बनाया।
  • बाबू बाल मुकुंद गुप्त — जन्म 14 नवम्बर 1865, गुड़ियानी (रेवाड़ी); मृत्यु 1907; रचनाएँ- शिवशम्भु के चिट्ठे, बीबी के नाम चिट्ठी, खेल तमाशा; पत्रिकाएँ- ‘भारत प्रताप’, ‘भारत मित्र’; उर्दू अखबार ‘कोहिनूर’ का संपादन भी किया।

चौधरी छोटूराम

जन्म 24 नवम्बर 1881, गढ़ी सांपला (रोहतक) में; बचपन का नाम रिछपाल था; पिता श्री सुखीराम, माता श्रीमती हरकी देवी। छज्जूराम ने छोटूराम को रोहतक में ‘प्रेम निवास’ भवन बनाकर दिया और पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता की — इसीलिए छज्जूराम को हरियाणा का दानवीर सेठ कहा जाता है (हरियाणा का दानवीर राजा कर्ण को कहा जाता है)। छोटूराम ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई दिल्ली के सेंट स्टीफ़न कॉलेज से और कानून की पढ़ाई आगरा कॉलेज से की।

  • छोटूराम ने रोहतक से 1916 में ‘जाट गजट’ साप्ताहिक पत्रिका निकाली। पंजाब के नेता फजले हुसैन के साथ मिलकर 1923 ई. में ‘यूनियनिस्ट पार्टी’ का गठन किया — यह पार्टी कांग्रेस की तरह ही डोमिनियन स्टेटस की माँग करती थी।
  • छोटूराम व यूनियनिस्ट पार्टी ने दरिद्र किसानों व पिछड़े लोगों के हितों की आवाज उठाई; 1923 के बाद के केंद्रीय व पंजाब विधान परिषद के लगभग सभी चुनावों में यूनियनिस्ट पार्टी विजयी रही। पंजाब सरकार में मंत्री रहते हुए किसानों के हित में कई कानून पास करवाए तथा साहूकारों-महाजनों के चंगुल से मुक्त कराने का प्रयास किया — इन कानूनों को ‘सुनहरी कानून’ भी कहा जाता है।
  • ‘जाट गजट’ में ‘बेचारा किसान’ शीर्षक से 17 लेखों की शृंखला भी लिखी। जनसाधारण ने उन्हें ‘रहबर-ए-आज़म’, ‘दीनबंधु’ तथा ‘किसानों का मसीहा’ जैसे नाम दिए।
  • 1920 में छोटूराम ने कांग्रेस छोड़ दी, 1923 में यूनियनिस्ट पार्टी की स्थापना की, 1924 में ‘जमींदारा लीग’ की स्थापना की। ‘दीनबंधु’ की उपाधि महात्मा गाँधी और एंड्रूज ने दी थी। 1927 में अंग्रेजों ने राय बहादुर तथा 1937 में ‘सर’ व नाइट की उपाधि दी।
  • छोटूराम मंत्री बनने पर अपनी सैलरी का एक तिहाई भाग जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई व गरीबों की भलाई में लगाते थे — इन्हें भाखड़ा नांगल बांध का जन्मदाता कहा जाता है। 1938 में मार्केटिंग बोर्ड का गठन किया। मृत्यु 9 जनवरी 1945। 1942 भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ‘सर’ व ‘रायबहादुर’ की उपाधियाँ त्याग दी थीं।
  • गढ़ी सांपला में इनकी सबसे ऊँची 64 फीट की प्रतिमा बनी है (वास्तुकार राम सुतार); अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। 1995 में भारत सरकार ने इनके नाम की डाक टिकट (100 पैसे) जारी की।

लाला लाजपत राय

‘पंजाब केसरी’‘शेर-ए-पंजाब’ नाम से मशहूर; जन्म 28 जनवरी 1865 पंजाब प्रांत में (पिता कृष्ण कुमार); मृत्यु 17 नवम्बर 1928। वकालत की पढ़ाई हिसार से 1885 में शुरू की — इनकी कर्मभूमि हिसार है। 1908 में वकालत पूरी करने इंग्लैंड गए थे। 1886 में आर्य समाज की शाखा हिसार में लाए। कांग्रेस की शाखा हरियाणा में हिसार (1887) व रोहतक (1888) में लाए; 1907 में पूरे हरियाणा में कांग्रेस की शाखा खुल गई थी। रचना — ‘इंग्लैंड का भारत पर कर्ज’। (स्वतंत्रता आंदोलन में हरियाणा की पूरी भूमिका हरियाणा का इतिहास में पढ़ें।)

पंडित नेकीराम शर्मा (हरियाणा केसरी)

जन्म 5 सितम्बर 1887, कैलंगा गाँव (भिवानी); मृत्यु 8 जून 1956। 1930 में ‘संदेश’ पत्रिका का संपादन किया; हिंदी में ‘संध्या’ पत्रिका भी निकाली। हरियाणा के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे — प्रथम विश्व युद्ध में भारतीयों की भागीदारी का विरोध किया था। एक बार रोहतक के कमिश्नर ने पूछा ‘बोलो पंडित जी कितनी भूमि चाहिए’, तो नेकीराम शर्मा ने कहा ‘मुझे तो संपूर्ण भारत की भूमि चाहिए’। हरियाणा में होमरूल लीग आंदोलन की शुरुआत इन्होंने ही की थी। हरियाणा केसरी सम्मान 2024 में सुनील कुमार व प्रियंका को मिला।

रायबहादुर लाला मुरलीधर

‘पंजाब केसरी’ रायबहादुर लाला मुरलीधर का संबंध हरियाणा के पलवल जिले से है; कर्मभूमि अम्बाला थी। 1885 में कांग्रेस स्थापना के समय 72 सदस्यों में हरियाणा से एक व्यक्ति मुरलीधर थे। हरियाणा में कांग्रेस की शाखा 1886 अम्बाला में लाए। इन्हें ‘ग्रेट ओल्ड मैन ऑफ पंजाब’ कहते हैं तथा हरियाणा का पहला सत्याग्रही पुरुष माना जाता है। असहयोग आंदोलन के दौरान ‘रायबहादुर’ की उपाधि वापस कर दी; जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय ‘सर’ की उपाधि भी वापस कर दी थी। ‘खैर अंदेश’ पत्रिका के संपादक थे (1888-89, उर्दू भाषा)।

अन्य प्रसिद्ध व्यक्ति (जारी)

  • संत गरीब दास — जन्म 1717 ई. छुड़ानी गाँव, झज्जर में।
  • तैय्यब हुसैन — जन्म नूंह में; एकमात्र ऐसे व्यक्ति जो हरियाणा, पंजाब और राजस्थान तीनों से विधायक बने।
  • संत निश्चलदास — जन्म सन् 1791 ई. धनाना (भिवानी) में; दिल्ली के दादूपंथी साधु अमरदास से भी शिक्षा प्राप्त की।
  • अल्ताफ हुसैन हाली — उर्दू कवि; जन्म 11 नवम्बर 1837 पानीपत (पिता इजदबख्शा, माता इमता उल रसू); मृत्यु 30 सितम्बर 1914; उर्दू गजल गायक कवि; इनकी याद में हरियाणा उर्दू साहित्य अकादमी ‘हाली पुरस्कार’ देती है; रचनाएँ- तिरिया के मजमून, यादगार-ए-हाली, हयात-ए-हाली, मुसद्दस-ए-हाली, मजलिस-उल-निसा; 1904 में ‘शम्स-उल-उलेमा’ की उपाधि मिली।
  • अनूप चंद आफ़ताब — पानीपत निवासी; उर्दू साहित्य के पहले राजकीय कवि का दर्जा; ‘यादगार-ए-सलीम’ के रूप में वर्णित।
  • ख्वाजा अहमद अब्बास — जन्म पानीपत में; उर्दू लेखन व पत्रकारिता में कार्य; ‘मेरा नाम जोकर’ रचना दी।
  • सर शादीलाल — जन्म 1874 ई. रेवाड़ी में; 1900 में लाहौर से वकालत; 1909 में ब्रिटिश सरकार से रायबहादुर उपाधि; 1910 पंजाब विधानसभा सदस्य; पंजाब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त होने वाले प्रथम भारतीय; पाँच वर्ष लंदन में प्रिवी काउंसिल सदस्य भी रहे।
  • मंसूर अली खान पटौदी — भारतीय क्रिकेट टीम के हरियाणा से पहले कप्तान; अभिनेता सैफ अली खान के पिता; पटौदी को ‘नवाबों का शहर’ कहते हैं।
  • सूरदास — अकबर के समकालीन; जन्म हरियाणा की पावन भूमि सीही (फरीदाबाद) में सन् 1478 ई.; विक्रमी संवत् 1640 तक कृष्ण भक्ति में भजन गाए; बचपन से अंधे थे; गुरु वल्लभाचार्य; ब्रज भाषा के कवि; रचनाएँ- सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य-लहरी, नल दमयंती, ब्याली।
  • डॉ. गोपीचन्द भार्गव — जन्म 1890 सिरसा में; 1920 में गाँधी जी के सहयोग आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया, अंग्रेज सरकार ने नजरबंद किया; स्वतंत्रता बाद पंजाब के मुख्यमंत्री बने; देहांत 1966।
  • बाबू श्यामलाल सत्याग्रही — जन्म सिरसा में; असहयोग आंदोलन में कड़ी सजा मिली; चाँद बाई के पिता थे।
  • ऋचा शर्मा — जन्म फरीदाबाद में; गीत “माही वे” अत्यधिक लोकप्रिय हुआ।
  • बंदा बैरागी — बचपन का नाम लक्ष्मणदेव; गुरु रामदास से शिक्षा बाद ‘माधोदास बैरागी’ कहलाए; 1708 में 10वें गुरु गोविंद सिंह ने ‘गुरुबख्शा सिंह’ नाम दिया, सिक्खों के 11वें गुरु माने जाते हैं; पर गुरु गोविंद सिंह के देहांत बाद ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ को ही गुरु माना; मृत्यु 9 जून 1716।
  • उर्वशी बटालिया — जन्म अम्बाला में; प्रसिद्ध भारतीय नारीवादी लेखिका; रचनाएँ- जुबान बुक्स (2003), काली फॉर वीमेन (1984); 2011 पद्मश्री।
  • मुरारी लाल शर्मा — रोहतक के प्रसिद्ध कवि; ‘द अरब एंड हिज कैमल’ का हिंदी अनुवाद किया; ‘नीरस कवि’ नाम से जाने जाते हैं; ‘नीरस की दुर्गा उपासना’ लिखी व दुर्गा सप्तशती का हिंदी अनुवाद किया।
  • अल्हड़ बीकानेरी — रेवाड़ी के हिंदी कवि; पूरा नाम श्यामलाल शर्मा; हास्य रत्न पुरस्कार, हरियाणा गौरव पुरस्कार व 1996 राष्ट्रपति पुरस्कार; प्रमुख कृतियाँ- घाट घाट, अभी हस्ता हूँ, अब तो आंसू पोंछा हूँ, रेत का जहाज, खोल देना द्वार, भज प्यारे तू सीताराम, जय मैडम बोल रे।
  • सतीश कौशिक — महेंद्रगढ़ के प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक व थिएटर व्यक्ति।
  • सोनू निगम — गायक, जन्म फरीदाबाद; 1995 में ‘बेवफा सनम’ से सफलता शुरू; फिल्म ‘बॉर्डर’ का गीत “संदेशे आते हैं” गाया।
  • गुलाम फरीद साबरी — रोहतक (वर्तमान दादरी) में जन्मे प्रसिद्ध कव्वाली गायक।
  • शमीम शर्मा — हिसार के प्रसिद्ध साहित्यकार; रचनाएँ- चौपाल का मखौल, चौपाल के चाले।
  • चौ. टिकाराम — जन्म 1898, मंडोरा गाँव (रोहतक); 1926 पंजाब काउंसिल सदस्य; रोहतक के जमींदार लीग पार्टी के महामंत्री, 1930 में पार्टी अध्यक्ष बने।
  • पहलवान लीलाराम — विश्व विजेता पहलवान, जन्म 1930 दादरी में।
  • नीरज चोपड़ा — जन्म 24 दिसम्बर 1997, खंडरा (पानीपत); भाला फेंक (जेवलिन थ्रो); भारतीय सेना में सूबेदार पद पर भी हैं; 2018 राष्ट्रमंडल खेल (ऑस्ट्रेलिया) स्वर्ण; 2021 टोक्यो ओलंपिक में 87.58 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण — भाला फेंक में ओलंपिक स्वर्ण दिलाने वाले भारत के पहले खिलाड़ी; 2018 अर्जुन अवार्ड, 2020 विशिष्ट सेवा मेडल, 2021 मेजर ध्यानचंद अवार्ड, 2022 डायमंड लीग पुरस्कार व पद्म श्री; पेरिस ओलंपिक 2024 रजत; स्विट्जरलैंड पर्यटन ने अपना मैत्री दूत बनाया है।
  • शबनम बानो — मेवात जिले की; हरियाणा की संस्कृत की पहली मुस्लिम महिला लेक्चरार।
  • शमीला — रेवाड़ी जिले की; हरियाणा रोडवेज बस की प्रथम महिला बस कंडक्टर।
  • मधु शर्मा — हरियाणा की प्रसिद्ध रागिनी गायिका; जन्म पेहोवा (कुरुक्षेत्र)।
  • सुरेन्द्र शर्मा — प्रसिद्ध हरियाणवी हास्य कवि; नांगल (महेंद्रगढ़) से सम्बंधित; कविताओं में मारवाड़ी भाषा का प्रयोग; शुरुआती लाइन “चार लाइना सुना रयो हूँ”; 2013 पद्मश्री।
  • बलवन्त राय तायल — 1975 आपातकाल में नजरबंद; 1979 चौ. देवीलाल सरकार में वित्तमंत्री रहे; पंजाब से हरियाणा अलग होने की माँग के समय हिंदी क्षेत्र की समिति के अध्यक्ष थे।

हरियाणा के व्यक्तियों के उपनाम

व्यक्तिउपनाम
कपिल देवहरियाणा हरिकेन
पण्डित नेकीराम शर्माहरियाणा केसरी
मास्टर चन्दगीरामहिन्द केसरी / भारत केसरी
चौधरी बंसीलालहरियाणा का लौह पुरुष, आधुनिक हरियाणा का निर्माता, शिल्पीकार
चौ. देवीलालजननायक, किंग मेकर, ताऊ, किसानों का मसीहा, शेर-ए-हरियाणा, राजनीति के भीष्म पितामह
मूलचंद जैनहरियाणा का गांधी
ओमप्रकाश जिंदलहरियाणा का स्टील किंग
राजा सूरजमलजाटों का अफलातून
हर्षवर्धनसाहित्यकार सम्राट, शिलादित्य
दीपचंद बहमणहरियाणा का कालिदास / शेक्सपियर
पं. लख्मीचंदसूर्यकवि, हरियाणा का तानसेन, सूफी दर्शन की मीरा
राजेन्द्र सिंह खरकियासरस्वती पुत्र
बाबू बाल मुकुंद गुप्तपत्रकारिता के पितामह
सज्जन सिंहरुस्तम-ए-हिन्द
किशनलाल भट्टसांगों के भीष्म पितामह
पण्डित मांगेरामकवि शिरोमणि
पण्डित जसराजस्वर सम्राट, संगीत मार्तंड
उदय भानु हंस (HR का प्रथम राज्यकवि)रुबाई सम्राट
सुरेन्द्र शर्माहरियाणा का प्रथम हास्य कवि / चार लाइनों वाले कवि
मीर जाफर जट्टालीहरियाणा का प्रथम हास्य व्यंग्य कवि
चौधरी भजनलालराजनीति का चाणक्य
चौधरी छोटूरामकिसानों का मसीहा, सर, दीनबन्धु, रहबर-ए-आज़म
नवदीप सिंह (क्रिकेटर)करनाल एक्सप्रेस
लाला मुरलीधररायबहादुर, केसर-ए-हिन्द, ग्रेट ओल्ड मैन ऑफ पंजाब व हरियाणा
पं. श्रीराम शर्माग्रैंड ओल्डमैन ऑफ हरियाणा
श्री मनोहर लाल खट्टरकाका / हेडमास्टर
जगत जाखड़रोबिन हुड
दयाचन्द मायनाजॉन मिल्टन
मंसूर अली खानटाइगर पटौदी
वीरेन्द्र सहवागनजफगढ़ का नवाब, मुल्तान का सुल्तान
शेफाली वर्मालेडी सहवाग
देवेन्द्र सूराट्री मैन
चौधरी वीरेन्द्र सिंहबांगर का शेर
अलीबक्शहरियाणा के लोक रंगमंच का पितामह
संत दादू दयालराज्य का प्रमुख भक्ति संत
लाला लाजपतरायपंजाब का शेर / पंजाब केसरी
हेमू / हेमचन्द्र विक्रमादित्यहरियाणा / उत्तर भारत का नेपोलियन
कल्पना चावलास्पेस क्वीन
ममता खरबगोल्डन गर्ल
शिवांगी पाठकईगल ऑफ द माउंटेन
कविता दलालहार्ड लेडी / लेडी खली
सुनील दत्तपप्पा जी
प्रदीप नरवाल (कबड्डी)डुबकी किंग
संदीप (पेहोवा)फ्लीकर
नीरज चोपड़ागोल्डन बॉय, द मैन विद ए गोल्डन आर्म
सविता पूनिया (हॉकी-सिरसा)द ग्रेट वाल ऑफ इंडिया
संत सूरदासवात्सल्य रस के सम्राट, हिन्दी साहित्य के सूर्य
सेठ छाजूराम (दानी)भामाशाह
शाह मुहम्मदहादी-ए-हरियाणा
खुशीराम (HR का द्वितीय राजकीय कवि)द स्कोरिंग मशीन ऑफ एशिया, इंडिया का माइकल जॉर्डन, मैजिशियन ऑफ बास्केटबॉल
अरुणा आसफ अलीदा ग्रैंड ओल्ड लेडी
मोनिका सोनी और दिलराज कौरहरियाणा की लता मंगेशकर
अल्हड़ बीकानेरीहरियाणा का हास्य रत्न

हरियाणा के ब्रांड एम्बेसडर

ब्रांड एम्बेसडरअभियान
मनु भाकर (झज्जर)खसरा व रूबेला
C.M. मनोहर लाल, अमिताभ बच्चनटी.बी. फ्री
धर्मेन्द्र व हेमा मालिनीहरियाणा पर्यटन विभाग
शेखर गुरेरा (गुरुग्राम)स्वास्थ्य विभाग
गौरी श्योराणचेचक व खसरा
संजय दत्त (यमुनानगर से सम्बंधित)बेटा बचाओ नशा भगाओ
प्रीति चौधरीपानीपत से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
मानुषी छिल्लर (झज्जर)एनीमिया फ्री हरियाणा
सविता पुनिया (जोधका-सिरसा)सिरसा से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
दीपा मलिक (सोनीपत)हरियाणा व दिल्ली में चुनाव
साक्षी मलिक (मोखरा, रोहतक)बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ — पूरे हरियाणा की
शिवानी कपूर (पंचकुला)बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ — केवल पंचकुला
अनु कुमारी (सोनीपत)बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ — केवल सोनीपत
योगेश्वर दत्तखेलों का एम्बेसडर
नीरज चोपड़ाभारतीय निर्वाचन आयोग

हरियाणा के ऋषि-मुनि और उनके आश्रम

ऋषिस्थलजिला
च्यवन ऋषिढोसी तीर्थमहेन्द्रगढ़
मारकेण्डेय ऋषिमारकेण्डेय तीर्थकुरुक्षेत्र
परशुरामरामरायहदजींद
ययाति ऋषिपेहोवाकुरुक्षेत्र
चैतन्य महाप्रभुकुबेर तीर्थकुरुक्षेत्र
कपिल मुनिकलायतकैथल
वशिष्ठ ऋषिपेहोवाकुरुक्षेत्र
वेदव्यास ऋषिबस्तलीकरनाल
अगस्त्य ऋषिकपालमोचनयमुनानगर
गौतम ऋषिगोदरकरनाल
जमदग्नि ऋषिराखीगढ़ीहांसी
उद्दालक ऋषिस्याणा गाँवमहेन्द्रगढ़
विश्वामित्र ऋषिपेहोवाकुरुक्षेत्र
दधीचि ऋषिज्योतिसरोवरकुरुक्षेत्र
परासर ऋषिबहलोलपुरकरनाल

हरियाणा में किले और दुर्ग

  • रामगढ़ का किला — पंचकुला में स्थित; निर्माण चन्देल वंश के राजपूत शासकों द्वारा; हरियाणा पर्यटन विभाग ने यहाँ एक हैरिटेज होटल बना रखा है; यह लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
  • रायपुर रानी का किला — रायपुर रानी (पंचकुला) में स्थित; गुरु गोबिंद सिंह जी से सम्बंधित है।
  • बुढ़िया का रंगमहल — यमुनानगर के बुढ़िया गाँव में; शाहजहाँ के काल का; बीरबल से सम्बंधित है।
  • छछरौली का किला — यमुनानगर के छछरौली गाँव में; कलसिया राजा की राजधानी हुआ करता था।
  • लोहारू का दुर्ग — लोहारू (भिवानी) में; निर्माण 1570 ई. में अर्जुन सिंह द्वारा।
  • चनेटी का स्तूप — ह्वेनसांग के अनुसार यमुनानगर में राजा अशोक ने बनवाया था।
  • ढोसी का किला — महेन्द्रगढ़ में; हेमचन्द्र विक्रमादित्य (हेमू) ने बनवाया था।
  • माधोगढ़ का किला — 18वीं शताब्दी में महेन्द्रगढ़ में सवाई माधोसिंह ने बनवाया।
  • कानौड़ का किला — महेंद्रगढ़; 19वीं शताब्दी में मराठा शासक तात्या टोपे ने बनवाया; बाद में 1861 पटियाला शासक नरेन्द्र ने इसका नाम अपने बेटे (महेन्द्र) पर रख दिया।
  • बीरबल का छाता — निर्माण शाहजहाँ के काल में दीवान-ए-राइब ने किया (कुछ मत अनुसार बाल मुकुंद दास ने करवाया); बाद में बीरबल के आने के कारण ‘बीरबल का छाता’ कहलाने लगा।
  • हिसार-ए-फिरोजा — निर्माण 14वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक द्वारा।
  • हांसी का किला — ‘असीगढ़ का किला’ भी कहते हैं, क्योंकि प्राचीन समय यहाँ तलवारें (असी) बनाई जाती थीं; निर्माण पृथ्वीराज चौहान III ने करवाया; इसका एक बड़ा दरवाजा अलाउद्दीन खिलजी ने बनवाया था।
  • तरावड़ी का किला — पृथ्वीराज चौहान द्वारा बनवाया गया; करनाल जिले के तरावड़ी नामक स्थान पर स्थित है।
  • तोशाम की बारादरी — तोशाम (भिवानी) में स्थित; इसे ‘पृथ्वीराज चौहान की कचहरी’ कहते हैं।
  • फर्रुखनगर का किला — गुरुग्राम में स्थित; निर्माण 1732 ई. में फौजदार खान (मुगल शासक) द्वारा।
  • बादशाहपुर का किला — गुरुग्राम में स्थित।
  • गोपाल गिरी का दुर्ग — बलवन (गुलाम/दास वंश) ने गुरुग्राम में बनवाया।
  • सोहना का किला — निर्माण 18वीं शताब्दी में राजा सोहन सिंह द्वारा।
  • सारस का किला — राजा सारस ने सिरसा में बनवाया।
  • जींद का किला — निर्माण 1775 ई. में राजा गजपत सिंह द्वारा; 1844 ई. में जींद रियासत के नरेश सरूप सिंह की सबसे छोटी रानी ‘जींद कौर’ का इस पर अधिकार हो गया।
  • दरियापुर का किला — सोनीपत में पृथ्वीराज चौहान III द्वारा निर्मित, नाम उनके सेनापति दरियासिंह पर रखा गया; मोहम्मद गोरी ने इसे नष्ट कर दिया था।
  • कुंजपुरा का किला — निर्माण शाहजहाँ के शासनकाल में करनाल में हुआ।
  • महम की बावड़ी — निर्माण 1656 में शुदोकलाल खां द्वारा, महम (रोहतक) में।
  • राजा नाहर सिंह का किला — फरीदाबाद में राजा बल्लू के शासनकाल में निर्मित; बाद में पुत्र कृष्ण ने पुनर्निर्माण करवाया; दो दरवाजे — अजीत सिंह व बल्लू के नाम पर।
  • निवाजपुर का किला — नारनौल के पास निवाजपुर गाँव में; मुगलों के जागीरदार निवाज अली द्वारा निर्मित।
  • मटिया का महल — पलवल में सूरजमल द्वारा अपनी पत्नी किशोरी के नाम पर बनवाया; इसमें 12 खम्बा छतरी है।
  • घसेरा का किला — नूंह जिले में स्थित।
  • तावड़ू का किला — नूंह जिले के तावड़ू गाँव में; इसमें नूंह का पुलिस थाना स्थित है।
  • जलमहल — निर्माण 1591 में महेन्द्रगढ़ में शाह कुली खान द्वारा; हरियाणा का दूसरा जलमहल होडल (पलवल) में है।
  • समरू बेगम महल — गुरुग्राम जिले में, बादशाहपुर-झाड़सा के बीच इस्लामी शैली में निर्मित।

हरियाणा की मजार, मकबरे, दरगाह और मस्जिद

पानीपत

  • हजरत शेख जलालुद्दीन की दरगाह (कबीर-उल-औलिया) — शेख जलालुद्दीन पानीपत के प्रमुख सूफी संत थे, बू अली शाह कलंदर के समकालीन।
  • बू-अलीशाह कलंदर दरगाह — हरियाणा में चिश्ती संप्रदाय की स्थापना शेख फरीद ने की थी; बू अली शाह कलंदर भी चिश्ती सम्प्रदाय के सूफी संत थे।
  • अल्ताफ हुसैन हाली की कब्र — हाली उर्दू, अरबी, फारसी व अंग्रेजी के अच्छे ज्ञाता थे; शिक्षा प्रचार हेतु चंदा एकत्रित कर पुस्तकालय बनवाया, साथ ही एक छोटा स्कूल शुरू किया जो बाद में ‘हाली हाई स्कूल’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
  • सैयद रोशन अली साहिब की दरगाह — यहाँ सर्वधर्म के लोग भाईचारे हेतु दुआ करने पहुँचते हैं।
  • काबुली बाग मस्जिद — पानीपत के निकट काबुली बाग में मस्जिद व तालाब; बाबर ने पानीपत की पहली लड़ाई की विजय की खुशी तथा अपनी प्रिय रानी मुसम्मत काबुली बेगम की याद में बनवाया।
  • इब्राहिम लोदी की कब्र — 1526 में इब्राहिम लोदी ने बाबर से युद्ध किया, मारा गया; युद्ध-स्थल पर ही दफनाकर कब्र बनाई गई।
  • हजरत ख्वाजा शमसुद्दीन का मकबरा — पानीपत के प्रमुख संत, बू-अली शाह कलंदर के समकालीन; पास की जामा मस्जिद नगर की सबसे बड़ी मस्जिद है।
  • सलार फकरुद्दीन व हाफिज जमाल का मकबरा — बू अली शाह कलंदर के माता-पिता का मकबरा।

सोनीपत

  • पीर जमाल खां की मजार — गोहाना में स्थित; हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मानी जाती है।
  • ख्वाजा खिज्र का मकबरा — इब्राहिम लोदी ने ख्वाजा खिज्र की याद में बनवाया।
  • मामा-भांजा दरगाह — इमाम नसरुद्दीन व उनके भांजे इब्राहिम अब्दुल्ला की मजार; यह दरगाह एक शिव मंदिर में स्थित है — हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की अनूठी मिसाल।

अन्य जिले

  • जींद — हजरत गाजी की दरगाह। गुरुग्राम — सराय अलीवर्दी की मस्जिद।
  • कैथल — रज़िया बेगम का मकबरा (संगरूर रोड पर; रज़िया व उनके पति अल्तूनिया का कत्ल कैथल के निकट हुआ था); पीर चेतन शाह की मजार; बाबा शाह कमाल की मजार।
  • फतेहाबाद — हुमायूं की मस्जिद (शेरशाह सूरी से पराजित होकर हुमायूं फतेहाबाद-सिरसा से अमरकोट जाते समय यहाँ मस्जिद बनाने की घोषणा की थी); मीर शाह मजार (पास एक पत्थर पर बादशाह हुमायूं का अभिलेख भी उत्कीर्ण है)।
  • फरीदाबाद — बाबा फरीद टोम्ब (सूफी संत बाबा फरीद ने फरीदाबाद नगर की स्थापना की थी); ख्वाजा की सराय (गाँव सराय ख्वाजा में 300 वर्ष पुरानी सराय, इसी के नाम पर गाँव का नाम पड़ा, निर्माण पीर ख्वाजा द्वारा)।
  • रेवाड़ी — इब्राहिम 12 हजारी की मस्जिद (मोहम्मद गौरी के जनरल इब्राहिम 12 हजारी के नाम पर, जिसने रेवाड़ी के चौहान सरदार को हराया था); मुफ्ती निजामुद्दीन की मजार (रेवाड़ी कुतुबपुर निवासी, 1857 की क्रांति में राव तुलाराम की सेना में थे, 16 नवंबर 1857 नसीबपुर युद्ध में वीरगति); लाल मस्जिद (पुरानी कचहरी के समीप, निर्माण 1570, अकबर के शासनकाल में)।
  • महेंद्रगढ़ — इब्राहिम खान का मकबरा (नारनौल, विशाल गुंबद, निर्माण शेरशाह सूरी ने अपने दादा इब्राहिम खान की याद में); हमजा पीर दरगाह (गाँव धरसू, पूरा नाम हजरतशाह कलमुद्दीन हमजा पीर हुसैन, यहाँ महिलाओं का प्रवेश वर्जित); शाह विलायत का मकबरा (इब्राहिम खान के मकबरे के पास, बड़े आकार का)।
  • मेवात (नूंह) — हजरत शेख मूसा की दरगाह (संबंध ईरान से, दिल्ली के सूफी हजरत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य, पल्ला गाँव में पहाड़ी की तलहटी पर, अकबर द्वारा निर्मित)।
  • झज्जर — काजी की मस्जिद (पहले रोहतक में थी, अब गाँव दुजाना में प्राचीनतम मस्जिद; लगभग 200 साल पहले सैयद हाफिजजुद्दीन नामक काजी ने बनवाई)।
  • करनाल — मिरा साहब की मकबरा; दरगाह कलंदर शाह (निर्माण अलाउद्दीन खिलजी के पुत्र खिजान खान और शादी खान द्वारा); पांच पिरों की मजार।
  • अम्बाला — पीर नौ-गजा की मजार (मनोकामना पूर्ण होने पर घड़ी चढ़ाई जाती है)।
  • कुरुक्षेत्र — शेख चिल्ली का मकबरा (‘हरियाणा का ताजमहल’; औरंगजेब के भाई दारा शिकोह ने शेख चिल्ली के जीते-जी इस इमारत को बनवाया; अधिनियम 1958 के तहत राष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित)।
  • रोहतक — शीशे वाली मस्जिद (प्रवेश द्वार संगमरमर से निर्मित, चमेली बाजार में स्थित); लाल मस्जिद (निर्माण 1939, नगर व्यापारी हाजी अली द्वारा); दीनी मस्जिद (ऐतिहासिक प्राचीन मस्जिद; अलाउद्दीन के शासनकाल में मंदिर को मस्जिद का रूप दिया गया, 1947 में पुनः मंदिर का रूप दिया गया)।
  • हिसार — शेख जुनैद की मजार; चार कुतुब की दरगाह (हांसी); चालीस हाफिज का मकबरा; पीर मीठा की दरगाह (तलवंडी)।
  • दादरी — पीर मुबारक शाह की दरगाह।

हरियाणा में गुरुद्वारे

जिलागुरुद्वारे
यमुनानगरगुरुद्वारा कपाल मोचन
पंचकुलागुरु मांजी साहिब गुरुद्वारा, नाडा साहिब गुरुद्वारा (गुरु गोबिंद सिंह)
कैथलगुरुद्वारा नीम साहिब, गुरुद्वारा मांजी साहिब, गुरुद्वारा गुरु नानकदेव जी, टोपियों वाला गुरुद्वारा
जींदधमतान साहिब (सबसे बड़ा गुरुद्वारा)
हिसारगुरुद्वारा श्री गुरसिंह सभा
कुरुक्षेत्रगुरुद्वारा छठी पातशाही, गुरुद्वारा नौवीं पातशाही, राजघाट गुरुद्वारा, श्री शीशमहल साहिब, गुरुद्वारा श्री बावली साहिब, श्री मस्तगढ़ साहिब, गुरुद्वारा श्री दमदमा साहिब, गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब (शाहबाद)
महेंद्रगढ़गुरुद्वारा गुरु दशमेश, गुरुद्वारा श्री गुरसिंह सभा
रोहतकगुरुद्वारा बंगला साहिब, गुरुद्वारा लाखन माजरा
अंबालागुरुद्वारा मांजी साहिब (गुरु हरगोबिंद), सूरजकुंड गुरुद्वारा, पंजोखडा गुरुद्वारा, शीशगंज गुरुद्वारा, गुरुद्वारा बादशाही बाग, गुरुद्वारा लखनौर साहिब
सिरसाचोरमार खेड़ा गुरुद्वारा, चिल्ला साहिब गुरुद्वारा

जिलेवार अन्य पूर्ण जानकारी हेतु हरियाणा के 23 जिलों का परिचय देखें।

खास बातें

  • राज्य का एकमात्र ऐसा गुरुद्वारा जहाँ गुरुग्रन्थ साहिब व रामायण दोनों का पाठ एक साथ किया जाता है — टोपियों वाला गुरुद्वारा (कैथल)
  • राज्य के किस गुरुद्वारे की स्थापना दसवें सिक्ख गुरु गोविन्द सिंह ने की थी — कपाल मोचन गुरुद्वारा (यमुनानगर); इस गुरुद्वारे में हथियारों का संग्रहालय स्थित है; यहाँ गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने अस्त्र-शस्त्र धोए थे।
  • गुरुद्वारा नीम साहिब (कैथल) — गुरु तेग बहादुर से सम्बंधित; मान्यता है यहाँ आने से बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं।
  • राज्य में गुरुद्वारों का शहर कैथल कहलाता है, लेकिन राज्य में सर्वाधिक गुरुद्वारों की संख्या अंबाला में है।
  • 175 फुट ऊँचे निशान साहिब की स्थापना किस गुरुद्वारे में की गई — (हिसार) गुरुद्वारा श्री गुरसिंह सभा।
  • गुरुद्वारा चिल्ला साहिब (सिरसा) — यहाँ मुस्लिम फकीरों का मेला भरता है; गुरु नानक यहाँ 40 दिन तक रुके थे।
  • चोरमार खेड़ा गुरुद्वारा (सिरसा) — सिक्खों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जब रात को सो रहे थे तो चोरों ने उनका घोड़ा चुरा लिया, पर वे अंधे हो गए और घोड़ा नहीं ले जा सके; बाद में वे गुरु गोविन्द सिंह के शिष्य बन गए।
  • गुरुद्वारा लखनौर साहिब (अम्बाला) — सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह की माता के जन्म से सम्बंधित; यहाँ दसवें गुरु का ननिहाल था।
  • गुरुद्वारा लाखन माजरा (रोहतक) — गुरु तेग बहादुर जब शहादत देने जा रहे थे तो 13 दिन रास्ते में इसी गुरुद्वारे में रुके थे।
  • गुरुद्वारा धमतान साहिब (जींद) — हिन्दू व सिक्ख दोनों के लिए पूजनीय; पितृपक्ष की अमावस्या को यहाँ भव्य मेला लगता है, जिसमें हरियाणा, पंजाब व दिल्ली से भारी संख्या में लोग आते हैं।
  • पंचकुला के नाडा साहिब गुरुद्वारे में गुरु गोविन्द सिंह रुके थे — वे भागानी की लड़ाई (1688) के लिए जा रहे थे।
  • पंजोखड़ा गुरुद्वारा — सिक्खों के 8वें गुरु हरकिशन को समर्पित।

हरियाणा के मंदिर

  • राम देव मंदिर, कागदाना (सिरसा) — रामदेव जी राजस्थान के बीकानेर जिले रुणेचा के रहने वाले तंवर राजपूत वंश के हैं; इनके पुरुष भक्तों को ‘कामड़’ व महिला भक्तों को ‘तेरह ताली’ कहा जाता है; हरियाणा में रामदेव जी का सबसे बड़ा मंदिर कागदाना में है; जनवरी-फरवरी माह में बड़ा मेला लगता है।
  • राधा स्वामी सत्संग घर (सिकंदरपुर, सिरसा) — मुख्य व्यास डेरा जिला अमृतसर (पंजाब) में स्थित है; सिरसा जिले के सिकंदरपुर गाँव में एक विशाल सत्संग घर है।
  • बुआ कुंवारी मंदिर (हांसी) — गाँव कुंवारी में स्थित; इसे सती ‘बुआ कुंवारी का मंदिर’ भी कहते हैं; यहाँ एक कुंवारी कन्या सती हुई थी, उसी के नाम पर गाँव का नाम कुंवारी पड़ा। (नोट- बुआ कुँवारी तालाब व गुम्बद झज्जर में स्थित है।)
  • बिश्रोई मंदिर (हिसार) — निर्माण श्री भजनलाल ने करवाया था।
  • आर्य समाज मंदिर (हिसार) — शहर के नागोरी गेट के समीप स्थित; स्थापना लाला लाजपत राय, पंडित लखपत राय, बाबू चूड़ामणि और चंदूलाल, हरीलाल व बालमुकुंद आदि द्वारा 1886 में हुई; लाला लाजपत राय 1 वर्ष के लिए इसके संस्थापक सचिव भी रहे।
  • देवी भवन मंदिर (हिसार) — श्री देवी धाम को मंदिरों की संगम स्थली भी कहा जाता है; शुरुआत वर्ष 1970 में हुई।
  • अग्रोहा धाम मंदिर (हिसार) — निर्माण 1976 में शुरू हुआ, 1984 में पूरा हुआ; हिंदू देवी महालक्ष्मी को समर्पित; एक ईंट और एक रुपए के नारे से बना है।
  • भिवानी में — गौरी-शंकर मंदिर, देवसर माता का मंदिर (देवसर), विष्णु मंदिर (तोशाम), पहाड़ी माता मंदिर (लौहारू), बाबा मूँगीपा मंदिर (तोशाम), जोगीवाला मंदिर, स्टार मंदिर (दिनोद गाँव), प्रणामी मंदिर (निर्माणाधीन), मोटी माता मंदिर (धनाना), किरोड़ीमल मंदिर।
  • कुरुक्षेत्र में — दुखभंजनेश्वर मंदिर, देवीकूप (भद्रकाली) मंदिर, सर्वेश्वर महादेव मंदिर, अदिति का मंदिर (अमीन गाँव), लक्ष्मी नारायण मंदिर, स्थानेश्वर महादेव मंदिर (थानेसर — अलबरूनी के अनुसार यहाँ पीतल निर्मित देवताओं की कई मूर्तियाँ मिली हैं), बिरला मंदिर (निर्माण 1955 जुगल किशोर बिड़ला ने करवाया, दीवारों पर गीता के श्लोक अंकित हैं)।
  • कैथल में — ग्यारह रुद्री शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, अंजनी माता मंदिर, अम्बकेश्वर महादेव मंदिर, पुराना शिव पार्वती मंदिर (पुंडरीक), राधे श्याम मंदिर (पुंडरीक), शिव मंदिर (पुंडरीक), गीता भवन मंदिर (पुंडरीक तीर्थ के विशाल चबूतरों के पास)।
  • यमुनानगर में — इस्कॉन मंदिर (फरीदाबाद में भी है), पंचम कालीन जैन मंदिर (बुढ़िया), भगवान परशुराम सर्वधर्म मंदिर (जगाधरी), पंचमुखी हनुमान/चिट्टा हनुमान मंदिर, लकड़हारा मंदिर (जगाधरी), आदि बद्री नारायण मंदिर।
  • महेंद्रगढ़ में — शिव मंदिर बाघोत (बाघोत गाँव), चामुंडा देवी का मंदिर (नारनौल)।
  • करनाल में — माता बाला सुंदरी का मंदिर, सीता माई का मंदिर (माई गाँव — कहा जाता है यहीं धरती में सीता माई समा गई थीं और मूर्ति नेपाल से मंगाई गई)।
  • पानीपत में — देवी तालाब का शिव मंदिर, चिड़ाने वाली माता का मंदिर।
  • पलवल में — दाऊजी का मंदिर (बंचारी गाँव), पंचवटी मंदिर।
  • जींद में — भूतेश्वर मंदिर, जयंती देवी मंदिर, हटकेश्वर मंदिर।
  • रेवाड़ी में — घंटेश्वर मंदिर।
  • झज्जर में — भीमेश्वरी देवी (बेरी), रूद्रमल मंदिर (बेरी, 1892), डीघल गाँव का शिवालय।
  • रोहतक में — शिव मंदिर (किलोई गाँव)।
  • पंचकुला में — मनसा देवी का मंदिर (मनीमाजरा); भीमा देवी मंदिर — ‘उत्तर भारत का खजुराहो’ कहते हैं, शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में; दीवारों पर भित्तिचित्रों के 38 पैनल; गुंबदों-मीनारों सहित मुग़ल वास्तुकला का प्रतिनिधित्व।
  • गुरुग्राम में — एकलव्य मंदिर (खांडसा गाँव, भारत का सबसे बड़ा एकलव्य मंदिर); शीतला माता मंदिर — ‘कृपि’ का विवाह द्रोणाचार्य से हुआ था; महाभारत में द्रोणाचार्य की हत्या के बाद कृपि सती हो गईं; 1650 में राजा जहवार ने यह सुंदर मंदिर बनवाया, जिसमें माता कृपि की एक चौथाई किलो सोने की मूर्ति स्थापित है; मान्यता है यात्रा से चेचक बीमारी दूर होती है; 1991 में शीतला माता पूजा स्थल बोर्ड का गठन हुआ, जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं; साल में दो बार (आषाढ़ व चैत्र माह) मेला लगता है।

हरियाणा के मेले

अंबाला

  • वामन द्वादशी का मेला — भाद्रमाह की द्वादशी को।
  • शिव चौदस उत्सव — दुराना में फाल्गुन माह में।
  • दुर्गाष्टमी उत्सव — नन्थोला में चैत्र अष्टमी को।
  • शारदा देवी का मेला — त्रिलोकपुर में चैत्र माह में।

करनाल

  • गोगा पीर का मेला — खेड़ा में भाद्रमाह नवमी को। परासर का मेला — तरावड़ी में फरवरी माह में। पांडु का मेला — पपहाणा में हर माह में।
  • बाबा सिमरनदास का मेला — इंद्री में अक्टूबर में। छड़ियों का मेला — अमरपुर में सितंबर में। किसान मेला — सितंबर माह में।

यमुनानगर

कपाल मोचन का मेला — बिलासपुर में कार्तिक माह में। पंचमुखी का मेला — छछरौली में।

जींद

  • हटकेश्वर का मेला — हाटगाँव में श्रावण के अंतिम रविवार को। भूतेश्वर का मेला — जींद में। सच्चा सौदा का मेला — सिंहपुरा में आषाढ़ पूर्णमासी को।
  • धमतान साहिब का मेला — हर अमावस्या को। पांडू पिंडारा का मेला — हर अमावस्या को। बिलसर का मेला — हंसहेडर में सोमवती अमावस्या को।

रेवाड़ी

बाबा पीर का मेला — धारूहेड़ा में चैत्र चतुर्दशी (कृष्णपक्ष) को। बाबा सूरज गिरी का मेला — खोरी में चैत्र एकम (कृष्णपक्ष) को।

सिरसा

  • रामदेव जी का मेला — कागदाना में माघ दशमी (शुक्लपक्ष) को। राधा स्वामी का मेला — सिकंदरपुर में मार्च व सितंबर में।
  • बाबा भूमण शाह का मेला — मंगला व गोदड़वाली में मकर संक्रांति को। बाबा सिमरण नाथ का मेला — सिरसा में चैत्र एकम (शुक्लपक्ष) को।

गुरुग्राम

  • शीतला माता का मेला — चैत्र (कृष्णपक्ष) को। भक्त पूर्णमल का मेला — कासन में भाद्रमाह में। शाह चोखा खोरी का मेला — अप्रैल-मई में।
  • बुढ़ी तीज का मेला — आलदुका में भाद्रपद तीज को। बुद्धोमाता का मेला — मुबारकपुर में मार्च में। गोगा जी का मेला — इस्लामपुर गाँव में।

महेंद्रगढ़

  • बाबा केसरिया का मेला — जेरपुर पाली में भाद्रमाह सप्तमी को। भूरा भवानी का मेला — चैत्र व आश्विन नवमी को। बाबा भिलाई नाथ का मेला — नांगलगढ़ में फाल्गुन में।
  • ढोसी का मेला — नारनौल में वैशाख नवमी (कृष्णपक्ष) को। चामुण्डा का मेला — नारनौल में।

कैथल

देहाती मेला — कैथल में। फल्गु का मेला — फरल में सोमवती अमावस्या को। पुंडरी का मेला — पुंडरी में अप्रैल माह में।

फरीदाबाद

  • सूरजकुंड का मेला — फरवरी माह में। कार्तिक सांस्कृतिक मेला — नाहर सिंह पैलेस में 1996 से हर साल। कान्हा का मेला — बहीन गाँव में फाल्गुन पंचमी को।
  • कालका का मेला — मोहना में चैत्र अष्टमी को। रामनवमी का मेला — फरीदाबाद में। गोगा पीर का मेला — बहबलपुर में। कनुआ का मेला — गाठोता में भाद्र एकादशी को।

मेवात

शिवजी का मेला — पुन्हाना में फाल्गुन चतुर्दशी को। रावण का मेला — पुन्हाना में।

पानीपत

कलंदर की मजार का मेला — रमजान माह में। पाथरी माता का मेला — पानीपत के पाथरी में हर बुधवार को।

झज्जर

  • बाबा गरीबदास का मेला — छुड़ानी में फरवरी-मार्च में। श्याम जी का मेला — दुबलधन में फाल्गुन द्वादशी को।
  • भीमेश्वरी माता का मेला — बेरी नामक स्थान पर। बाबा बुढ़ा का मेला — बादली में भाद्र नवमी (कृष्णपक्ष) को।

रोहतक

  • बाबा जमुनादास का मेला — भलोट में चैत्र अष्टमी को। बाबा मस्तनाथ का मेला — अस्थल बोहर में फरवरी-मार्च में।
  • होला मोहल्ला मेला — लाखन माजरा में फाल्गुन पूर्णिमा तथा गुरु तेग बहादुर की याद में लगता है।

हिसार और हांसी

  • शिव का मेला — किरमारा-सीसवाल में फाल्गुन माह में। काली देवी का मेला — हांसी में आश्विन माह (शुक्लपक्ष नवमी) को।
  • अग्रसेन जयंती मेला — अग्रोहा में अक्टूबर-नवंबर में। नवरात्रि का मेला — बास (हांसी) व बनभौरी (हिसार) में चैत्र माह (एकल शुक्लपक्ष) को।
  • जन्माष्टमी का मेला — हिसार में भाद्र अष्टमी (कृष्णपक्ष) को। HAU हिसार में हर वर्ष किसान मेला आयोजित होता है।

कुरुक्षेत्र

सूर्य ग्रहण स्नान — थानेसर में सूर्य ग्रहण के दिन। बैसाखी का मेला — 13 अप्रैल को। मारकंडा का मेला — शाहबाद में। महावीर जयंती उत्सव — लाडवा में चैत्र पूर्णिमा को। पेहोवा का मेला — सोमवती अमावस्या को।

भिवानी

  • मुंगीपा का मेला — रिवासा में कार्तिक चतुर्दशी (शुक्लपक्ष) को। सती का मेला — खरक कलां में भाद्रमाह पंचमी (शुक्लपक्ष) को।
  • पूर्णमासी का मेला — तोशाम में आश्विन पूर्णिमा को। बाबा खेड़ेवाला का मेला — नौरंगाबाद में श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) को।

पंचकुला

काली माई का मेला — कालका में चैत्र व आश्विन नवरात्रों में। भीमा देवी का मेला — पंचकुला में।

सोनीपत

  • सतकुम्भा का मेला — खेड़ी गुज्जर में श्रावण के अंतिम रविवार को। बाबा रामकृष्ण का मेला — खुवड़ू में फाल्गुन पूर्णिमा को।
  • डेरा नग्न बालनाथ का मेला — रमड़ा में फाल्गुन नवमी (शुक्लपक्ष) को।

फतेहाबाद व पलवल

  • ढिंगसरा का मेला — ढिंगसरा (फतेहाबाद) में। बाबा उदासीनाथ का मेला — अलावपुर (पलवल) में फाल्गुन कृष्णपक्ष अमावस्या को।
  • फुलडोर का मेला — अलरचढ़ा में चैत्र दूज को। बलदेव छठ का मेला — बल्लभगढ़ में भाद्र नवमी-दशमी को।

हरियाणा के संग्रहालय

पुरातत्व और संग्रहालय विभाग, हरियाणा का एक प्रमुख विभाग है, जो वर्ष 1969 में स्थापित हुआ। विभाग ने 30 स्मारकों को राज्य संरक्षित स्मारक/स्थलों के रूप में घोषित किया है। इनकी देखरेख ‘पंजाब प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक और पुरातत्व स्थल तथा भौतिकता अधिनियम, 1964’ के तहत की जा रही है। विभाग द्वारा राखीगढ़ी (हांसी) में साइट म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर की स्थापना प्रस्तावित है।

पांच क्षेत्रीय संग्रहालय

  1. जयंती पुरातत्व संग्रहालय — जींद
  2. जहाज कोठी — हिसार
  3. बाढ़ खालसा — राई (सोनीपत)
  4. गुरु गोविंद सिंह मार्शल आर्ट म्यूजियम — कपालमोचन (यमुनानगर)
  5. दीनबंधु चौधरी छोटूराम समर संग्रहालय — रोहतक

अन्य प्रमुख संग्रहालय

  • श्री कृष्ण संग्रहालय — थानेसर (कुरुक्षेत्र), स्थापना 1987; उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के विचारों-आदर्शों से लोगों को अवगत कराना।
  • लीलाधर दुःखी स्मारक सरस्वती संग्रहालय — सिरसा, स्थापना 26 अप्रैल 2001।
  • थानेसर संग्रहालय — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने थानेसर में शेखचिल्ली के मकबरे में स्थापित किया है।
  • भीमा देवी मंदिर संग्रहालय — पिंजौर।
  • पुरातत्व संग्रहालय — झज्जर, स्थापना 1959 स्वामी ओमानन्द सरस्वती द्वारा; हरियाणा की ऐतिहासिक सामग्री, मृदभांड, पांडुलिपियाँ आदि यहाँ रखी गई हैं।
  • गुलजारी लाल नंदा संग्रहालय — कुरुक्षेत्र, स्थापना 2005; भारत के पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा को समर्पित; हरियाणा का पहला व्यक्तिगत संग्रहालय है।
  • पानीपत संग्रहालय — स्थापना 2000 ई.; इसमें पानीपत की तीनों लड़ाइयों के अवशेष रखे गए हैं।
  • जयंती देवी पुरातात्विक संग्रहालय — जींद, स्थापना 28-7-2007; निर्माण तत्कालीन राज्यपाल स्व. A.R. किदवई द्वारा।
  • आध्यात्मिक संग्रहालय — पानीपत, स्थापना 1984।
  • धरोहर संग्रहालय — कुरुक्षेत्र; यहाँ हरियाणा की संस्कृति सम्बन्धी सभी चीजें रखी गई हैं; यहाँ से नाथ समुदाय के 5 ग्रन्थ मिले हैं।

हरियाणा के धार्मिक तीर्थ स्थल

  • प्राची तीर्थ (कुरुक्षेत्र) — एक किंवदंती अनुसार देवव्रत (भीष्म पितामह) की माता गंगा के पाप यहाँ स्नान करने से दूर हो गए थे।
  • पेहोवा — कुरुक्षेत्र में स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल, प्राचीन नाम ‘प्रथूदक’; पितरों के श्राद्ध हेतु प्रसिद्ध; राजा प्रथ ने अपने पिता वेणु का तर्पण यहीं किया था।
  • कपाल मोचन (सोमसरोवर) तीर्थ — बिलासपुर (यमुनानगर); मान्यता है यहाँ स्नान से सभी दोषों से मुक्ति मिलती है।
  • श्री कालेश्वर महादेव मठ — यमुनानगर में कलेसर के पास; विश्व के प्रसिद्ध 12 मठों में से एक प्राचीन मठ; ऐसा ही दूसरा मठ रामेश्वरम् (तमिलनाडु) में है।
  • सूर्यकुण्ड — बिलासपुर में; मान्यता है यहाँ स्नान से निःसंतान स्त्रियों को संतान प्राप्ति होती है; तोमर राजाओं द्वारा निर्मित कुंड है।
  • आपगा (आपया) तीर्थ — कुरुक्षेत्र में आपगा नदी के तट पर स्थित; यहाँ महेश्वर की पूजा होती है।
  • अस्थल बोहर — रोहतक में स्थित; यहाँ दर्शनी (कनफटे) साधु रहते हैं जो नाथ सम्प्रदाय से सम्बंधित हैं; ये गोरखनाथ को अपना प्रथम गुरु मानते हैं।
  • गौड़ीय मठ — कुरुक्षेत्र में स्थित; चैतन्य महाप्रभु से सम्बंधित मठ।
  • रामराय — जींद में स्थित; मान्यता है भगवान राम वनवास के समय सीता व लक्ष्मण के साथ यहाँ आए थे।
  • चन्द्रकूप — महाभारत युद्ध जीतने के पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा कुरुक्षेत्र में बनवाया गया प्रसिद्ध मन्दिर।
  • कुबेर तीर्थ — कुरुक्षेत्र में चैतन्य महाप्रभु से सम्बंधित तीर्थ; यहाँ यक्षपति कुबेर द्वारा यज्ञों का आयोजन किया गया था।
  • नरकातरी या अनरक तीर्थ — महाभारत में वर्णित यह तीर्थ सरस्वती नदी के किनारे स्थित है।
  • बाणगंगा — कुरुक्षेत्र में स्थित भीष्म कुण्ड, बाणगंगा तीर्थ है; यहीं अर्जुन ने धरती में बाण से गंगा नदी का उद्भव किया था।
  • पाण्डु-पिंडारा — जींद स्थित; मान्यता है यहाँ पांडवों को 12 वर्षों तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा करनी पड़ी थी; महाभारत युद्ध बाद पांडवों ने पूर्वजों का पिंडदान यहीं किया था।
  • नवग्रह कुण्ड — कैथल में भगवान श्रीकृष्ण ने महाराज युधिष्ठिर से नवग्रह कुण्डों का निर्माण कराकर नवग्रह यज्ञ कराया था; इन कुंडों के कारण ही कैथल को ‘छोटी काशी’ भी कहा जाता है।
  • पुष्कर तीर्थ — जींद स्थित; इस तीर्थ स्थल पर भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ने तपस्या की थी; पूर्णिमा के दिन सरोवर में स्नान से ब्रह्मा, विष्णु व महेश की आराधना होती है।
  • सन्निहित तीर्थ — कुरुक्षेत्र स्थित; रामायण काल में रावण द्वारा भगवान रुद्र की प्रतिष्ठा स्थापित की गई थी; यहाँ भगवान विष्णु का भी निवास स्थान माना जाता है।
  • तोशाम के पंचतीर्थ — भिवानी स्थित तोशाम की पहाड़ी पर आठ पानी के कुंड बने हैं, जिन्हें पाण्डव (पांडू) तीर्थ के नाम से जाना जाता है।
  • ढोसी तीर्थ — नारनौल में स्थित; महर्षि च्यवन की तपोभूमि है।
  • पंचवटी — पलवल में पांडवों के समय निर्मित प्राचीन मंदिर; अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहाँ विश्राम किया था।
  • मारकण्डेय तीर्थ — कुरुक्षेत्र में सरस्वती नदी के तट पर स्थित; यहाँ ऋषि मारकण्डेय का आश्रम है।
  • पुण्डरीक सरोवर — कुरुक्षेत्र स्थित; मान्यता है सतयुग से लेकर आज तक इस सरोवर का जल समाप्त नहीं हुआ।
  • कालेश्वर तीर्थ — कुरुक्षेत्र के पेहोवा स्थल की मान्यता है कि सूर्यग्रहण के समय इस तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य पाप मुक्त हो जाता है।
  • वाल्मीकि आश्रम — कुरुक्षेत्र स्थित; यहाँ महर्षि वाल्मीकि का मंदिर है, यहाँ बाबा लक्ष्मण गिरी महाराज ने जीवित समाधि ली थी; इस तीर्थ को तीनों लोकों में सबसे अधिक दुर्लभ माना गया है।
  • दुण्डू तीर्थ — जींद का वह स्थान जहाँ दुर्योधन का वध हुआ था; ‘दुण्डू तीर्थ’ के नाम से प्रसिद्ध है।

हरियाणा के आभूषण और वेशभूषा

आभूषण

  • कंठी — सोने के मनकों की बनी कंठमाला जिसे महिलाएँ पहनती हैं; पेंडेंट में जो लटकन होती है उसे पीपल के पत्ते जैसा बनाया जाता है तथा ठप्पा लगाकर उभरी हुई आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
  • कठला — गले का एक आभूषण। टोपी मुरेठा — पुरुषों द्वारा पहनी जाने वाली टोपी का प्रकार।
  • टीका — दो इंच परिधि का सोने की परत का बना फूल; महिलाएँ माँग भरने की जगह सिर पर लटकाती हैं।
  • मूरकी — कान का बालीनुमा आभूषण, जिसे पुरुष भी पहनते हैं। आरसी — महिलाएँ दाहिने हाथ के अंगूठे में पहनती हैं।
  • कर्णफूल — महिलाओं द्वारा कान के निचले हिस्से में पहना जाने वाला आभूषण। नकेसर — नथ की तरह छोटी बाली, अविवाहित लड़कियाँ अधिक पहनती हैं; ‘नाक की बाली’ भी कहते हैं।
  • गुलबंद — पट्टी पर छोटे व सुनहरी पुष्प-कली वाले दाने जुड़े आभूषण। गोफण — महिला के बालों की वेणी में गुंथा जाने वाला आभूषण।
  • चुटकी — सुहागिन स्त्री के पैर की उंगली में पहनी चांदी की छल्ली, ‘बिछुए’ भी कहते हैं। छाज — चांदी से निर्मित, पूरे माथे पर लटकाया जाता है।
  • पतरी — गले का ताबीज, आकृति पान या शहतूत के पत्ते जैसी। फूल — सिर के ऊपर बांधा जाता है। बोरला — माथे के बीच में लटकता हुआ पहना जाता है।
  • रखड़ी — सुहाग का प्रतीक, बोर के समान गोलाकार आकृति, नगों की जड़ाई; सिर पर माथे के ऊपर बाँधी जाती है।
  • चौथ — पुरुषों द्वारा कमर पर पहना जाता है। बुजली — कानों में पहनी जाती है। सिंगार पट्टी — मस्तक का आभूषण, ‘कोड़ी’, ‘जुड़ा’ व ‘बंदनी’ भी कहते हैं।
  • हथफूल — लड़ियों के साथ अंगूठियाँ जड़ा गहना, त्योहारों-विवाह पर महिलाएँ धारण करती हैं। हँसला/हंसुली — महिलाओं द्वारा गले में पहना आभूषण।
  • मौड़/मौड़ — विवाह अवसर पर दूल्हे-दुल्हन के कान व सिर पर बाँधने का मुकुट। मैमद — महिलाओं के माथे पर पहनने का आभूषण, जिस पर लोकगीत भी गाए जाते हैं।
  • तांगा — माथे का आभूषण, सोने या चाँदी का बनता है। ताँती — देवी-देवता के नाम पर कलाई या गले में चाँदी का तार/धागा बाँधा जाता है।
  • मांदलिया — ताबीज़ या ढोलक के आकार का छोटा आभूषण, काले डोरे में पहना जाता है। कांगनी — कलाई का आभूषण; हल्के कंगन को ‘कांगनी’ कहते हैं।
  • बेसर — नाक का आभूषण, सोने के तार का बना। पुरली — नाक का आभूषण। भँवरा — बड़े आकार की नाक की बाली, बिश्नोई समाज महिलाएँ अधिक पहनती हैं।
  • दस्तबंद — हाथ में पहना जाने वाला आभूषण। झालरा — गले में पहनने का लंबा हार। शीश फूल — गोलाकार टुकड़ों से बना सिर का गहना।
  • पीपल पत्र — कान में सोने/चाँदी का गोलाकार छेद कर पहना जाने वाला आभूषण। मोरूवर — कान में पहना जाने वाला आभूषण। बाली, बटन — कान का आभूषण, सोने या चाँदी का।
  • गजरा — हाथ की कलाई में पहना जाता है। गजरिया — पाँव में पहना जाने वाला चाँदी का आभूषण। पाटला — हाथ की कलाई पर पहना जाता है।
  • गोखरू — कलाई में चूड़ियों के बीच पहना जाता है। तागड़ी — सोने-चाँदी से बना कमर का आभूषण। कोका — महिलाओं द्वारा नाक में बाईं ओर पहना जाता है।

पुरुषों की पारंपरिक वेशभूषा

  • धोती — पुरुषों (मुख्यतः बुजुर्गों) द्वारा पजामे की जगह पहनी जाती है। कुर्ता — गोल बाँहों का पुराने रिवाज का कुर्ता।
  • खंडवा — पगड़ी। कमीज — कालरदार कमीज। पाग — राजपूती ढंग की बड़ी पगड़ी। पागड़ी — मारवाड़ी ढंग की पगड़ी। साफा — पगड़ी (सैनिक फैशन)।
  • हरियाणा में पुरुषों द्वारा पहनी जाने वाली टोपी को ‘मुरेठा’ कहते हैं।
  • कमरी — आधी अस्तीन की कमरी, जो बुजुर्ग आधी कमर तक पहनते हैं। अंगरखा — पुराने दरबारी ढंग का कुर्ता, इसके अंदर एक जेब बनाई जाती है।
  • खेस — मोटे सूत की चादर, जो शीतकाल में ओढ़ी जाती है। रूई की कमरी — रूई डालकर सिलाई गई कमरी, जाड़े में पहनते हैं, इसे ‘मिरजई’ भी कहते हैं।

महिलाओं की वेशभूषा

  • दामण — काले या लाल सूती कपड़े का घाघरा। कैरी — नीले खद्दर पर लाल टीकों वाले कपड़े का घाघरा।
  • चांदतारा — खद्दर पर दूज के चांद-तारे की छपाई वाले कपड़े से बना घाघरा। लैह — नीले कपड़े पर पीले पाट की कढ़ाई वाला घाघरा।
  • समीज — कमीज के नीचे पहना जाने वाला वस्त्र। सोफली — गहरे लाल रंग की किनारे पर छपी ओढ़नी। चूंदणी — लाल पल्लों व बीच में नीली रंगाई वाली पतली ओढ़नी।
  • लहरिया — बँधाई/बंदोज पद्धति की रंगाई से तैयार ओढ़ना। चन्द्र — कपड़े का लंबा-रंगीन टुकड़ा, चमकदार लेस से सजाया सिर ओढ़ने का ओढ़ना।
  • ओढ़णा — गोट-गोटा लगी ओढ़नी। छ्यामा — पीले पाट का कढ़ा ओढ़ना। खारा — चार नीले व चार लाल धागों की बुनाई वाले खद्दर से बना बिना कली का घाघरा।
  • डिमास/डिमाच — रेशमी ओढ़ना, विवाह में चढ़ाया जाता है। पीलिया — लाल किनारियों के बीच पीले पतले कपड़े का बंधी रंगाई वाला ओढ़ना, बच्चा होने पर पीहर से देते हैं।
  • कमरी — वास्केटनुमा पूरी या आधी आस्तीन की कमरी, पहले विवाहित महिलाएँ ही पहनती थीं। फुलकारी — कंधे पर पीले पाट या ऊन की डिब्बीनुमा फुलकारी का ओढ़ना।
  • सलवार — औरतों द्वारा पहनी जाती है। फरगल — सर्दियों में बच्चों को पहनाया जाने वाला टोपा, जिसकी रंग-बिरंगी झालर कमर तक पीछे लटकती है।
  • दोहर — हाथ के कते बारीक दोहरे सूत की मजबूत बड़ी चादर, सर्दियों में ओढ़ी जाती है। झुगला — छोटे बच्चों का पहनावा।
  • सौड़ — खद्दर की रजाई। सौडिया — खद्दर का गद्देला।

हरियाणा के लोकप्रिय वाद्ययंत्र

हरियाणा के प्रमुख लोक वाद्ययंत्र हैं — एकतारा, सारंगी, बीन, बांसुरी, शहनाई, मंजीरा, नगाड़ा, ढोल, ढोलकी, डमरू, डेरु, डफली, ताशा, खड़ताल आदि।

  • सारंगी — सागवान, केर तथा रोहिड़ा की लकड़ी से बनाई जाती है; पानीपत के उस्ताद मामन खां को हरियाणा के सर्वश्रेष्ठ सारंगी वादक का सम्मान प्राप्त था।
  • इकतारा — बांस के टुकड़े को तूंबे के साथ जोड़कर बनाया जाता है, जिस पर एक तार खींचा जाता है; दो तारे लगे हों तो ‘दो तारा’ कहते हैं; एक हाथ में पकड़कर उसी हाथ की उंगली से तार पर प्रहार कर बजाया जाता है।
  • तुम्बा — कटे हुए तुंबे से निर्मित; इसके एक सिरे पर चमड़ा मढ़ा जाता है, चमड़े में छेद कर पशु की आंत का तार डालकर दूसरे सिरे पर लकड़ी का टुकड़ा बांधा जाता है; इसका प्रयोग सपेरे बीन के साथ करते हैं।
  • बांसुरी — दोनों ओर से खुले इस यंत्र में 7 छेद होते हैं, जो सात स्वरों का काम करते हैं।
  • बीन — बांसुरी की भांति वायु फूंक कर बजाया जाता है; तुंबे से निर्मित; ऊपरी भाग लंबा व नीचे का भाग गोल होता है; इसमें दो नालियाँ लगी होती हैं — एक से स्वर भरता है, दूसरी से निकाला जाता है।
  • अलगोजा — बांसुरी के आकार-प्रकार का, लकड़ी या बांस से निर्मित।
  • शहनाई — शुभ अवसरों व विवाह पर गीतों के साथ धुन निकालने के लिए प्रयोग; मुंह में दबाकर हवा फूंककर बजाया जाता है।
  • ताशा — तांबे व लोहे के गोलाकार कुंडों पर बकरे की पतली खाल चढ़ाकर बनाया जाता है; शादी-विवाह के अवसर पर प्रयोग; कहा जाता है यह मुगलकालीन लोक वाद्ययंत्र है।
  • हारमोनियम — एक हाथ से दबाकर हवा भरी जाती है और दूसरे हाथ की उंगलियों से बजाया जाता है।
  • डेरु — डमरू के आकार का, आम की लकड़ी से निर्मित; दोनों ओर बारीक चमड़ा चढ़ाकर बनाया जाता है; लोग रात्रि-जोगा और गोगा पीर पर्व पर इसका प्रयोग करते हैं।
  • नगाड़ा — बकरे अथवा भैंस का चमड़ा चढ़ाकर बनाया जाता है; प्राचीन काल में किसी घोषणा के पूर्व नगाड़ा बजाया जाता था।
  • डफ — वृत्ताकार ड्रम के एक ओर चढ़ी खाल वाला यह वाद्य दूसरी ओर से खुला होता है; 1969 गणतंत्र दिवस पर मुख्य रूप से प्रयोग किया गया था।
  • ढोलक — पंजाबी लोक नृत्य भांगड़ा में इसका प्रयोग होता है।
  • डफली — यह लोक वाद्ययंत्र डफ का छोटा रूप है, इसमें चमड़े और घुंघरू भी प्रयोग होते हैं।
  • खंजरी — यह जोगियों का वाद्ययंत्र है।
  • डमरू — भगवान शिव ने तांडव नृत्य के समय डमरू बजाया था; गूगा नृत्य में भी इसका प्रयोग होता है।

हरियाणा के लोक नृत्य

  • सांग नृत्य — हरियाणा का राजकीय नृत्य है; ‘सांग’ या ‘स्वांग’ का अर्थ है प्रच्छन्न या ‘प्रतिरूपित करना’; माना जाता है कि यह नृत्य किशन लाल भट्ट द्वारा विकसित किया गया।
  • फाग नृत्य — फाल्गुन माह में किया जाता है; महिला-पुरुष दोनों करते हैं; महिलाएँ रंगीन पारंपरिक कपड़े और पुरुष रंगीन पगड़ी पहनते हैं।
  • छठी नृत्य — नवजात शिशु के जन्म की खुशी में मनाया जाता है; महिलाएँ शिशु जन्म के छठे दिन करती हैं; उबला हुआ गेहूँ व चना (बाकली) सभी सदस्यों को वितरित किया जाता है।
  • खोड़िया नृत्य — विशेष रूप से महिलाओं द्वारा लड़के की बारात रवाना होने के बाद लड़के के घर किया जाता है; इसमें महिलाएँ पुरुष के कपड़े पहनकर नृत्य करती हैं।
  • धमाल नृत्य — गुड़गाँव और महेंद्रगढ़ क्षेत्र का प्रसिद्ध; महाभारतकालीन नृत्य; केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है।
  • झूमर नृत्य — ‘झूमर’ नामक आभूषण के नाम पर किया जाने वाला नृत्य; ढोलक और थाली की धुन पर विवाहित युवा लड़कियों द्वारा किया जाता है; कलाकार रंग-बिरंगे परिधानों व गहनों से सजते हैं; राज्य के कुछ हिस्सों में इसे ‘हरियाणवी गिद्दा’ भी कहा जाता है।
  • लूर नृत्य — विशेष रूप से होली के त्योहार पर किया जाता है; गीत प्रायः सवाल-जवाब प्रारूप में होते हैं; रबी की फसल बुआई के दौरान भी किया जाता है, वसंत ऋतु के रूप में भी जाना जाता है; इसका नाम बांगर क्षेत्र की लड़कियों के नाम पर रखा गया है।
  • गुग्गा नृत्य — करनाल जिले का प्रसिद्ध, पुरुष-प्रधान नृत्य; गोगा नवमी पर विशेष रूप से पुरुषों द्वारा किया जाता है; संत गुग्गा की स्मृति में निकाले जुलूस में गीत गाकर गुग्गा पीर के सम्मान में उनकी कब्र के चारों ओर नृत्य करते हैं।
  • रास लीला नृत्य — ‘रास’ का अर्थ नृत्य है; यह पारंपरिक लोक नृत्य फरीदाबाद-पलवल में किया जाता था; विभिन्न गीतों से भगवान कृष्ण की प्रशंसा की जाती है।
  • मंजीरा नृत्य — नगाड़ों, डफ और मंजीरा की ध्वनि पर किया जाता है; महिला-पुरुष दोनों करते हैं।
  • रास नृत्य — भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला से जुड़ा; इसके 2 प्रकार माने जाते हैं — तांडव नृत्य (पुरुष-प्रधान) और लास्यनृत्य (स्त्री-प्रधान, मुख्यतः होडल-पलवल क्षेत्र में)।
  • खेड़ा नृत्य — खुशी की जगह गम में किया जाता है; परिवार में बुजुर्ग की मृत्यु पर किया जाता है।
  • घूमर — राजस्थान का राजकीय नृत्य, हरियाणा में राजस्थान से लगते क्षेत्र में भी प्रचलित; नर्तकियों की वृत्ताकार चालें इस नृत्य की पहचान हैं; सीमावर्ती क्षेत्र की लड़कियाँ आमतौर पर घूमर करती हैं — गोलाकार मोड़ लेते, ताली बजाते व गाते हुए; संगीत की गति बढ़ने पर लड़कियाँ जोड़े बनाकर तेजी से घूमती हैं; होली, गणगौर पूजा व तीज जैसे त्योहारों पर किया जाता है।
  • गणगौर — हिसार, भिवानी तथा सिरसा क्षेत्र में गणगौर उत्सव के अवसर पर किया जाता है।
  • डफ नृत्य — वसंत ऋतु के आगमन पर किया जाता है; श्रृंगार व वीर रस प्रमुख; मुख्यतः किसानों द्वारा भरपूर फसल की याद में किया जाने वाला मौसमी नृत्य; महिलाओं के आभूषणों की ध्वनि के साथ डफ के एकतरफा ढोल संगीत की पेशकश।
  • छड़ी नृत्य — भाद्रपद (भादो) माह की नवमी को गोगा पीर की पूजा के अवसर पर किया जाता है।
  • रतवाई नृत्य — मेवात में वर्षा ऋतु में किया जाता है।
  • गणगौर नृत्य — स्त्री-पुरुष मिलकर शिव-पार्वती को प्रसन्न करने के लिए करते हैं।
  • बीन-बांसुरी नृत्य — बागड़ क्षेत्र में किया जाता है।

हरियाणा के त्यौहार

  • लोहड़ी — सर्दियों के अंतिम दिन का प्रतीक; हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है, मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले।
  • गंगोर/गणगौर — स्त्री-पुरुष मिलकर शिव-पार्वती को प्रसन्न करने के लिए करते हैं; हर साल चैत्र चौदस तीज को मनाया जाता है; गंगा की मूर्ति लेकर लोग जुलूस निकालते हैं, एक गाँव से दूसरे गाँव जाते हैं, अंत में मूर्ति को नदी में विसर्जित करते हैं; युवा लड़कियों के लिए विशेष माना जाता है, विवाहित महिलाएँ भी पति-परिवार की सलामती की दुआ करती हैं।
  • बैसाखी — हरियाणा राज्य में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक; पंजाब नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक; अप्रैल माह में हर साल मनाया जाता है।
  • तीज — श्रावण मास की तृतीया को मनाया जाता है; तीज एक लाल रंग का प्यारा सा कीट है जो बरसात के दिनों में बाहर निकलता है; यह त्योहार मानसून के आगमन पर मनाया जाता है।
  • मैंगो फेस्टिवल — हरियाणा राज्य में जून या जुलाई महीने में मनाया जाता है; राज्यों में आम की कई अलग-अलग किस्मों के साथ देश के सभी आम उत्पादकों के बीच एक प्रतियोगिता की जाती है; यहाँ मेला 1992 में शुरू हुआ था।
  • भड़लिया नवमी — वर्षा ऋतु के स्वागत में किया जाता है। बासौड़ा — इसे सिली सातम भी कहते हैं।
  • पिंजौर हेरिटेज फेस्टिवल — हरियाणा पर्यटन विभाग हर साल दिसंबर के महीने में पंचकुला के पिंजौर स्थित यादवेंद्र गार्डन में मनाता है; शुरुआत 2006 में हुई थी।
  • सरस्वती महोत्सव — आयोजन जनवरी महीने में कुरुक्षेत्र में होता है; शुरुआत 2018 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई।
  • गीता महोत्सव — आयोजन नवंबर-दिसंबर में कुरुक्षेत्र में होता है; राज्य स्तर पर शुरुआत 1989 में हुई थी और 2016 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत हुई।

हरियाणा में सांग

स्वांग थियेटर की उत्पत्ति किशन लाला भट्ट से हुई है, जिन्होंने हरियाणा में लोक रंगमंच की समकालीन शैली की नींव रखी थी; किशनलाल भट्ट को ‘सांग का पितामह’ कहा जाता है। सांग लकड़ी के तख्त पर किया जाता है। सांग का आरम्भ लगभग 1750 ई. में मेरठ के किसान लाल भट्ट द्वारा हुआ। सांग शब्द ‘स्वांग’ का तद्भव रूप है, जिसका शाब्दिक अर्थ है — रूप धारण करना अथवा नकल करना; इसे नौटंकी का पर्याय भी माना जाता है।

प्रारम्भिक काल (1750-1850 ई.)

इस युग में सर्वप्रथम नूह जिले में जन्मे सादुल्ला को मेवाती जनकवि होने का गौरव प्राप्त है। सादुल्ला ने 1787 ई. में मेवाती भाषा में महाभारत की रचना की, जिसका टाइटल ‘पण्डून का कड़ा’ है। बंसीलाल भी इस युग के प्रमुख सांगी हुए — इन्होंने ‘राजा गोपीचंद’, ‘गुरु गुग्गा’ तथा ‘राजा नल’ जैसे सांगों की रचना की। गुजराती ब्राह्मण पंडित अंबाराम भी इस युग के प्रमुख सांगी हुए हैं।

उत्कर्ष काल (1850-1950 ई.)

इस युग को हरियाणवी में सांग-साहित्य का ‘स्वर्ण युग’ भी कहा जाता है। इस युग में प्रसिद्ध सांगी पंडित लख्मीचंद, अलीबख्शा, अहमदबख्शा थानेसरी, बालकराम, दीपचंद, बाजे भगत, बाबा हीरादास उदासी आदि का नाम लिया जा सकता है।

  • पंडित लख्मी चंद — जन्म 1903, जाटी कलां (सोनीपत) में; हरियाणवी रागनी व सांग में उल्लेखनीय योगदान के कारण इन्हें “सूर्यकवि” और सूफी संगीत की मीरा कहा जाता है; केवल 42 वर्ष की आयु में देहांत हुआ (1945); प्रमुख सांग — मीराबाई, सत्यवान सावित्री, नल-दमयंती, सेठ तारा चंद, पूरन भगत और शशी लकड़हारा; दादा लख्मी चंद ने अपना गुरु मानसिंह को बनाया था।
  • बाजे भगत (1898-1939) — भारतीय, कवि, रागनी लेखक, साहित्यकार, संगीत कलाकार व हरियाणवी सांस्कृतिक कलाकार थे; पंडित लख्मीचंद और बाजे भगत दोनों ही कवि एक दूसरे का साथ देते थे, दोनों अच्छी व सुंदर रागनी गाते थे।
  • दीपचंद बहमन — जन्म सेरी खांडा (सोनीपत); इन्हें हरियाणा का कालिदास और शेक्सपियर कहा जाता है; गुरु का नाम छज्जू राम था; हरियाणा में सांग परंपरा को आगे बढ़ाने का काम दीपचंद बहमन ने किया।
  • सांगी अली बख्शा का जन्म थानेसर में हुआ; अली बख्शा ने हरियाणवी रामायण की रचना की; हरियाणा का राजकीय सांगी धर्मवीर भगाना को कहा जाता है।
  • दयाचंद मायना — जन्म मायना गाँव (रोहतक); इन्हें ‘हरियाणा का जॉन मिल्टन’ कहते हैं।

आधुनिक युग (1950 से अब तक)

हरियाणवी सांग-परंपरा के चौथे चरण को आधुनिक युग के नाम से जाना जाता है। इस युग के सांगियों में पंडित मांगेराम, धनपत सिंह, रामकिशन ब्यास, फौजी मेहर सिंह आदि का नाम उल्लेखनीय है।

  • कवि शिरोमणि पंडित मांगेराम के गुरु पंडित लख्मीचंद थे; जन्म सिसाना (सोनीपत) में; इन्होंने लगभग 40 सांगों की रचना की — छैल बाला, पिंगला भरथरी, अमर सिंह राठौर, कृष्ण-सुदामा आदि प्रमुख हैं।
  • धनपत सिंह — पंडित मांगेराम के समकालीन; लीलो चमन, हीर-रांझा, गोपीचंद इनके प्रमुख सांग हैं; जन्म निदाना (रोहतक) में।
  • रामकिशन ब्यास — प्रसिद्ध सांगी योगेश्वर बालक राम के शिष्य; प्रमुख सांग — सत्यवान सावित्री, चंद्रावली, शशिकला आदि।
  • फौजी मेहर सिंह — पंडित लख्मीचंद के शिष्य; सत्यवान सावित्री, चंद्रावती आदि इनके प्रमुख सांग; नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में भी कार्य किया था।

हरियाणा में संचार और फिल्म जगत

हरियाणा में तीन आकाशवाणी केंद्र और एक दूरदर्शन केंद्र हैं — आकाशवाणी रोहतक की स्थापना 8 मई 1976; आकाशवाणी कुरुक्षेत्र की स्थापना 24 जून 1991; आकाशवाणी हिसार की स्थापना 26 जनवरी 1999। दूरदर्शन केंद्र हिसार की स्थापना 1 नवंबर 2002, श्रीमती सुषमा स्वराज द्वारा (नोट- अब 15 जनवरी 2024 चंडीगढ़ में स्थानांतरित)। फिल्म व टेलीविजन संस्थान रोहतक में है, और जन संचार व मीडिया तकनीकी संस्थान कुरुक्षेत्र में है।

फिल्म जगत

  • फिल्म सिटी — रोहतक। हरियाणा फिल्म प्रोत्साहन बोर्ड — चंडीगढ़। हरियाणा में थियेटर का जनक अली बक्श है। फिल्म नगरी के रूप में पंचकुला को विकसित किया जा रहा है।
  • हरियाणा की पहली फिल्म — धरती (1968)। दूसरी फिल्म व सिनेमा हॉल में लगने वाली पहली फिल्म — हरफूल सिंह जाट जुलानी (1970, निर्माता देवी शंकर प्रभाकर, निर्देशक आनंद कुमार)। बीर शेरा फिल्म (1973-74)।
  • पहली सफल फिल्म — बहुरानी (1982)। पहली सफलतम फिल्म — चंद्रावल (1984) — निर्माता देवी शंकर प्रभाकर, निर्देशक जयंत प्रभाकर; इसमें 2 हास्य कलाकार दरिया सिंह मालिक व नसीब सिंह कुंडू थे।
  • दरिया सिंह मालिक (उग्राखेड़ी, पानीपत निवासी, जन्म 12 जुलाई 1938) ने इस फिल्म में खूंडा का रोल किया; मृत्यु 21 अप्रैल 2022; 19 हरियाणवी फिल्मों में काम किया; 2006 में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति अवार्ड से नवाजा; ओमप्रकाश चौटाला ने गौरव अवार्ड से सम्मानित किया।
  • नसीब सिंह कुंडू (टिटोली, रोहतक) ने रुण्डा का रोल निभाया। फिल्म की अभिनेत्री उषा शर्मा थीं, जिन्होंने देवी शंकर से शादी की थी। इसमें जगत जाखड़ ने अभिनेता का रोल किया — हरियाणवी फिल्मों का ‘रोबिन हुड’ जगत जाखड़ को कहा जाता है।
  • लाडो — 2000, पहली फिल्म जिसने राष्ट्रीय इंदिरा गांधी पुरस्कार जीता; आशुतोष राणा अभिनीत, अश्विनी चौधरी निर्देशित; सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक फिल्म का इंदिरा गांधी पुरस्कार जीता — पहली बार किसी हरियाणवी फिल्म ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता।
  • चंद्रावल 2nd — 2012। पगड़ी दा ओनर — 2014 रिलीज, 62वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में दो पुरस्कार; बलजिंदर कौर को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार; हरियाणवी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता।
  • सतरंगी — हिसार के यशपाल शर्मा को वर्ष 2017 में 63वां राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। NH10 में भूमिका अनुष्का शर्मा ने निभाई। नोट- अजय सोनी ‘बुवानी वाला’ और सोनू शर्मा ‘पंछी’ द्वारा ऑडियो ‘छोरा हरियाणा का’ पहला हरियाणवी पॉप एल्बम था।

हरियाणा के अभिनेता, अभिनेत्री, पत्रकार, फिल्म निर्माता व निर्देशक (जिलेवार)

  • अम्बाला — जूही चावला, परिणीती चोपड़ा, ओम पूरी, जोहरा बाई, पंकज बेरी। यमुनानगर — सुनील दत्त।
  • रोहतक — अशोक घई, सुभाष घई (निर्माता), रणदीप हुड्डा (जसिया गाँव), पूजा बत्रा, अश्वनी चौधरी, पारुल गुलाटी (अभिनय), जसविंदर नरूला (गायक)। झज्जर — जगत जाखड़।
  • हिसार — उषा शर्मा, यशपाल शर्मा और मलिका शेरावत का जन्म (मलिका शेरावत रहती रोहतक में हैं)। भिवानी — संदीप भारद्वाज (अभिनय)।
  • महेंद्रगढ़ — सुरेन्द्र शर्मा (हास्य कलाकार), सतीश कौशिक (हास्य कलाकार)। गुरुग्राम — राजकुमार राव (अभिनय), शेखर गुरेरा (कार्टूनिस्ट)।
  • कुरुक्षेत्र — रोहित सरदाना (पत्रकार, आजतक), जोगिन्दर (शाहबाद सिंगर)। सिरसा — गजेन्द्र वर्मा, सुनील ग्रोवर (कॉमेडियन), रुपिंदर हांडा (सिंगर), नील सेठी (जंगल बुक फिल्म)।
  • फरीदाबाद — सोनू निगम, ऋचा शर्मा (गायक), सूरदास। रेवाड़ी — मोनिका सोनी (हरियाणा की लता मंगेशकर)।
  • जींद — सीता राम पंचाल (अभिनय)। सोनीपत — मेघना मलिक। पंचकुला — श्याम सुंदर (कालका, रामायण में सुग्रीव की भूमिका)।

हरियाणा के विभागों के फुल फॉर्म

संक्षिप्त नामपूर्ण नाम
HPPCHaryana Power Purchase Centre
HSSCHaryana Staff Selection Commission
GOHGovernment of Haryana
CIRBCentral Institute for Research on Buffaloes
NCRNational Capital Region
NBANational Boxing Academy
NBRCNational Brain Research Centre
HVPNLHaryana Vidyut Parsaran Nigam Limited
DHBVNDakshin Haryana Bijli Vitran Nigam Limited
UHBVNLUttar Haryana Bijli Vitran Nigam Limited
NDDBNational Dairy Development Board
HBSEHaryana Board of School Education
CSSRICentral Soil Salinity Research Institute
HPSCHaryana Public Service Commission
HUDAHaryana Urban Development Authority
HUDCOHousing and Urban Development Corporation Limited
APEDAAgriculture and Processed Food Production Export Development Authority
APMCAgriculture Produce Market Committee
CCSHAUChaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University
GJUSTGuru Jambheshwar University of Science and Technology
HAFEDHaryana State Co-op Supply and Marketing Federation
HAREDAHaryana Renewal Energy Development Agency
HARISHaryana Registry Information System
NRCENational Research Centre of Equines
HERAHaryana Electricity Reform Act
HARSACHaryana Space Application Centre
HH GISHappening Haryana, Global Investors Summit
HERCHaryana Electricity Regulatory Commission
HIPAHaryana Institute of Public Administration
HALRISHaryana Land Record Information System
HPGCLHaryana Power Generation Corporation Limited
HRDFAHaryana Rural Development Fund Administration
HSDMHaryana Skill Development Mission
HFDCHaryana Forest Development Corporation
HSAMBHaryana State Agriculture Marketing Board
HSEBHaryana State Electric Board
HSCARDBHaryana State Corporative Agriculture & Rural Development Board
HSSCAHaryana State Seed Certification Agency
HSDCHaryana Seed Development Centre
HLRDCHaryana Land Reclamation & Development Corporation
HSIIDCHaryana State Industrial and Infrastructure Development Corporation
HSWCHaryana State Warehousing Corporation
IDBCIntegrated BeeKeeping Development Centre
IIHMIndia International Horticulture Market
ISWMSIntegrated Solid Waste Management System
MITCMinor Irrigation Tube-well Corporation of Haryana
IWRDIrrigation & Water Resource Development
NDRINational Dairy Research Institute
NABARDNational Bank for Agriculture and Rural Development
NHPCNational Hydroelectric Power Corporation
NLRMPNational Land Record Modernization Programme
NTPCNational Thermal Power Corporation
NLRDCNational Land Record Despatch Centre
NFSMNational Food Security Mission
NIEITCNational Institute of Electronic & Information Technology Centre
NIFTNational Institute of Fashion Technology

हरियाणा पुलिस विशेष

  • गठन — 1 नवंबर 1966 (मुख्यालय पंचकुला)। 1966 में पुलिस रेंज एक और जिले 6 थे।

वर्तमान में पाँच पुलिस रेंज

  1. अंबाला पुलिस रेंज — इसमें अंबाला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र शामिल हैं।
  2. करनाल पुलिस रेंज — इसमें करनाल, पानीपत और कैथल शामिल हैं।
  3. हिसार पुलिस रेंज — इसमें हिसार, हांसी, सिरसा, फतेहाबाद और जींद शामिल हैं।
  4. रोहतक पुलिस रेंज — इसमें रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी शामिल हैं।
  5. दक्षिण पुलिस रेंज (रेवाड़ी) — इसमें रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और मेवात शामिल हैं।
  • वर्तमान में पाँच पुलिस कमिश्नरी हैं — पंचकुला, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत और झज्जर।

पाँच पुलिस बटालियन

  1. अंबाला पुलिस बटालियन — 1966
  2. मधुबन पुलिस बटालियन — 1966
  3. हिसार पुलिस बटालियन — 1969
  4. मधुबन पुलिस बटालियन — 1973
  5. मधुबन पुलिस बटालियन — 1966
  • वर्तमान में 25 पुलिस जिले हैं, नवीनतम पुलिस जिला डबवाली (सिरसा) है।
  • हरियाणा में 2 ऐसे पुलिस जिले हैं जो कि जिले नहीं हैं — जैसे मानेसर और डबवाली।
  • हरियाणा राज्य अपराध शाखा मोगीनंद (पंचकुला) में है, जिसकी स्थापना 2006 में हुई थी।
  • हरियाणा CID ट्रेनिंग स्कूल पंचकुला में है। हरियाणा कमांडो ट्रेनिंग स्कूल पंचकुला में है।
  • हरियाणा में रेलवे पुलिस की स्थापना 1 नवंबर 1966 को हुई, जिसका मुख्यालय अंबाला कैंट में है — इसके तीन सब डिवीजन हैं हिसार, अंबाला, फरीदाबाद में; कुल GRP थाने 16 व कुल GRP चौकी 24 हैं।
  • हरियाणा राज्य स्तरीय पुलिस दूरसंचार प्रशिक्षण केंद्र मोगीनंद पंचकुला में है।

हरियाणा पुलिस अकादमी

सर्वप्रथम हरियाणा पुलिस प्रशिक्षण केंद्र 1966 में नीलोखेड़ी में स्थापित हुआ था, जिसे वर्ष 1970 में मधुबन में स्थानांतरित किया गया; उसके बाद 1973 में मधुबन से स्थाई प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना यहीं वर्ष 1970 में हुई थी — यहाँ IPS अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया गया था।

  • Forensic Science Lab — स्थापना वर्ष 1973 में रोहतक में हुई, परंतु 1976 में मधुबन में स्थानांतरित किया गया।
  • Finger Print Bureau — सर्वप्रथम स्थापना 1972 में हुई, परंतु 1974 में रोहतक में स्वतंत्र रूप से कार्य शुरू किया, 1976 में इसे मधुबन में स्थानांतरित किया गया। हरियाणा पुलिस कमांडर विंग की स्थापना 1979 में चंडीगढ़ में हुई।

हरियाणा पुलिस वायरलेस एंटीना

  1. तोशाम — इसके अंतर्गत भिवानी (भिवानी), चरखी दादरी, फतेहाबाद, हिसार और सिरसा आदि क्षेत्र आते हैं।
  2. रेवाड़ी में — टकरी हिल स्टेशन।
  3. हिमाचल प्रदेश में — सहारनपुर हिल स्टेशन।

हरियाणा के उपन्यासकार और रचनाकार

  • राजाराम शास्त्री — ‘झाडूफिरी’ हरियाणा का पहला उपन्यास है।
  • मोहन सिंह — टुटा हुआ आदमी, नीम के पेड़, सुबह से पहले, बाहें, ये लोग नए, एक धागा और मैं।
  • हेमराज — लाल बहादुर, सीप के मोती, टूटते बंधन, मुझे भूल जाना, तराशे हुए पत्थर, प्रतीक्षा, बसंत फिर आएगा, जाल और मुक्ति।
  • डॉ. शशी भूषण — अपने पराय और जानी अनजानी राहें। राजकुमार निजात — साये अपने अपने।
  • रमेश चन्द्र जैन — मेहंदी रचे हाथों में। कृष्णा मदहोस — अंधा सफ़र। अभिमन्यु अनंत — लाल पसीना। अमृतलाल मदान — लाल धूप।
  • विष्णु शर्मा — असली पंचतंत्र (विष्णु शर्मा भारत के प्रथम व्यक्ति हैं जिन्हें भारतीय साहित्य अकादमी से सम्मानित किया गया था)।
  • मधुकांत — गाँव की ओर। कृष्ण बाछल — शहीद की अमानत। उर्मि कृष्ण — वन और पगडंडिया। जयनारायण कौशिक — माटी का मोल, बूढ़ी सुहागिन।
  • भागीरथ लाल जखमी — दस्तना मजदूर (उर्दू साहित्य की रचना)। ख्वाजा अहमद अब्बास — अब्बा बील (उर्दू साहित्य की रचना)।
  • मिश्र गोवर्धन श्रस्वत — कृष्ण लीला। मूलक राज आनंद — Untouchable। ख्वाजा अहमद अब्बास — जाफरान के फूल, माँ का दिल, खजाना, टिड्डी, भोली।

हिंदी के साहित्यकार

साहित्यकाररचनाएँ
रामप्रतापस्वदेश दर्शन
निश्चलदासविचार सागर, वृत्ति प्रभाकर, युक्ति प्रकाश
ठाकुर फेरुवस्तुसार तथा रत्न परीक्षा
रामचन्द्रकुरुक्षेत्र महात्म्यम्
श्रीधरचंद्रमा, शांतिनाथ, पार्श्वनाथ, वृद्धमान महावीर
हरद्वारी लालसारस्वत
शंभू दयालरुक्मणी मंगल
भगवतीसीतासेतु
बालमुकुंदअश्रुमती, हिन्दी भाषा, अधखिला फूल, तारा, तुलसी सुधाकर, हिन्दी भाषा की भूमिका
ईशदासअंगद पैर, भरत मिलाप व सत्यवती कथा
संतोष सिंहरामकोश, श्री गुरुनानक प्रकाश, गर्व गजनी, वाल्मीकि रामायण, आत्म पुराण, गुरु प्रताप सूरज

संस्कृत के कवि

कविरचनाएँ
स्वामी हरिदासदादुरामोदय
पंडित माधवाचार्य शास्त्रीकबीर चरित्रम्
महर्षि वेदव्यासमहाभारत, गीता, पुराण
पंडित जयराम शास्त्रीजवाहर वसंत साम्राज्य
पंडित छज्जूराम शास्त्रीसंस्कृत साहित्य, कुरुक्षेत्राष्टकम, दुर्भाभ्युदयानानाकटम्, सुल्तान चरित्रम्
सीताराम शास्त्रीसाहित्यमोपदेश्य
महाकवि मयूरमयूराष्टक व सूर्यशतक

कुछ अन्य जैन और सूफी कवि

  • अलीबख्शा — इन्होंने तमाशा, राजा नल व कृष्ण लीला आदि सांगों के साथ दोहे व छंद और भजनों की रचनाएँ की हैं।
  • बंसीलाल — गुरु गुरमा, राजा गोपीचंद, राजा नल आदि की रचना के रचनाकार हैं।
  • राजाराम शास्त्री — हरियाणवी के सबसे पहले पद व छंद लिखने की शुरुआत राजा राम शास्त्री ने की थी।
  • योगेश्वर बालकराम — पूर्णभक्त, रामायण, कुंजड़ी, शालादे आदि हरियाणवी रचनाओं के रचनाकार माने जाते हैं।
  • गुलाम कादरी — सूफी विचारधारा वाले महान साहित्यकार थे, इनके द्वारा लिखी गई प्रेम लहर, प्रेम वाणी, प्रेम प्याला और इंतखाब आदि हैं; इनकी हरियाणवी चौपाई काफी प्रचलित है।
  • अहमद बख्शा — इनकी प्रसिद्ध हरियाणवी रचनाएँ जयमल-फत्ता, रामायण, गूंगा चौहान और पद्मिनी चंद किरण आदि हैं।
  • गुलाम हुसैन शाह — राम माल और दाहिने हाथ का शंख जैसी हरियाणवी रचना के रचनाकार हैं।
  • कवि शंकर लाल शुक्ल — इनके द्वारा लिखे गए सांग भक्तमाल और भक्त प्रह्लाद हैं।
  • संत शाह गुलाम — सूफी संत शाह गुलाम की रोहतकी चौपाईयाँ अपने तत्कालीन समय में काफी प्रचलित हुई थीं।
  • शाह मुहम्मद रमजान शहीद — ‘हादी-ए-हरियाणा’ के नाम से प्रसिद्ध हैं, जिनकी रचना ‘अकायदे-आजम’ है; इसे हरियाणा गद्य की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक माना जाता है; शाह रमजान को ‘हिन्दी-ए-हरियाणा’ के नाम से भी जाना जाता है।

हरियाणा में चित्रकला

गुड़गांव के मीरपुर में महाराजा तेज सिंह के महल की दीवारों को राजपूत शैली में किए गए चित्रों से सजाया गया है — दीवारों पर बने पैटर्न रामायण के दृश्यों को दर्शाते हैं। गुड़गांव में ‘मातृ मद की पियाओ’ में पौराणिक पेंटिंग हैं, लेकिन ये धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं। ‘अस्थल बोहर’ पेंटिंग भी राजपूत शैली में हैं, इनका प्रभाव पंचकुला व पिंजौर में शिव मंदिरों, कौल में वेणुमधव मंदिर, कैथल व पबनमा के मंदिरों, किलायत में कपिल मंदिर व सरसैंठ मंदिर में भी देखा जा सकता है, सिरसा में भी।

यमुनानगर में रंग महल भी दीवार चित्रों से सजाया गया है, जो सीधे मुगल चित्रकारों के हाथों से एक मौलिकता है। यमुनानगर के जगाधरी में लाला बालक राम और लाला जभुना दास की समाधि हिंदू पौराणिक कथाओं से अपनी दीवार चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं, दोनों के प्रवेश द्वार भारी चित्रित ‘द्वारपालों’ से घिरे हैं। समाधि के पास स्थित राजीवाला मंदिर भी अपने चित्रों में धार्मिक विषयों को समेटे हुए है — इसकी दीवारें, कक्ष व बरामदा जैन शैली के अधीन हैं, जबकि किला मुबारक, दो मंजिला मुगल संरचना, पक्षियों और फूलों की छवियों से अलंकृत है।

कुरुक्षेत्र के भद्र काली मंदिर में धार्मिक विषय व भित्ति चित्र पूरे ढांचे में चल रहे हैं, दूसरी मंजिल भित्ति चित्रों से आच्छादित है, जैसा कि रानी चंद कौर की हवेली (घर) और पिहोवा में श्री राम राधा का मंदिर और बाबा श्रवण नाथ का मंदिर है। पूरे हरियाणा में मंदिरों और पवित्र हिंदू स्थानों में समान चित्र हैं।

मुगल पेंटिंग भी हिंदू मंदिरों में, विशेष रूप से कैथल, कलायत और रोहतक में दिखाई दीं। यहाँ भी विषयवस्तु पौराणिक कथाओं से बहुत अधिक प्रेरित है और इसमें नैतिक व आध्यात्मिक संदेश हैं। रोहतक में पेंटिंग्स मिलीं हैं, जो अब कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पाण्डुलिपि विभाग के कब्जे में हैं। नीले, गुलाबी, हरे, नारंगी और लाल रंग का उदार उपयोग इन चित्रों की सुंदरता को बढ़ाता है, जो मूल रूप से भगवान विष्णु और उनके अवतारों को दर्शाते हैं।

हरियाणा साहित्य अकादमी

हरियाणा कला परिषद

सांस्कृतिक मामलों की सलाहकार समिति की एक बैठक 23.04.1990 को हुई। पंजाब कला परिषद के अध्यक्ष डॉ. सरदार अंजुम ने सुझाव दिया कि हरियाणा कला अकादमी का नाम बदलकर ‘हरियाणा कला परिषद’ कर दिया जाए। हरियाणा कला परिषद को 31.03.1995 को पंजीकृत किया गया था और इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भारत सरकार को प्रस्तुत की गई थी।

हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड

हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड (HSHDB) चंडीगढ़/पंचकुला में अपने पंजीकृत प्रधान कार्यालय के साथ हरियाणा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या के माध्यम से गठित किया गया है; दिनांक 12.10.2015 को हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड का गठन किया गया। इस बोर्ड के अध्यक्ष हरियाणा के मुख्यमंत्री और वाइस चेयरमैन श्री धूमन सिंह किरमिच हैं।

हरियाणा इतिहास और संस्कृति अकादमी, कुरुक्षेत्र

हरियाणा एकेडमी ऑफ हिस्ट्री एंड कल्चर जुलाई 2006 में अस्तित्व में आया, शुरुआत में हरियाणा इतिहास संस्कृति और सामाजिक विकास केंद्र के रूप में और हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (एचआईपीए) गुड़गाँव (अब गुरुग्राम) में। कुछ समय बाद (27 जुलाई 2010) हरियाणा सरकार ने केंद्र को बदलकर हरियाणा इतिहास अकादमी के रूप में पुनर्गठित किया। अंततः 7 जून, 2013 को हरियाणा सरकार ने एक राजपत्र अधिसूचना द्वारा अकादमी को अपना स्वायत्त वैधानिक स्वरूप प्रदान किया। जुलाई 2016 में सरकार ने अकादमी को गुरुग्राम से कुरुक्षेत्र में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।

“समुद्र का संसार” की रचना के लिए अंबाला कैंट निवासी अशोक भाटिया को वर्ष 1991 में प्रथम साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था; 1991 में साहित्य अकादमी पुरस्कार की शुरुआत हुई थी। 9 जुलाई 1970 को हरियाणा साहित्य अकादमी का गठन हुआ और इसे 25 जुलाई 1971 को कार्य करना शुरू किया। इसका पुनर्गठन 26 अगस्त 2011 को किया गया था (अध्यक्ष — CM)। ‘हरिगंधा’ हरियाणा साहित्य अकादमी की मुख्य पत्रिका है।

हरियाणा साहित्य अकादमी सम्मान (राशि)

सम्मानराशि
आजीवन साहित्य साधना सम्मान7 लाख
पं. माधवप्रसाद मिश्र सम्मान2.5 लाख
बाबू बालमुकुन्द गुप्त सम्मान2.5 लाख
लाला देशबन्धु गुप्त सम्मान (पत्रकारिता)2.5 लाख
पं. लखमीचन्द सम्मान (हरियाणवी)2.5 लाख
जनकवि मेहर सिंह सम्मान (हरियाणवी)2.5 लाख
हरियाणा साहित्य गौरव सम्मान2.5 लाख
आदित्य-अल्हड़ हास्य सम्मान2.5 लाख
श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान2.5 लाख
कवि दयाचन्द मायना सम्मान2 लाख
विशेष हिन्दी सेवी सम्मान1 लाख
युवा लेखक सम्मान योजना1 लाख
स्वामी विवेकानन्द युवा लेखक सम्मान1 लाख
पं. दीनदयाल उपाध्याय युवा लेखक सम्मान50 हजार

नोट- जिनका जन्म हरियाणा में हुआ हो, लेकिन वर्तमान में हरियाणा से बाहर रह रहे हैं उनके लिए सम्मान राशि अलग से दी जाती है।

हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी

इस अकादमी की स्थापना 22 अक्टूबर 1996 में हुई थी। इसकी मुख्य पत्रिका ‘शब्द बूँद’ है।

सम्मानराशि
हरियाणा पंजाबी गौरव सम्मान2.5 लाख
बाबा शेख फरीद सम्मान1.11 लाख
भाई संतोख सिंह सम्मान1.25 लाख
संत तरन सिंह सम्मान1 लाख

हरियाणा उर्दू साहित्य अकादमी

इसकी स्थापना 22 दिसम्बर 1985 में हुई थी। ‘जमुना तट’ (त्रि-मासिक) और ‘उर्दू दिशा’ उर्दू साहित्य अकादमी की मुख्य पत्रिकाएँ हैं।

सम्मानराशि
फख़रे हरियाणा सम्मान5 लाख
हाली सम्मान (उर्दू साहित्य में राज्य स्तर)3 लाख
कंवर महेन्द्र सिंह बेदी सम्मान1 लाख
सैयद मुज़फ्फर हुसैन बर्नी सम्मान1 लाख
ख्वाजा अहमद अब्बास सम्मान1 लाख
मुंशी गुमानी लाल सम्मान1 लाख
सुरेन्द्र पंडित सोज सम्मान1 लाख
उर्दू तर्जुमा निगारी सम्मान1 लाख
जाफर जटाल्ली सम्मान1 लाख
डॉ. जावेद वशिष्ट सम्मान1 लाख
उर्दू नौ आमोज उर्दू सम्मान1 लाख
साबिर पानीपती सम्मान1 लाख
बाल कृष्ण मुजतर सम्मान1 लाख
जसवंत सिंह टोहानवी सम्मान1 लाख
उर्दू गजल सराई सम्मान1 लाख
बच्चों के साहित्य पर (अदब-ए-इत्फाल) सम्मान1 लाख
उर्दू सहाफत सम्मान1 लाख

हरियाणा ग्रन्थ साहित्य अकादमी

इस अकादमी की स्थापना 1970 हुई थी। इसका पुनर्गठन 1 सितम्बर 2011 को हुआ था। इसकी मुख्य पत्रिका सप्त सिन्धु (त्रैमासिक) और कथा समय (मासिक) है। यह अकादमी 1979 में हरियाणा साहित्य अकादमी में विलय हो गई थी।

हरियाणा संस्कृत साहित्य अकादमी

इस अकादमी की स्थापना 8 अगस्त 2002 को हुई थी। हरिप्रभा हरियाणा संस्कृत अकादमी की मुख्य पत्रिका है।

सम्मानराशि
साहित्यकार सम्मान25 लाख
संस्कृत साहित्यालंकार7 लाख
आचार्य सम्मान8 लाख
हरियाणा संस्कृत गौरव सम्मान5 लाख
महर्षि वाल्मीकि सम्मान3 लाख
आचार्य स्थाणुदत्त सम्मान2 लाख
महर्षि वेदव्यास सम्मान3 लाख
महर्षि विश्वामित्र सम्मान3 लाख
महाकवि बाणभट्ट सम्मान2.5 लाख
गुरु विरजानंद आचार्य सम्मान2 लाख
विद्या मार्तण्ड पंडित सीताराम शास्त्री आचार्य सम्मान2 लाख
स्वामी धर्मदेव संस्कृत समाराधक सम्मान2 लाख
विशिष्ट संस्कृत सेवा सम्मान2 लाख

हरियाणा के समाचार पत्र और पत्रिका

  • जैन समाचार पत्र — 14 नवंबर 1884 को जियालाल जैन द्वारा प्रकाशित किया गया था; फर्रुखनगर (गुड़गाँव) से प्रकाशित होने वाला यह साप्ताहिक समाचार पत्र था; इसे हरियाणा का प्रथम हिंदी समाचार पत्र भी कहा जाता है।
  • बालमुकुंद गुप्त ने दीनदयाल की प्रेरणा से मथुरा अखबार में काम करना शुरू किया और फिर 1886 में अखबार ‘चुनार’ में कार्य किया था। बाबू बालमुकुंद गुप्त ने कोहिनूर, भारत प्रताप समाचार और दुबे जी के चिट्ठे निकाले थे।
  • जाट समाचार पत्र — बाबू कन्हैयालाल के द्वारा 1889 में गुड़गाँव से प्रकाशित किया गया था।
  • लाला मुरली धर ने 1889 में अंबाला से ‘खैर अंदेश’ नामक समाचार पत्र उर्दू में अंबाला से निकाला था।
  • ज्ञानोदय समाचार पत्र — 1907 में अग्रोहा निवासी ब्रह्मानंद जी महाराज के द्वारा हिसार से प्रकाशित किया गया था।
  • चौधरी छोटूराम ने ‘जाट गजट’ 1916 में रोहतक से निकाला था।
  • हरियाणा तिलक पत्र — वर्ष 1923 में श्रीराम शर्मा ने उर्दू में निकालना शुरू किया था।
  • सावधान समाचार पत्र — 1925 में मदन शर्मा ने भिवानी से प्रकाशित किया था।
  • जगाधरी से उमादत्त शर्मा ने ‘ब्राह्मण समाचार पत्र’ 1925 में निकाला था।
  • गुरुग्राम से 1925 में ‘ज्योतिष मार्तंड समाचार पत्र’ प्रकाशित हुआ था।
  • पंडित प्रह्लाद शर्मा ने वर्ष 1928 में रेवाड़ी से ‘ज्योतिष पत्र’ निकाला था।
  • पंडित नेकी राम शर्मा ने वर्ष 1930 में भिवानी से ‘संदेश पत्र’ निकाला था।
  • सातरोड निवासी लाला हरदेव सहाय ने (हिसार) 1936 में ‘ग्राम सेवक’ साप्ताहिक समाचार पत्र और 1941 में ‘सेवक’ साप्ताहिक समाचार पत्र निकाला था।
  • 1943 में मासिक पत्र ‘कायाकल्प समाचार पत्र’ सफीदों (जींद) से प्रकाशित किया गया था और 1943 में ‘धर्मक्षेत्र समाचार पत्र’ कुरुक्षेत्र से प्रकाशित किया गया था।
  • प्यारेलाल ने 1950 में हिसार से ‘रंगीला मुसाफिर’ प्रकाशित किया था।
  • हरियाणा संदेश समाचार पत्र — सेठ महेश चंद ने 1950 में निकाला था।
  • “विजयानंद” नामक पत्र वर्ष 1956 में आत्माराम जैन ने अंबाला से निकाला था।
  • चेतना पत्र — वर्ष 1957 में रविंद्र नाथ ने निकाला था।
  • हरियाणा केसरी समाचार पत्र — भिवानी से 1958 में बाबू बनारसी दास गुप्ता ने निकाला था।
  • 1966-67 में हरियाणा की प्रथम पत्रिका ‘हरियाणा शोध पत्रिका’ प्रकाशित हुई थी।
  • 5 सितंबर 1996 को हरियाणा के रोहतक से निकला दैनिक हरिभूमि समाचार पत्र हरियाणा की माटी का पहला राष्ट्रीय समाचार पत्र है। 1997 में इसे अखबार का रूप दे दिया गया था।
  • बनारसी दास गुप्ता के संचालन तथा के.वी. दत्त के संपादन से भिवानी से ‘हरियाणा केसरी’ साप्ताहिक पत्र निकालना शुरू हुआ था।
  • लोक संपर्क विभाग द्वारा ‘हरियाणा संवाद’ पत्रिका प्रकाशित होती है। ‘हरियाणा खेती’ हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की मुख्य पत्रिका है।
  • “हरियाणा” और “रियाफ आम” नामक समाचार पत्र पंडित दीनदयाल शर्मा ने झज्जर से निकाले थे। हरियाणा निर्माण के बाद पहला समाचार पत्र ‘हरियाणा’ है, जो झज्जर से पंडित दीनदयाल शर्मा ने निकाला था।
  • मूलचंद जैन के द्वारा ‘बलिदान समाचार पत्र’ प्रकाशित किया गया था; मूलचंद को हरियाणा का गांधी भी कहते हैं।
  • ‘नभ छोर समाचार पत्र’ हिसार से निकाला गया था।

हरियाणा में विद्युत केंद्र और परियोजनाएँ

  • हरियाणा विद्युत बोर्ड की स्थापना — 3 मई 1967।
  • हरियाणा के सभी जिलों में विद्युत पहुँचाने वाला भारत का प्रथम राज्य 29 नवम्बर 1970 में बना था।
  • हरियाणा का पहला जिला जिसके सभी गाँव को 24 घंटे बिजली मिली — पंचकुला। भारत का पहला स्मार्ट ग्रिड प्रोजेक्ट — गुरुग्राम। हरियाणा का प्रथम सौर ऊर्जा पार्क — नोलथा गाँव (पानीपत)।
  • अन्तर्राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संघटन का मुख्यालय गुरुग्राम में है, जिसकी आधारशिला 25 जनवरी 2016 में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति श्री फ्रांस्वा ओलांद द्वारा रखी गई।

हरियाणा बिजली निगम को 2 भागों में बाँटा गया है — UHBVN (उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम, मुख्यालय पंचकुला, स्थापना 1999) और DHBVN (दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, मुख्यालय हिसार, स्थापना 1999)। HPGCL (Haryana Power Generation Corporation Limited) द्वारा 1 जुलाई 1999 में हरियाणा बिजली वितरण निगम को दो भागों में बाँटा गया — 1998 में हरियाणा बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया था। वर्तमान में इसके द्वारा 6 पॉवर स्टेशन चलाए जा रहे हैं — पानीपत, यमुनानगर, हिसार और झज्जर परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं। विद्युत सुधार अधिनियम 1998 और 2003 में किया गया था।

हरियाणा में विद्युत उत्पादन (5 प्रकार से)

ताप विद्युत संयंत्र (कोयले से बिजली उत्पादन)

  • पानीपत तापीय विद्युत केंद्र — पानीपत जिले के आसन गाँव में स्थित; क्षमता 1367.80 मेगावाट; निर्माण 10 नवंबर 1979।
  • राजीव गांधी तापीय विद्युत परियोजना — हिसार जिले के खेदड़ गाँव में; दो यूनिट (600×2), कुल क्षमता 1200 मेगावाट; उद्घाटन 2010; कोयला महानदी कोलफील्ड लिमिटेड (उड़ीसा) से आता है।
  • दीनबंधु छोटूराम तापीय विद्युत परियोजना — यमुनानगर जिले में 2007 (300MW) और 2008 (300MW) में प्रारंभ; कुल क्षमता 600 मेगावाट; राज्य की पहली विद्युत परियोजना है जिसे निजी कंपनी के हाथ में सौंपा गया है (नोट- 800 MW और प्रस्तावित है)।
  • अरावली सुपर तापीय विद्युत परियोजना — इंदिरा गांधी तापीय परियोजना भी कहते हैं; 3 इकाइयाँ; स्थापना 2011-12; कोयला आधारित, झज्जर के समीप खानपुर खुर्द में; कुल क्षमता 1500 मेगावाट।
  • महात्मा गांधी तापीय विद्युत परियोजना — झज्जर जिले में झाड़ली गाँव के पास खानपुर खुर्द में; कुल क्षमता (660×2) 1320 मेगावाट, दो इकाइयाँ; स्थापना 2012।

अन्य ऊर्जा स्रोत

  • परमाणु ऊर्जा संयंत्र — स्थापना 13-01-2014, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा; परियोजना गोरखपुर (फतेहाबाद) में; कुल उत्पादन क्षमता 2800 मेगावाट, 4 यूनिट।
  • गैस ताप विद्युत संयंत्र — फरीदाबाद में, पहले 600 वाट का था, अब वर्तमान में 1500 मेगावाट का बनने जा रहा है।
  • सौर ऊर्जा ताप विद्युत संयंत्र — सौर ऊर्जा पर भारत सरकार द्वारा 90% सब्सिडी है।
  • पवन चक्की ताप विद्युत ऊर्जा — जर्मनी और पोलैंड देश इसके विकास में सहयोग कर रहे हैं; यह मोरनी हिल्स (पंचकुला) और अरावली पर्वत (गुरुग्राम, महेंद्रगढ़) में है।

जल विद्युत परियोजना

  1. पश्चिमी यमुना नहर विद्युत परियोजना — वर्ष 1970 में शुरू; पश्चिमी यमुना नहर के किनारे हथनीकुंड बाँध व दादूपर के बीच स्थित; क्षमता 1650 मेगावाट।
  2. ककरोई सूक्ष्म जल विद्युत परियोजना — पश्चिमी यमुना नहर के किनारे सोनीपत के ककरोई गाँव में; उत्पादन क्षमता 300 मेगावाट।

सौर ऊर्जा परियोजना — हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा यमुनानगर के भुदकला गाँव में स्थापित। हरियाणा का पहला सौर ऊर्जा प्लांट नांधा (चरखी दादरी) में वर्ष 2014 में लगाया गया है। ‘सोलर सिटी’ गुरुग्राम को कहते हैं।

हरियाणा के पर्वतारोही

  • संतोष यादव — रेवाड़ी जिले की; जन्म 1967; 1992 में पहली बार व 1993 में दूसरी बार माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की; 2000 में पद्म श्री से सम्मानित; भारत की पहली महिला पर्वतारोही हैं जिसने सबसे पहले माउंट एवरेस्ट पर दो बार फतह हासिल की।
  • अनीता कुंडू — जन्म 8 जुलाई 1991, हिसार के फरीदपुर गाँव में; माउंट एवरेस्ट पर 3 बार चढ़ाई कर विश्व रिकॉर्ड कायम किया; पहली महिला पर्वतारोही जिसने माउंट एवरेस्ट पर नेपाल के साथ-साथ चीन की तरफ से भी चढ़ाई की — 2013 में नेपाल के रास्ते और 2017 में चीन के रास्ते फतह किया, दोनों रास्तों से फतह करने वाली देश की पहली महिला बनीं। 27 सितंबर 2019 को माउंट मशालू, 5 अक्तूबर 2020 को उत्तराखंड के रुद्गैरा (5800 मीटर) को फतह किया; माउंट एवरेस्ट 3 बार, अंटार्कटिका की सबसे ऊँची चोटी विनसन मासिफ, अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी किलिमंजारो, यूरोप के सबसे ऊँचे शिखर एल्बर्स, दक्षिण अमेरिका की एकोनकागुआ, ऑस्ट्रेलिया की कार्सटेंस पिरामिड शिखर को भी फतह किया है। 2019 में तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय पुरस्कार और कल्पना चावला पुरस्कार मिला। हरियाणा पुलिस में सब-इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत हैं।
  • रोहताश खिलेरी — मलापुर (हिसार) निवासी; हिमाचल प्रदेश में स्थित माउंट फ्रेंडशिप पर्वत पर तिरंगा फहराने में कामयाबी हासिल की।
  • शिवांगी पाठक — हिसार की रहने वाली; सबसे कम उम्र (16 वर्ष) में 16 मई 2018 को माउंट एवरेस्ट की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़कर कीर्तिमान हासिल किया; 2 सितंबर 2018 को रूस की सबसे ऊँची व यूरोप में माउंट एल्ब्रस के नाम से जानी जाने वाली पर्वत चोटी पर चढ़ीं; 24 जुलाई 2018 को 17 साल की उम्र में माउंट किलिमंजारो (अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी) भी चढ़ी; 22 जनवरी 2019 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा बाल शक्ति पुरस्कार 2019 से सम्मानित।
  • नरेन्द्र यादव — रेवाड़ी जिले के रहने वाले; सबसे कम उम्र के पुरुष पर्वतारोही; यूरोप और अफ्रीका की ऊँची चोटियाँ फतह कर चुके हैं; ‘तेनजिंग नोर्गे नैशनल अवॉर्ड’ से सम्मानित।
  • नरेंद्र कुमार — हिसार जिले के गाँव मिंगनी खेड़ा के 28 वर्षीय पर्वतारोही; नेपाल की विश्व की सबसे खतरनाक चोटी माउंट अन्नपूर्णा पर तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन किया; यह कठिन अभियान महज 12 दिनों में पूरा कर एक नया इतिहास रचा।
  • ममता सौदा — कैथल जिले की रहने वाली; हैंडबॉल की खिलाड़ी और पर्वतारोही; पद्म श्री और तेनजिंग नोर्गे पुरस्कार से सम्मानित; 2010 में माउंट एवरेस्ट फतह की, 2012 में माउंट एल्ब्रुस को फतह किया।
  • अनु यादव — फतेहाबाद जिले के बुआन गाँव की; रोहताश खिलेरी के साथ अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी किलिमंजारो (5895 मीटर) पर फतह हासिल की।
  • सुनील — अप्रैल 2025 में करनाल के रहने वाले सुनील ने अन्नपूर्णा चोटी पर फतह हासिल की; हरियाणा के ऐसे पहले पर्वतारोही हैं जिन्होंने 8 हजार मीटर से ज्यादा ऊँचाई वाली 4 पर्वत श्रृंखलाओं पर फतह हासिल की।
  • मांडवी गर्ग (हिसार) — हरियाणा की प्रथम ब्लाइंड माउंट एवरेस्ट महिला।
  • माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाला प्रथम पुरुष — रामलाल (फतेहाबाद)।

हरियाणा के खेल जगत और स्टेडियम

हरियाणा में खेल नीति 2015 में लागू हुई थी।

हरियाणा के खेल जगत में दिए जाने वाले पुरस्कार

  • भीम पुरस्कार — यह हरियाणा खेल जगत में दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार है, इसमें 5,00,000 रुपये की नगद राशि दी जाती है।
  • महाराणा प्रताप पुरस्कार — हरियाणा में पुरुषों को दिया जाने वाला पुरस्कार है।
  • रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार — हरियाणा में खेल जगत क्षेत्र में महिलाओं को दिया जाने वाला पुरस्कार है।
  • गुरु विशिष्ट पुरस्कार — कोच और गुरु को दिया जाने वाला हरियाणा का सबसे बड़ा पुरस्कार है।
  • विक्रमादित्य पुरस्कार — यह रेफरी और अंपायर को दिया जाता है।

पुरस्कार विजेताओं को दी जाने वाली मासिक राशि

पुरस्कारमासिक राशि
अर्जुन पुरस्कार20,000 रुपये
द्रोणाचार्य अवार्ड20,000 रुपये
ध्यानचंद अवार्ड20,000 रुपये
तेनजिंग नोर्गे अवार्ड20,000 रुपये
भीम अवार्ड5,000 रुपये

हरियाणा के स्टेडियम

  • पंचकुला — देवीलाल क्रिकेट खेल स्टेडियम (2007)। अम्बाला — वार मेमोरियल स्टेडियम, अंतरराष्ट्रीय फुटबाल स्टेडियम।
  • यमुनानगर — बिल्ट स्टेडियम। करनाल — कर्ण स्टेडियम। पानीपत — शिवाजी स्टेडियम। सोनीपत — सुभाष स्टेडियम।
  • झज्जर — होशियार सिंह स्टेडियम, जहांआरा स्टेडियम (नया नाम महर्षि दयानंद सरस्वती)।
  • फरीदाबाद — नाहर स्टेडियम (1981), अरावली गोल्फ मैदान (1966)। रेवाड़ी — राव तुलाराम स्टेडियम। महेंद्रगढ़ — सुभाष स्टेडियम।
  • चरखी दादरी — बलिदान स्टेडियम। कुरुक्षेत्र — वेलोड्रम स्टेडियम, द्रोण स्टेडियम।
  • हिसार — महावीर स्टेडियम (1972, इसे 1987 से पहले जवाहरलाल स्टेडियम कहते थे)। भिवानी — भीम स्टेडियम।
  • सिरसा — शाह सतनाम स्टेडियम, भगत सिंह स्टेडियम। जींद — एकलव्य स्टेडियम, अर्जुन स्टेडियम। कैथल — छोटूराम स्टेडियम।
  • गुरुग्राम — देवीलाल स्टेडियम, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम। रोहतक — छोटूराम स्टेडियम, अग्रसेन स्टेडियम, बंसीलाल स्टेडियम।

खेल अकादमियाँ

  • महिला हॉकी अकादमी — शाहबाद (कुरुक्षेत्र)। पुरुष हॉकी अकादमी — सोनीपत।
  • बैडमिंटन और लॉन टेनिस अकादमी — पंचकुला। बॉस्केटबॉल और राष्ट्रीय बॉक्सिंग अकादमी — रोहतक।
  • हवा सिंह बॉक्सिंग अकादमी — भिवानी। निशानेबाजी अकादमी — फरीदाबाद।
  • वीरेंद्र सहवाग क्रिकेट अकादमी — झज्जर। द ग्रेट खली रेसलिंग अकादमी — करनाल।

हरियाणा के प्रमुख खिलाड़ी (जन्मस्थान व खेल)

खिलाड़ीजन्म स्थानखेल
रानी रामपालशाहबाद, कुरुक्षेत्रहॉकी
सविता पूनियाजोधकां, सिरसाहॉकी
बजरंग पुनियाखुंडन, झज्जरकुश्ती
विनेश फोगाटबलाली, दादरीकुश्ती
योगेश्वर दत्तभैंसवाल, सोनीपतकुश्ती
गीता फोगाटबलाली, दादरीकुश्ती
बबीता फोगाटबलाली, दादरीकुश्ती
साक्षी मलिकमोखरा, रोहतककुश्ती
संगीता फोगाटबलाली, दादरीकुश्ती
सुशील कुमारबापोरा, दिल्लीकुश्ती
उदय चंदजांडली, फतेहाबादकुश्ती
चंदगी रामसिसाय, हांसीकुश्ती
अनीता श्योराणभिवानीकुश्ती
अमित कुमारसोनीपतकुश्ती
गीतिका जाखड़अग्रोहा, हिसारकुश्ती
सत्यव्रत कादियानरोहतककुश्ती
लीला राम सागवानदादरीकुश्ती
महावीर फोगाटबलाली, दादरीकुश्ती
नीरज चोपड़ाखंडरा, पानीपतभाला फेंक
कपिल देवचंडीगढ़क्रिकेट
अजय रात्राफरीदाबादक्रिकेट
वीरेंद्र सहवागनजफगढ़क्रिकेट
जोगिंदर शर्मारोहतकक्रिकेट
नवाब अली पटोदीपाटोदी, गुरुग्रामक्रिकेट
भीम सिंहधनानाऊँची कूद
बलवंत सिंह बल्लूकौल, कैथलवॉलीबाल
सुनील डबासबेरी, झज्जरकबड्डी कोच
अमित पंघालभगाना, हिसारबॉक्सिंग
अखिल कुमारफेजाबाद, रोहतकबॉक्सिंग
मनोज कुमारराजोंद, कैथलबॉक्सिंग
हवा सिंहउमरवास, दादरीबॉक्सिंग
विजेंद्र सिंहकालूवास, भिवानीबॉक्सिंग
विकास कृष्ण यादवसिंगवा खास, हांसीबॉक्सिंग
संजीव राजपूतजगाधरी, यमुनानगरशूटर
पिंकी रानीहिसारबॉक्सिंग
अनूप कुमारपलड़ा, गुरुग्रामकबड्डी
संदीप सिंहशाहबाद, कुरुक्षेत्रहॉकी
सरदार सिंहसिरसाहॉकी
ममता खरबरोहतकहॉकी
चाँद रामरजाना खुर्द, जींदपैदल चाल
गीता जुत्शीकरनालधावक
गगन नारंगचेन्नई (पानीपत पितृक शहर)निशानेबाज
खुशी रामझामरी, रोहतकबास्केटबॉल
सीमासोनीपतडिस्कस थ्रो
सज्जन सिंहदादरीबास्केटबॉल
दीपा मलिकसोनीपतपैरा एथलेटिक्स
साइना नेहवालहिसारबैडमिंटन
मनु भाकरझज्जरनिशानेबाज
कविता चहलभिवानीबॉक्सिंग
सुनील डबासझज्जरकबड्डी
रीतू रानीशाहबादहॉकी
प्रीतम रानीसोनीपतहॉकी
नेहा राठीचरखी दादरीकुश्ती
युजवेंद्र चहलजींदक्रिकेट
सुमन बालाकुरुक्षेत्रहॉकी
सुरेन्द्र कौरकुरुक्षेत्रहॉकी
जैस्मिनभिवानीमुक्केबाजी

हरियाणा में प्रथम महिला

  • देश के किसी भी राज्य की पहली महिला जो वन विभाग की अध्यक्ष बनीं — डॉ. अमरिंदर कौर।
  • देश के किसी भी राज्य की पहली महिला विधानसभा स्पीकर — शन्नो देवी।
  • भारत की पहली महिला ओलंपिक पदक विजेता — कर्णम मल्लेश्वरी (2000, कांस्य पदक, 69kg)।
  • ओलंपिक में खेलने वाली राज्य की प्रथम महिला रेसलर — गीता फोगाट।
  • देश की पहली महिला जिसने निशानेबाजी (ओलंपिक) में दो पदक जीते — मनु भाकर (2024 पेरिस ओलंपिक)।
  • राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड जीतने वाली राज्य की प्रथम महिला — कर्णम मल्लेश्वरी (जन्म आंध्रप्रदेश, शादी यमुनानगर) / साइना नेहवाल (जन्म हिसार)।
  • अर्जुन अवार्ड जीतने वाली प्रथम महिला — गीता जुत्शी (एथलेटिक्स, 1976)।
  • द्रोणाचार्य अवार्ड जीतने वाली राज्य की प्रथम महिला — सुनील डबास (2014)।
  • राज्य की प्रथम भीम अवार्डी महिला — गीता जुत्शी। राज्य में प्रथम WWE महिला रेसलर — कविता दलाल (गाँव मालवी, जींद)।
  • राष्ट्रमंडल व एशियाई दोनों खेलों में स्वर्ण पदक विजेता प्रथम राज्य/देश की महिला — विनेश फौगाट।
  • ओलंपिक में कुश्ती खेल में प्रथम पदक विजेता महिला — साक्षी मलिक (कांस्य, ओलंपिक 2016, मोखरा रोहतक)।
  • पद्म भूषण पुरस्कार जीतने वाली प्रथम महिला — साइना नेहवाल (बैडमिंटन, 2016)। पद्मश्री अवार्ड जीतने वाली प्रथम महिला — गीता जुत्शी (एथलेटिक्स, 1983)।
  • पद्मश्री अवार्ड जीतने वाली प्रथम कुश्ती खिलाड़ी महिला — साक्षी मलिक।
  • तेनजिंग नोर्गे बहादुरी सम्मान जीतने वाली राज्य की प्रथम महिला — ममता सौदा, कैथल (2011)।
  • हरियाणा की प्रथम महिला लेफ्टिनेंट — अनु अहलावत (झज्जर)।
  • माउंट एवरेस्ट पर दो बार चढ़ने वाली प्रथम महिला — संतोष यादव (रेवाड़ी)।
  • सबसे कम आयु में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली हरियाणा की प्रथम महिला — शिवांगी पाठक (हिसार)।
  • हरियाणा की प्रथम ब्लाइंड माउंट एवरेस्ट महिला — मांडवी गर्ग (हिसार)।
  • माउंट एवरेस्ट पर नेपाल और चीन दोनों तरफ से चढ़ाई करने वाली प्रथम महिला — अनीता कुंडू (हिसार)।
  • हरियाणा की प्रथम महिला विधायक — स्नेह लता। हरियाणा की प्रथम महिला सांसद — चंद्रावती (चरखी दादरी)।
  • हरियाणा की पहली सत्याग्रही महिला — चांदबाई (सिरसा)। हरियाणा की एकमात्र भारत रत्न प्राप्त महिला — अरुणा आसफ अली (कालका, पंचकुला)।
  • दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री — सुषमा स्वराज (अंबाला)। प्रथम सुषमा स्वराज पुरस्कार विजेता महिला — मंजू शर्मा (जींद)।
  • मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने वाली हरियाणा की प्रथम महिला — मानुषी छिल्लर (बामडौली गाँव, झज्जर)।

हरियाणा में प्रथम पुरुष

  • हरियाणा का प्रथम अर्जुन अवार्डी — उदय चंद (जांडली, फतेहाबाद)। हरियाणा विधानसभा के प्रथम विपक्ष के नेता — प्रताप सिंह।
  • हरियाणा के प्रथम गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री — राव बिरेंद्र सिंह। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (1966) के प्रथम मुख्य न्यायाधीश — मेहर सिंह।
  • हरियाणा के हिंदी समाचार पत्र के संपादक — जियालाल जैन। हरियाणा निर्माण के बाद प्रथम समाचार पत्र संपादक — दीनदयाल शर्मा।
  • सबसे कम आयु में माउंट एवरेस्ट पर फतह करने वाला हरियाणा का प्रथम पुरुष — नरेंद्र यादव (रेवाड़ी)।
  • राज्य का प्रथम पुरुष अभिनेता — जगत जाखड़ (झज्जर)। हरियाणा का प्रथम मुख्य निर्माता — देवीशंकर प्रभाकर।
  • हरियाणा का प्रथम निर्देशक — आनन्द कुमार। हरियाणा का प्रथम संसदीय कार्य मंत्री — चौ. देवीलाल।
  • हरियाणा के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता — मेजर होशियार सिंह (सोनीपत)। हरियाणा के प्रथम हिंदी राजकीय कवि — श्री उदयभानु हंस (हिसार)।
  • हरियाणा का दूसरा राजकीय हिंदी कवि — खुशीराम शर्मा (हिसार)। हरियाणा का राजकीय उर्दू कवि — अनूप चंद आफताब।
  • हरियाणा का प्रथम हास्य व्यंग्य कवि — मीरजाफर जटाली। हरियाणा का वर्तमान हास्य कवि — सुरेंद्र शर्मा।
  • हरियाणा के प्रथम राष्ट्रीय कवि का दर्जा प्राप्त करने वाले — दयाचंद मायना। हरियाणा का प्रथम लोकायुक्त — प्रीतम पाल सिंह।
  • राष्ट्रीय खेलों में कुश्ती में स्वर्ण पदक विजेता प्रथम हरियाणवी — लीलाराम। हरियाणा का प्रथम भक्ति संत — संत दादूदयाल।
  • ओलम्पिक खेलों एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता राज्य व देश का प्रथम खिलाड़ी — नीरज चोपड़ा (पानीपत)।
  • माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाला प्रथम पुरुष — रामलाल (फतेहाबाद)। हरियाणा का प्रथम मुख्यमंत्री — पं. भगवतदयाल शर्मा।
  • हरियाणा का प्रथम उपमुख्यमंत्री — चांदराम। हरियाणा का प्रथम एडवोकेट जनरल — बाबू आनन्द स्वरूप।
  • हरियाणा का प्रथम प्रोफेशनल बॉक्सर — विजेन्द्र सिंह। हरियाणा का प्रथम प्रोफेशनल रेसलर — संग्राम सिंह।
  • राज्य का प्रथम हिन्द केसरी/भारत केसरी — मास्टर चंदगीराम। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘बम लहरी’ गाने वाला राज्य का प्रथम गायक — महावीर गुड्डू (गांगोली गाँव, जींद)।
  • राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड जीतने वाला राज्य का प्रथम पुरुष खिलाड़ी — विजेन्द्र सिंह। हरियाणा के प्रथम सूफी संत — शेख मुहम्मद तुर्क।
  • प्रथम हरियाणवी खिलाड़ी जो शतरंज का ग्रांड मास्टर चुना गया — हिमांशु शर्मा। राज्य का प्रथम पुरुष जेल सत्याग्रही — लाला मुरलीधर।
  • थानेसरी रामायण का रचयिता — खुदा बख्श अहमद खान। हरियाणा में हिन्दी का प्रथम साहित्यकार — संत चौरंगीनाथ।

हरियाणा राज्य में प्रथम / भारत में प्रथम

  • बुढ़ापा पेंशन लागू करने वाला हरियाणा भारत का पहला राज्य है — यह योजना 1987 में शुरू हुई थी। हरियाणा भारत का पहला राज्य बना है — रेलवे में 100% विद्युतीकरण।
  • हरियाणा भारत का पहला राज्य बना है — भूमि जल का मैपिंग सर्वेक्षण। हरियाणा भारत का पहला राज्य बना है — महिला पुलिस थाना स्थापित। महिला पुलिस स्वयंसेवक — पहला राज्य।
  • भारत में हरियाणा सर्वाधिक उत्पादन करता है — ट्रैक्टर का। भारत में हरियाणा सर्वाधिक उत्पादन करता है — मशरूम का।
  • हरियाणा की प्रथम फिल्म — धरती (1968)। हरियाणा की प्रथम सफल फिल्म — बहुरानी (1982)। हरियाणा की प्रथम सुपर हिट फिल्म — चंद्रावल। हरियाणा की प्रथम नहर — पं. यमुना नहर।
  • HPSC का प्रथम अध्यक्ष — दरबारी लाल गुप्ता। हरियाणा का प्रथम गुरुकुल — झज्जर। हरियाणा का प्रथम संग्रहालय — झज्जर (1959)।
  • प्रथम रेल लाइन — दिल्ली से रेवाड़ी (1873)। प्रथम कॉलेज — पं. नेकीराम शर्मा कॉलेज (1926-27)। एनीमिया मुक्त अभियान — पहला राज्य।
  • राज्य का प्रथम विश्वविद्यालय — कुरुक्षेत्र (1956)। प्रथम सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज — मुरथल (1986) (नोट- 2006 में चौधरी छोटूराम इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया)।
  • राज्य का प्रथम रेडियो केन्द्र — रोहतक। सनातन धर्म की प्रथम शाखा — झज्जर (1886)। प्रथम मोबाइल कोर्ट — 2007 (नूह)।
  • हरियाणा की प्रथम पत्रिका — हरियाण शोध पत्रिका। हरियाणवी भाषा का प्रथम उपन्यास — झाडूफिरी। हरियाणवी भाषा की प्रथम कहानी — लड़की की बहादुरी।
  • हरियाणा का प्रथम दैनिक राष्ट्रीय समाचार पत्र — दैनिक हरिभूमि। हरियाणा का प्रथम हिन्दी समाचार पत्र — जैन प्रकाश (जियालाल जैन)।
  • राज्य का प्रथम ग्राम सचिवालय — हैबतपुर (जींद)। राज्य का प्रथम तेल शोधक कारखाना — बाहौली गांव, पानीपत।
  • राज्य का प्रथम स्वप्रेरित आदर्श गांव — सुई (भिवानी)। राज्य का प्रथम सैनिक स्कूल — कुंजपुरा (करनाल)। राज्य का प्रथम कंट्री क्लब — नूंह।
  • भारत का प्रथम वैट लागू करने वाला प्रथम राज्य — हरियाणा। गौ संरक्षण कानून पारित करने वाला देश का प्रथम राज्य — हरियाणा।
  • राज्य का प्रथम लॉ विश्वविद्यालय — डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, सोनीपत। राज्य का प्रथम लॉ कॉलेज — पंचकुला।
  • राज्य व देश का प्रथम रक्षा विश्वविद्यालय — बिनोला, गुरुग्राम। हरियाणा का प्रथम स्किल विश्वविद्यालय खोला गया है — पलवल।
  • भारत की प्रथम निजी मेट्रो चलाने वाला (14 नवम्बर, 2003) राज्य — हरियाणा (गुरुग्राम में)। देश में सर्वाधिक ऐतिहासिक युद्ध स्थलों वाला राज्य — हरियाणा।
  • राज्य का प्रथम पशु विश्वविद्यालय — लाला लाजपतराय, हिसार। राज्य का प्रथम महिला विश्वविद्यालय — खानपुर कलां (सोनीपत)।
  • हरियाणा का प्रथम बागवानी विश्वविद्यालय — महाराणा प्रताप विश्वविद्यालय (अंजनस्थली गाँव, करनाल)। राज्य का प्रथम संस्कृत विश्वविद्यालय — महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय (मुंडड़ी, कैथल)।
  • पंडित लख्मीचंद कला व संस्कृति विश्वविद्यालय स्थापित की जाएगी — अटेरना (सोनीपत)। हरियाणा का प्रथम खेल विश्वविद्यालय — राई, सोनीपत।
  • हरियाणा का प्रथम पर्यटक विश्वविद्यालय — सोनीपत। प्रथम ऊर्जा पार्क की स्थापना — नौलथा, पानीपत। प्रदेश का प्रथम महिला सब बिजली स्टेशन — पानीपत।
  • हरियाणा का प्रथम अनाज बैंक — पानीपत। राज्य का प्रथम गद्य साहित्यकार — शाह मुहम्मद रमजान। राज्य का प्रथम पद्य साहित्यकार — राजाराम शास्त्री।
  • राज्य का प्रथम ग्रामीण बैंक खोला गया — भिवानी। हरियाणा का प्रथम वीर्य नाइट्रोजन बैंक — नारनौल। भारत का पहला कंट्री क्लब — मानेसर।
  • खुले में शौच मुक्त — 5वाँ राज्य। देश का पहला कृत्रिम रबड़ संयंत्र — पानीपत। देश में सर्वाधिक ट्रैक्टर — प्रथम हरियाणा।
  • कृषि ऋण माफ करने वाला देश का प्रथम राज्य — हरियाणा। ‘स्वास्थ्य आपके द्वार’ योजना आरंभ करने वाला देश का प्रथम राज्य — हरियाणा।
  • वृद्धावस्था पेंशन प्रारंभ करने वाला प्रथम राज्य — हरियाणा। फसल बीमा योजना लागू करने वाला प्रथम राज्य — हरियाणा।
  • भारत में सर्वप्रथम ‘सैनिक आईटीआई’ स्थापित करने वाला राज्य — हरियाणा। सभी गाँवों को पक्की सड़क से जोड़ने वाला देश का प्रथम राज्य — हरियाणा।
  • मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) आरंभ करने वाला देश का प्रथम राज्य — हरियाणा। हैपेटाइटिस ‘बी’ व ‘सी’ की दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध कराने वाला पहला राज्य — हरियाणा।

हरियाणा के प्रसिद्ध मुहावरे

मुहावराअर्थ
जोटा मारनाखेत में कार्य करना
चुरने लड़नाउतेजित होना
अक्कल के पाच्छे लठ ले कै पड़नामूर्खतापूर्ण व्यवहार करना
थूक कै चाटणाबात से मुकर जाना
ठोड्डी पकड़नामिन्नतें करना
दूब के दर्शनसारा दिन सुख में कटने का द्योतक
जूती पर जूती चढ़नादूर यात्रा का द्योतक
घर का खोध्या पाणी पीणापूर्णतया आत्मनिर्भर होना
ठाडा छिकणातृप्त हो जाना
बाराबाट होनानष्ट होना
ठाली बैठी नाण, काटड़े मुंडेउपयोगी कार्य के अभाव में निरुपयोगी कार्य करना
पलै गांठ मारनाकसम खाना
बिल्ली का मुंह धोनाप्रियजन के आने का संकेत
गां की भैंस तलै, भैंस की गां तलैकठिन परिस्थितियों में जीवन-यापन करना
टांग तले कै लिकड़नाअधीनता/पराजय स्वीकार करना
छाज तै बोलै, छालनी बी कै बोलदोषी व्यक्ति को दूसरे में दोष गिनाना शोभा नहीं देता
एक हांडी में दो पेट करणापक्षपातपूर्ण व्यवहार करना
चिलम भरणाखुशामद करना
चीं बोलनातौबा करना
कौली भरनागले लगाना
तिकड़म भिड़ानायुक्ति बनाना
गंगाजल ठाणाकसम खाना
खुरी खोदनाबल प्रदर्शन करना
ततैया लड़नाक्रोध करना / क्रोध होना
जड़ पाड़नासमूल नाश करना

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