हरियाणा का भूगोल | Geography of Haryana

By Reacher

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हरियाणा का भूगोल (Geography of Haryana) — संपूर्ण नोट्स

भौगोलिक स्थिति, जलवायु, मंडल, नदियाँ-नहरें, झीलें, वन, मिट्टी, परिवहन, उद्योग और पर्यटन — HSSC CET, Group D, Police, Patwari व अन्य हरियाणा परीक्षाओं के लिए पूर्ण अध्याय। शुरुआत करने से पहले हरियाणा सामान्य परिचय भी ज़रूर पढ़ें।

हरियाणा की भौगोलिक स्थिति

महाभारत काल में हरियाणा को अत्यंत समृद्ध (उपजाऊ) भूमि होने के कारण बहुधान्यक कहा जाता था। हरियाणा का क्षेत्रफल 44,212 वर्ग किलोमीटर (17,070 वर्ग मील) है, जो डेनमार्क/भूटान देश के लगभग बराबर है।

  • हरियाणा का गठन 18वें संवैधानिक संशोधन द्वारा भारत के 17वें राज्य के रूप में हुआ था।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्यों में हरियाणा का 20वाँ स्थान है; राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मिलाकर 21वाँ स्थान है।
  • जनसंख्या की दृष्टि से हरियाणा का भारत में 18वाँ स्थान है।
  • हरियाणा से क्षेत्रफल में छोटे राज्य: गोवा, केरल, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, सिक्किम।
  • केंद्रशासित प्रदेशों में हरियाणा से केवल लद्दाख बड़ा है।
  • हरियाणा की सीमा किसी भी पड़ोसी देश या समुद्र से नहीं लगती। इसकी आकृति विषमबाहु चतुर्भुज या षटकोणीय पतंगाकार है।
  • अक्षांश विस्तार: 27°39′ से 30°55′ उत्तरी अक्षांश। देशांतर विस्तार: 74°28′ से 77°36′ पूर्वी देशांतर।
  • जिस काल में राज्य की भू-गर्भिक संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए — मेसोज़ोइक काल। जिस काल में नदी, नाले, पहाड़ आदि का सुचारू निर्माण हुआ — केनेज़ोइक काल

पड़ोसी राज्य और सीमावर्ती जिले

हरियाणा अपने 5 पड़ोसी राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों (दिल्ली, चंडीगढ़) से सीमा बनाता है। सर्वाधिक सीमा राजस्थान (1262 किमी) से और सबसे कम सीमा उत्तराखंड (11 किमी) से लगती है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा यमुना नदी तय करती है।

हरियाणा से सीमा बनाने वाले राज्य और जिलों की संख्या
पड़ोसी राज्यदिशाउस राज्य के सीमावर्ती जिलेहरियाणा के सीमावर्ती जिले
राजस्थानदक्षिण-पश्चिम8 जिले7 जिले
उत्तर प्रदेशपूर्व6 जिले7 जिले
उत्तराखंडउत्तर व पूर्व1 जिला1 जिला
हिमाचल प्रदेशउत्तर2 जिले3 जिले
पंजाबउत्तर-पश्चिम6 जिले7 जिले

प्राचीन समय में हरियाणा को भौगोलिक दृष्टि से तीन भागों में विभाजित किया गया था: (i) कुरुक्षेत्र (ii) हरियाणा (iii) भटियाना। महाभारत काल से लेकर अब तक का पूरा घटनाक्रम हरियाणा का इतिहास में पढ़ें।

हरियाणा के भौगोलिक भाग (8 भाग)

हरियाणा के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने अपनी पुस्तक ‘An Agriculture Geography of Haryana’ में प्रदेश की मिट्टी के आधार पर भौतिक विभाजन आठ भागों में किया है:

  1. शिवालिक प्रदेश — पंचकुला, अंबाला, यमुनानगर में शिवालिक की पहाड़ियों का विस्तार। घग्घर, सरस्वती, मारकंडा, टांगरी नदियाँ यहीं से निकलती हैं। ऊँचाई के आधार पर 2 भाग: निम्न शिवालिक (400-600 मी.) और उच्च शिवालिक (600 मी. से ऊपर)। यहीं हरियाणा की सबसे ऊँची चोटी करोह (मोरनी की पहाड़ी, ऊँचाई 1514 मी.) स्थित है। अरावली पर्वत श्रृंखला हरियाणा में 3.09% भाग पर और शिवालिक पहाड़ियाँ 1.67% भाग पर फैली हैं।
  2. गिरीपाद के मैदान — शिवालिक श्रेणियों के दक्षिण में यमुनानगर, अंबाला व पंचकुला जिलों में 25 किमी चौड़ी पट्टी। सामान्य ऊँचाई 300-400 मी.। स्थानीय भाषा में इसे ‘घर’ या ‘कंधी’ कहते हैं। प्रमुख नदियाँ — घग्गर व मारकंडा। यहाँ पाए जाने वाले गड्ढों को “चू या चौ” कहते हैं।
  3. जलोढ़ मैदान — गिरीपाद क्षेत्र से अरावली तक तथा यमुना व घग्गर नदियों के बीच फैला मैदान, जिसे ‘बांगर’ भी कहते हैं। यह दो भागों में बँटा है — बांगर प्रदेश (नदियों द्वारा लाई पुरानी मिट्टी) और खादर (नदियों द्वारा लाई नई, अधिक उपजाऊ मिट्टी)। खादर, नाली व बेट क्षेत्रों में पानी का स्तर ऊँचा रहता है, जिससे ट्यूबवेल सिंचाई सुविधाजनक है।
  4. बाढ़ के मैदान — यमुनानगर से पलवल तक यमुना के पूर्वी किनारे पर तथा पंचकुला से सिरसा तक घग्गर नदी द्वारा निर्मित। इन्हें क्रमशः नैली (घग्गर क्षेत्र) व बेट (मारकंडा क्षेत्र) कहा जाता है; यहाँ दलदल पाई जाती है।
  5. बालू के टिब्बे युक्त मैदान — हरियाणा के पश्चिम में राजस्थान सीमा से सटे सिरसा, हिसार, भिवानी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, फतेहाबाद के पश्चिमी भाग में विस्तृत। राजस्थान से आने वाली गर्म शुष्क पवनों से बालू के टिब्बे बने। टीलों के मध्य वर्षा जल से बनी अस्थायी छिछली झीलों को “ठूंड” कहते हैं।
  6. अरावली का पथरीला प्रदेश — भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, मेवात, गुड़गांव (नाममात्र), फरीदाबाद जिलों में अरावली पहाड़ियों का असमतल, उबड़-खाबड़ हिस्सा। हरियाणा में अरावली का सबसे ऊँचा भाग नारनौल के कुलताजपुर गाँव में (652 मी.) है, जिसे ढ़ोसी की पहाड़ी कहते हैं। अरावली में प्रवेश का मुख्य द्वार — गुड़गांव।
  7. तरंगित बालू मैदान — महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी और दादरी जिलों के दक्षिणी भाग में विस्तार।
  8. अनकाई दलदल — सिरसा जिले के दक्षिणी भाग में ढाल मंद होने के कारण जल प्रवाह अवरुद्ध होने से बना दलदली क्षेत्र। हरियाणा में कुछ क्षेत्र लवणीय/ऊसर हैं, जिन्हें रेह/कल्लर कहते हैं।

अन्य प्रमुख पहाड़ियाँ

पहाड़ीजिला
मेवात की पहाड़ीनूंह
तोशाम की पहाड़ीभिवानी
डाडम पहाड़ीतोशाम
दुलेहड़ी की पहाड़ीभिवानी
रिवासा की पहाड़ीरिवासा, भिवानी
ढोसी की पहाड़ीमहेंद्रगढ़
कपूरी पहाड़ीचरखी दादरी
कलियाना पहाड़ीचरखी दादरी (यहाँ हिलना पत्थर पाया जाता है)

हरियाणा में 1966 में 7% भूमि बंजर थी (HSSC के अनुसार)।

हरियाणा की जलवायु

जलवायु — किसी स्थान की लम्बे समय की वायुमंडलीय दशाओं को कहते हैं। मौसम — किसी स्थान के वायुमंडल में कम समय के परिवर्तन को कहते हैं।

समुद्र से दूरी के कारण हरियाणा की जलवायु प्रकृति उपोष्ण कटिबंधीय शुष्क महाद्वीपीय है। डॉ. ब्लादीमीर कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार हरियाणा में दो प्रकार की जलवायु पाई जाती है:

  • आर्द्र उपोष्ण जलवायु (Cwa) — उत्तरी भाग में शिवालिक श्रेणियों के निकटवर्ती क्षेत्रों की 72 किमी चौड़ी मैदानी पट्टी में (हिमाचल सीमा से सटे होने के कारण)।
  • उपोष्ण स्टेपी जलवायु (Bsh) — शेष क्षेत्रों में (राजस्थान सीमा से सटे होने के कारण)।

तीन ऋतुएँ

ऋतुअवधिविशेषता
ग्रीष्म ऋतुमध्य मार्च से जून के अंत तकतापमान 40°–46°C तक; औसत तापमान 35°C
शीत ऋतुसितम्बर से मार्च तक (शीतकाल सामान्यतः सितम्बर से मार्च)तापमान 12°C से 14°C के आसपास
वर्षा ऋतुजुलाई से मध्य सितम्बर तकऔसत वार्षिक वर्षा 40-60 सेमी (45 सेमी)
  • हरियाणा की गणना देश के न्यूनतम वर्षा वाले राज्यों में होती है; हरियाणा न्यूनतम वर्षा वाला राज्य है।
  • हरियाणा का औसत वार्षिक तापमान 22° से 25°C के बीच रहता है। औसत वर्षा 45 सेमी (535 मिमी) है।
  • वर्षा दक्षिणी-पश्चिमी मानसून द्वारा होती है; मानसून के स्वागत में हरियाणा में तीज त्योहार मनाया जाता है।
  • सर्वाधिक गर्मी व सर्दी वाला जिला — हिसार। शीत ऋतु में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली वर्षा को स्थानीय भाषा में मावठ कहते हैं।
  • सर्वाधिक वार्षिक वर्षा वाला जिला — अंबाला (अंबाला आप्शन में न हो तो पंचकुला)। न्यूनतम वार्षिक वर्षा वाला जिला — सिरसा
  • सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान — छछरौली (यमुनानगर)। न्यूनतम वर्षा वाला स्थान — लोहारू (भिवानी), नारनौल (महेंद्रगढ़)
  • हरियाणा में वर्षा सबसे ज्यादा जून-जुलाई में होती है (गर्म माह — मई, ठंडा माह — जनवरी)।
  • हरियाणा के उत्तर-पूर्वी भाग में सबसे ज्यादा वर्षा और दक्षिण-पश्चिमी भाग में सबसे कम वर्षा होती है।

नमी के आधार पर प्रयुक्त चार शब्द — आर्द्रता (वातावरण में नमी होना), उपोषण (ऊष्मा की मात्रा का लगातार बढ़ना), स्टेपी (ऊष्मा की मात्रा का लगातार बढ़ना या घटना), शुष्क (वातावरण का नमी मुक्त होना)।

हरियाणा के मंडल

हरियाणा में कुल 6 मंडल हैं (मूल 4 + नए 2)। मंडल के अधिकारी को आयुक्त कहा जाता है — हर मंडल पर एक कमिश्नर नियुक्त होता है, और हर जिले में डिप्टी कमिश्नर होता है। करनाल और फरीदाबाद को 21 फरवरी 2017 को मंडल बनाया गया था।

मंडल-वार जिले
मंडलजिलेकुल जिले
अंबाला मंडलअंबाला, पंचकुला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र4
करनाल मंडलकरनाल, कैथल, पानीपत3
रोहतक मंडलरोहतक, सोनीपत, झज्जर, चरखी दादरी, भिवानी5
हिसार मंडलहिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, हांसी5
गुरुग्राम मंडलगुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़3
फरीदाबाद मंडलफरीदाबाद, नूंह, पलवल3
  • सर्वाधिक जिलों वाला मंडल — रोहतक व हिसार (5-5 जिले)।
  • सबसे कम वन वाला मंडल — फरीदाबाद। सर्वाधिक वन वाला मंडल — अंबाला।

हर जिले की अलग-अलग जानकारी (मुख्यालय, तहसील, क्षेत्रफल आदि) के लिए हरियाणा के 23 जिलों का परिचय देखें।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)

  • 69वें संविधान संशोधन (1991) द्वारा दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बनाया गया तथा दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के लिए विधानसभा और मंत्रिपरिषद का उपबंध किया गया।
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड का गठन 1985 में हुआ। हरियाणा का लगभग 57% क्षेत्रफल NCR में आता है।
  • हरियाणा के 14 जिले NCR में शामिल हैं — झज्जर, भिवानी, सोनीपत, चरखी दादरी, रोहतक, जींद, पानीपत, करनाल, फरीदाबाद, मेवात (नूंह), पलवल, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम।
  • संशोधित प्रस्ताव पर NCR प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी मिलते ही हरियाणा में NCR का दायरा 1148 वर्ग किमी और कम हो जाएगा — इससे हरियाणा के 5 जिले (करनाल, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, जींद, भिवानी) व 2 जिलों की 3 तहसीलें (पानीपत व रोहतक जिले की) NCR क्षेत्र से बाहर होंगी।

हरियाणा की शासन-व्यवस्था, विधानसभा व प्रशासनिक ढांचे की पूरी जानकारी हरियाणा की राजनीति में मिलेगी।

हरियाणा में कृषि

हरियाणा में कृषि योग्य भूमि 81% है। हरियाणा मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य है — लगभग 70% निवासी कृषि में लगे हैं और लगभग 55% लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है। हरियाणा को “गेहूँ की टोकरी” कहा जाता है, और करनाल को “धान का कटोरा” कहते हैं (संयुक्त रूप से धान का कटोरा — करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद)।

फसलों के प्रकार

  • रबी की फसलें — गेहूँ, चना, मटर, जौ, सरसों आदि; नवंबर माह में बोई जाती हैं (आषाढ़ की फसल भी कहते हैं)।
  • खरीफ की फसलें — कपास, बाजरा, तिल, मक्का, चावल, मूंगफली, गन्ना आदि; जून-जुलाई में बोई जाती हैं (सावनी की फसल भी कहते हैं)।
  • जायद की फसलें — टमाटर, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, मिर्च आदि (चारा फसल)। व्यापारिक/नकदी फसल — गन्ना, कपास, तम्बाकू।

गेहूँ व जौ शोध संस्थान की स्थापना करनाल में 1978 में हुई। केंद्रीय मृदा अनुसंधान की स्थापना करनाल में (01-03-1969)। हरियाणा बीज विकास निगम लिमिटेड की स्थापना 1974 में हुई (मुख्यालय पंचकुला); बीज योजना 2011 में लागू हुई।

हरियाणा बागवानी विभाग की स्थापना 1990-91 में, हरियाणा विपणन बोर्ड की स्थापना 1 अगस्त 1969 में, बागवानी विश्वविद्यालय करनाल की स्थापना 2016 में हुई। फल उत्पादन केंद्र सिरसा में, मंजियाना बागवानी परियोजना (आम) सिरसा में है। सर्वाधिक फलों में आम का उत्पादन होता है, सबसे कम फूलों का उत्पादन महेंद्रगढ़ जिले में होता है, और सोनीपत जिला मशरूम उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।

बागवानी केंद्र

केंद्रस्थान
सब्जी उत्कृष्टता केंद्र (इज़राइल सहयोग)घरौंडा, करनाल
बागवानी उत्कृष्टता केंद्र (इज़राइल सहयोग)मंजियाना, सिरसा
उप-उष्ण कटिबंधीय फल केंद्रलाडवा, कुरुक्षेत्र
एकीकृत मधुमक्खी पालन केंद्ररामनगर, शाहबाद, कुरुक्षेत्र
आलू प्रौद्योगिकी केंद्रनीलोखेड़ी, करनाल
फूल उत्कृष्टता केंद्रझज्जर

जिलेवार फल, फूल, फसल व सब्जी उत्पादन

उत्पादप्रमुख जिलाउत्पादप्रमुख जिला
आडूसिरसाआमअम्बाला
गुलाबपानीपत/चंडीगढ़बेरगुरुग्राम/सोनीपत
रजनीगंधाफरीदाबादग्लेडियोलसफरीदाबाद
कमलफरीदाबादगेंदाझज्जर
आंवलासिरसा/गुरुग्रामअमरुदफतेहाबाद
किन्नूसिरसाजामुनसिरसा
मक्कापंचकुलाहल्दीयमुनानगर (अम्बाला)
गन्ना/घीयायमुनानगरधानकरनाल
खुम्बी/मशरूमसोनीपतप्याजगुरुग्राम
ज्वाररोहतकपं. जवाहरलाल नहर
सरसोंमहेंद्रगढ़ (सर्वाधिक भिवानी)जौभिवानी
चनाभिवानीबाजराभिवानी
कपाससिरसागेहूँसिरसा
गाजरसिरसाआलू/मेथी/धनियाकुरुक्षेत्र

चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना 2 फरवरी 1970 को हिसार में हुई थी। कृषि क्षेत्र में राज्य का सबसे बड़ा पुरस्कार — ताऊ देवीलाल पुरस्कार (राज्य स्तर पर 1 लाख और जिला स्तर पर 25 हज़ार रुपए)।

प्रमुख कृषि निगम व बोर्ड

  • हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था — स्थापना 6 अप्रैल 1976; मुख्यालय पंचकुला; क्षेत्रीय कार्यालय करनाल, हिसार, सिरसा व रोहतक में।
  • हरियाणा भूमि सुधार एवं विकास निगम लिमिटेड (HLRDC) — स्थापना 1974 (मुख्यालय पंचकुला); हिसार, करनाल, कैथल, भिवानी, रेवाड़ी, नारनौलगढ़ व हनुमानगढ़ में कार्यालय; कल्लर भूमि का सुधार व प्रमाणित बीज तैयार करना इसका कार्य है।
  • हरियाणा राज्य भण्डारण निगम — स्थापना 01 नवम्बर 1967।
  • हैफेड (हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन प्रसंघ) — स्थापना 01 नवम्बर 1966; हरियाणा का सबसे बड़ा शीर्ष सहकारी संघ।
  • हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड — स्थापना 01 अगस्त 1969।

हरियाणा में पशुपालन

प्रिवेस्क पोर्टल के अनुसार हरियाणा भारत में पोल्ट्री मीट में सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। मुर्गी पालन परीक्षण संस्थान करनाल के नीलोखेड़ी में है। हरियाणा में पशु जनगणना पशुपालन एवं डेयरी विभाग करता है (मुख्यालय पंचकुला)।

  • हरियाणा का राजकीय पशु — काला हिरण (कृष्ण मृग)। राजकीय स्तनधारी पशु — नीलगाय
  • वर्तमान में पशु चिकित्सा संस्थानों की संख्या लगभग 3000 है; 1966 में इनकी संख्या 314 थी।
  • हरियाणा राज्य गौ सेवा उद्योग के अध्यक्ष — श्रवण कुमार गर्ग। हरियाणा में लगभग 500 से अधिक गऊशालाएँ हैं।
  • मवेशी अत्याचार अधिनियम 1871 और गौहत्या अधिनियम 1972। हरियाणा गौहत्या पर कड़ा कानून परित करने वाला पहला राज्य बना — 7 से 10 साल की सज़ा (अधिनियम 2010 की धारा के तहत 19 नवम्बर 2015 को)। गौमांस तस्करी पर 3 से 5 साल की सज़ा और 1 लाख रुपए का जुर्माना।
  • हरियाणा का एकमात्र पशु विश्वविद्यालय — लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटनरी एंड एनिमल साइंस, हिसार। हरियाणा में 2 क्षेत्रीय कृषि जलवायु केंद्र हैं।
  • NDRI को पहले इम्पीरियल इंस्टीट्यूट फॉर एनिमल हसबेंडरी एंड डेयरी कहा जाता था; इसकी स्थापना 1923 में बैंगलोर में डेयरी शिक्षा केंद्र के रूप में हुई। 1936 में नाम बदलकर इंपीरियल डेयरी संस्थान किया गया, बाद में 1955 में इसे करनाल स्थानांतरित किया गया। 1970 में NDRI को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अधीन लाया गया; 1989 से इसे डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है। इसे कृषि नेतृत्व पुरस्कार (2013) व सरदार पटेल उत्कृष्ट ICAR संस्थान पुरस्कार (जुलाई 2014, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा) से सम्मानित किया गया।
  • NDRI द्वारा पशुओं के क्लोन तैयार किए गए हैं — सर्वप्रथम भैंस के कटड़े का नाम राहुल और गाय की बछिया का नाम महालक्ष्मी रखा गया; सर्वप्रथम भैंस की नस्ल ‘गरिमा’ तैयार की गई थी। HDCO-D (हरियाणा डेयरी कॉरपोरेशन डिपार्टमेंट) की स्थापना 1977 में हुई।

प्रमुख अनुसंधान व प्रजनन केंद्र

केंद्रस्थान
ऊंट अनुसंधान केंद्रसिरसा
भैंस अनुसंधान केंद्र (1 फरवरी 1985)हिसार
अश्व अनुसंधान केंद्र (7 जनवरी 1986, इकाई — टोहाना)हिसार
बकरी अनुसंधान केंद्रतोशाम, भिवानी
भेड़ प्रजनन केंद्रहिसार जिला
मुर्गा भैंस अनुसंधान केंद्रखांडाखेड़ी, हांसी

मुर्गा भैंस को हरियाणा में “काला सोना” या एशियन ट्रैक्टर कहते हैं। सर्वाधिक मवेशियों की संख्या सिरसा जिले में है। वीटा प्लांट — जींद, रोहतक, हिसार, वल्लभगढ़, कुरुक्षेत्र और सिरसा में है। हरियाणा का सबसे बड़ा पशुओं का मेला जहाजगढ़ (झज्जर) में लगता है।

  • राज्य में सर्वाधिक पशुओं की संख्या — हिसार जिले में। राज्य में सबसे कम पशुओं की संख्या — पंचकुला जिले में।
जिलेवार पशु संख्या (हरियाणा पशुगणना)
जिलागायभैंसभेड़बकरीघोड़ाटट्टूखच्चरगधासूअरऊंटकुत्ता
अम्बाला7116013762016887669551652263412804172
भिवानी10543627773934533322705845418280351710016184
चरखी दादरी387531536751294617225190241113317373382315
फरीदाबाद429881141833721679011242321156252832
फतेहाबाद109062234323151461318944317571221605472373
गुरुग्राम64055112688320797527109984888880258248
हिसार1704404264863368918864570431067041573412727
झज्जर6259318052793967837347293303711989182949
जींद1168713963052285311071555901631463341061510
कैथल919432818881093961895872110964947131672
करनाल155294200817108519313677296521103461254077
कुरुक्षेत्र101941139065109557152469114010408202706
महेंद्रगढ़51113187207229954596741281351913548072312
मेवात3008817486755222694812742970761303256
पलवल4968419949175911307232023648932072766
पंचकुला32576572423960760810014622436711505
पानीपत74761165172500845953871422674572191877
रेवाड़ी443101604235384241272601624822869422014
रोहतक64075174158998166602573913279869422014
सिरसा23577525080927888476093984023179698712895878
सोनीपत11182522577171037332456613141239901605
यमुनानगर10729612618882136073583106615262611389
कुल जोड़1932039437664428876833633890606422500800108312517061707

हरियाणा की नदियाँ और नहरें

यमुना नदी

हरियाणा की एकमात्र बारहमासी नदी। यह उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित बंदरपूँछ ग्लेशियर के पश्चिमी भाग में स्थित यमुनोत्री से निकलती है। हरियाणा में यह यमुनानगर के कलेसर नेशनल पार्क से प्रवेश करती है।

  • हरियाणा में यमुना की कुल लंबाई 350 किमी है; हरियाणा-उत्तर प्रदेश सीमा पर यह 320 किमी बहती है और दोनों की सीमा तय करती है। भारत में इसकी कुल लंबाई 1376 किमी है।
  • पलवल जिले के हसनपुर गाँव से यह उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर जाती है।
  • यमुना पर हथनीकुंड बांध (यमुनानगर) बना है — 1999 से पहले इसे ताजेवाला बैराज कहा जाता था। यहीं से दो नहरें निकाली गई हैं — पश्चिमी यमुना नहर (हरियाणा में सिंचाई) व पूर्वी यमुना नहर (उत्तर प्रदेश में सिंचाई); दोनों नहरें फिर यमुना में मिलती हैं तो उसे सदानीरा कहा जाता है।
  • अन्य बांध — ओखला बांध (दिल्ली; यहीं से गुड़गाँव नहर निकाली गई है), अनंगपुर बांध (फरीदाबाद)।
  • सहायक नदियों पर बने बांध — किशाऊ बांध (टोंस नदी), रेणुका बांध (गिरी नदी), लखवार बांध (यमुना नदी)। सहायक नदियाँ — सोम, बूढ़ी, थापना, गिरी, टोंस, आशा (तथा चंबल, बेतवा, केन, सिंध, हिंडन, शारदा, ऋषि गंगा)।
  • लाभान्वित जिले — यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, पानीपत, फरीदाबाद, पलवल। यह नदी प्रयागराज में गंगा से मिलती है — गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी। यमुनोत्री ग्लेशियर कालिंद पर्वत पर होने के कारण यमुना को “कालिंदा”/कालिंदजा भी कहते हैं।
हरियाणा की अन्य प्रमुख नदियाँ
नदीउद्गमप्रवाह क्षेत्र / मुख्य तथ्यलंबाई
सोम नदीआदिबद्री (शिवालिक), यमुनानगरयमुना की सहायक; 1875-76 में दादुपुर गाँव में पथराला बैराज (दादूपुर बैराज) बना; खादर-बांगर 2 बेसिन बनाती है40 किमी
सरस्वती नदीआदिबद्रीप्राचीनतम नदी, अब विलुप्त; यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, सिरसा से बहकर राजस्थान-गुजरात होते अरब सागर में गिरती थी; सरस्वती-सिंधु सभ्यता का सबसे विस्तृत स्थल राखीगढ़ी (हांसी)
घग्गर नदीडागशाई (शिमला के निकट शिवालिक)हरियाणा की सबसे बड़ी बरसाती नदी; कालका (पंचकुला) से प्रवेश; पंचकुला, अंबाला, कैथल, फतेहाबाद, सिरसा में बहती है (कुरुक्षेत्र-जींद में नहीं); सिरसा के ओटू बांध (=धनूर झील) से आगे राजस्थान-पाकिस्तान में हकरा नदी कहलाती है250 किमी
मारकंडा नदीशिवालिक (हिमाचल सीमा); पुराना नाम अरुणाअंबाला के निकट नाहन से प्रवेश; पिहोवा के अरनाय गाँव में सन्नीसा झील बनाकर सरस्वती में मिलती है; कुरुक्षेत्र में “जलबेहरा बांध”90 किमी
टांगरी नदीमोरनी हिल्स, पंचकुलामुलाना (अंबाला) में मारकंडा से मिलती है; मारकंडा की प्रमुख सहायक नदी70 किमी
कौशल्या नदीशिवालिक (हिमाचल-हरियाणा सीमा)केवल पंचकुला में बहती है; पिंजौर के पास घग्गर में मिलती है; पंचकुला में ही कौशल्या बांध20 किमी
चोटांग/दृष्दवती नदीशिवालिक पहाड़ियाँसरस्वती के समांतर बहती थी, अब लुप्त; किनारे राखीगढ़ी सभ्यता बसी थी9 किमी
राखी नदीसाहबपुर गाँव, बिलासपुर (यमुनानगर)छोटी बरसाती नदी; लाडवा (कुरुक्षेत्र) में चोटांग नदी में मिलती थी
साहिबी नदीबहरोड़/अजीतगढ़ की पहाड़ी, सीकर (राजस्थान)दक्षिण हरियाणा की सबसे प्रमुख नदी; कोट कासिम से प्रवेश; रेवाड़ी-गुरुग्राम-झज्जर से बहकर दिल्ली के नजफगढ़ नाले में मिलती है; धारूहेड़ा (रेवाड़ी) में मसानी बांध≈120 किमी
इंदौरी नदीइंदौरी किला, मेवात की पहाड़ियाँ2 शाखाओं में बँटकर साहिबी में मिलती है (कोटकासिम-रेवाड़ी व पटौदी-गुरुग्राम)50 किमी
कृष्णावती नदीराजसमंद (राजस्थान), अरावलीदोसा-अलवर होते महेंद्रगढ़ में प्रवेश; झज्जर के छछकवास-नीमराना पास विलुप्त
दोहन नदीनीम का थाना, सीकर (राजस्थान)साहिबी में मिलती है; मान्यता — ढोसी की पहाड़ी से निकलती है50 किमी

हरियाणा प्रदेश की प्रमुख नहरें व सिंचाई परियोजनाएँ

नहर / परियोजनामुख्य तथ्य
पश्चिमी यमुना नहरयमुनानगर के ताजेवाला से निकाली गई; हरियाणा की सबसे पुरानी व प्रमुख नहर; निर्माण 1355 ई. में फिरोजशाह तुगलक द्वारा (शिकारगाह को पानी देने हेतु); 1765 में पानी बहना बंद हुआ, अंग्रेज इंजीनियर जी.आर. ब्लेन ने 3 वर्ष में जीर्णोद्धार किया (दोबारा हथनीकुंड से निकाली गई); 3 मुख्य शाखाएँ — दिल्ली, हांसी व सिरसा शाखा (कुल लंबाई ≈3226 किमी); करनाल, रोहतक, झज्जर में सिंचाई
भाखड़ा नहरसतलुज नदी पर भाखड़ा नांगल बांध (नांगल, हिमाचल) से निकाली; गोबिंद सागर झील से जल; निर्माण 1946 में शुरू, पहली बार जल 8 जुलाई 1954 को छोड़ा गया; लंबाई 165 किमी; श्रेय — चौधरी छोटूराम; टोहाना के निकट प्रवेश; हिसार व सिरसा में सिंचाई; शाखाएँ — फतेहाबाद, रतिया, रोड़ी, बरवाला
भिवानी नहरभाखड़ा नहर से निकाली; भिवानी में सिंचाई; हरियाणा के दूसरे राज्यपाल बी.एन. चक्रवर्ती के नाम से जानी जाती है; 2 लिफ्ट नहरें — जुई नहर, लोहारू नहर (ऊँचाई वाले क्षेत्र हेतु)
आगरा नहरफरीदाबाद के कुछ भाग में सिंचाई
गुरुग्राम नहरदिल्ली के निकट ओखला से यमुना पर बाँध बनाकर निकाली; निर्माण प्रारंभ 1970; गुरुग्राम, फरीदाबाद व नूंह में सिंचाई
जवाहर लाल नेहरू उठान सिंचाई परियोजनामहेंद्रगढ़ में सूखा राहत कार्यक्रम अंतर्गत; पहली बार जल 1976 में छोड़ा; 1987 सूखे में खरीफ फसल बचाई गई; निर्माण — चौधरी बंसीलाल
लोहारू उठान सिंचाई परियोजनाइंदिरा गाँधी उठान सिंचाई परियोजना भी कहते हैं; भिवानी में सिंचाई
हथनी कुण्ड बैराज परियोजनायमुनानगर में सिंचाई
नरवाना सिंचाई परियोजनानरवाना क्षेत्र में सिंचाई; सालवान फीडर को धमतान डिस्ट्रीब्यूटरी से जोड़ने हेतु
जुई सिंचाई परियोजनाभिवानी जिले में सिंचाई
सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर परियोजनाहरियाणा-पंजाब की संयुक्त परियोजना; कुल लंबाई 212 किमी (पंजाब में 121 किमी, हरियाणा में 91 किमी); 2016 में पंजाब हाईकोर्ट ने हरियाणा के हक में फैसला दिया; 2016-17 बजट में हरियाणा ने SYL हेतु 100 करोड़ रु. रखे
  • हरियाणा में सर्वाधिक सिंचाई सिरसा जिले में; सबसे कम सिंचाई पंचकुला व महेंद्रगढ़ जिले में होती है। नलकूपों से सर्वाधिक सिंचाई कैथल में होती है।
  • फिरोजशाह तुगलक ने हरियाणा में सिरसा, हिसार, फतेहाबाद में सर्वाधिक नहरों का निर्माण करवाया।
  • प्राचीन समय में सिंचाई वाली जमीन को “चाही” और वर्षा-आधारित जमीन को “बरानी” कहते थे। हरियाणा में 1833-34 के अकाल को “नबिया अकाल” कहते हैं।

हरियाणा में झीलें

  • हरियाणा सरकार की देखरेख में 5 झीलें हैं। सबसे बड़ी प्राकृतिक झील — दमदमा झील (गुरुग्राम)। सबसे बड़ी कृत्रिम झील — बड़खल झील (फरीदाबाद)। सबसे साफ-सुथरी झील — भिंडावास झील (झज्जर), जो हरियाणा की सबसे सुंदर झील भी है।
जिलेवार प्रमुख झीलें
जिलाझीलें व मुख्य तथ्य
हिसारब्लू बर्ड झील — 20 एकड़ में, NH09 पर स्थित
हांसीब्लैकबर्ड झील, आमटी झील
रोहतकतित्यार झील — 132 एकड़, निर्माण 1976; समीप रोहतक चिड़ियाघर
फरीदाबादधौज झील, मयूर झील, बड़खल झील (206 एकड़, निर्माण 1947, अरावली की तलहटी में, फारसी में अर्थ — “बिना किसी रुकावट के”), अनंगपुर झील, सूरजकुंड (राजा सूरजमल/तोमरवंशी सूर्यमल द्वारा 10वीं शताब्दी में निर्मित)
करनालकर्ण झील — महाभारत के दानवीर कर्ण के नाम पर, निर्माण 1972, चक्रवती झील भी कहते हैं, 17 एकड़ में फैली
कुरुक्षेत्रसन्निहित सरोवर (हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण तीर्थ, समीप श्रीकृष्ण संग्रहालय, दुःखभंजनेश्वर मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर), ब्रह्म सरोवर (एशिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित सरोवर, राजा कुरु द्वारा खुदवाया गया, बाबा स्वर्णनाथ द्वारा निर्मित मंदिर, प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव)
महेंद्रगढ़सौभासागर झील — नारनौल में
गुरुग्रामदमदमा झील (सोहना से 8 किमी, ≈3000 एकड़/14 वर्ग किमी, हरियाणा की सबसे बड़ी प्राकृतिक मीठे पानी की झील, पतंग मेला), सुल्तानपुर झील (फर्रुखनगर से 15 किमी, साइबेरियन सारस, 100+ प्रवासी प्रजातियाँ, क्षेत्रफल 325.17 एकड़)
नूंहकोटला झील (क्षेत्रफल 20 वर्ग किमी), सैगोल/उजीना झील, चंदेली झील; बसई आर्द्र झील
पलवलडबचिक झील — होडल में, 132 एकड़, 1985-86 में सूख भी गई थी, निर्माण 1974-75
पंचकुलाटिक्कर ताल झील — मोरनी हिल्स में (करोह चोटी, ऊँचाई 1514 मी.)
फतेहाबादचिल्ली झील — स्वर्ण जयंती हेरीटेज पार्क
चंडीगढ़सुखना झील — शिवालिक तलहटी, 3 वर्ग किमी, निर्माण सेक्टर 6 में 1958
झज्जरभिंडावास झील (सुंदर झील हेतु प्रसिद्ध, स्थापना 5 जुलाई 1986, ≈411 हेक्टेयर, पक्षी अभयारण्य 3 जून 2009), खप्परवास झील
कैथलबिदक्यार झील — वामन पुराण में वर्णन, प्राचीन नाम वृद्ध केदार तीर्थ

सुल्तानपुर और भिंडावास झील को रामसर साईट में आर्द्र भूमि के रूप में शामिल किया गया है। नोट — महम की बावड़ी शुद्रो कलाल द्वारा निर्मित है; बावड़ियों का शहर नारनौल को कहते हैं; 360 बावड़ियों का शहर पंचकुला है।

हरियाणा के राष्ट्रीय उद्यान

हरियाणा में 2 राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) हैं:

राष्ट्रीय उद्यानमुख्य तथ्य
सुल्तानपुर नेशनल पार्क1971 में पक्षी विहार (इको पार्क) बना; 1972 के अधिनियम के तहत 5 जुलाई 1991 को नेशनल पार्क का दर्जा; क्षेत्रफल 1.43 वर्ग किमी; अक्टूबर में साइबेरियन सारस आते हैं, नवंबर-दिसंबर में साइबेरिया व लद्दाख लौट जाते हैं; हरियाणा का सर्वप्रमुख इको पार्क; गुरुग्राम में फर्रुखनगर रोड पर स्थित; पहले सलीमअली पक्षी अभयारण्य कहलाता था; श्रेय — पीटर जेक्सन
कलेसर नेशनल पार्क53.45 वर्ग किमी, यमुनानगर जिले में; 1996 अधिनियम के तहत 8 दिसम्बर 2003 को दर्जा; लाल गर्दन के जंगली मुर्गे, मॉनिटर छिपकली, भौंकने वाले हिरण; समीप (बनसंतोर) हाथी पुनर्वास संस्थान; हिमाचल, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश से सीमा; प्राचीन शिव मंदिर; हरियाणा का सबसे बड़ा नेशनल पार्क; नाम महादेव शिव के कारण; सांभर, चीतल, नीलगाय भी मिलते हैं

जंगली मुर्गे पंचकुला में भी पाए जाते हैं।

हरियाणा के वन्य जीव अभ्यारण

हरियाणा में 8 वन्यजीव अभ्यारण और 2 संरक्षित वन्यजीव अभ्यारण हैं। संरक्षित वन्यजीव अभ्यारण — सरस्वती, बीरबारा। सबसे बड़ा वन्यजीव अभ्यारण — अबूबशहर, 11530 हेक्टेयर (सिरसा)। सबसे छोटा — छिलछिला, 28.9 हेक्टेयर (कुरुक्षेत्र)

वन्यजीव अभ्यारणजिलामुख्य तथ्य
अबूबशहरसिरसाकाले तीतर बहुतायत में; स्थापना 30 जनवरी 1987; हरियाणा का सबसे बड़ा वन्यजीव अभ्यारण (11530.56 हेक्टेयर)
कतलसरयमुनानगरस्थापना (अधिसूचना 1996) 13 जनवरी 2000; क्षेत्रफल 5435 हेक्टेयर; चीड़ व साल के वृक्ष
छिलछिलाकुरुक्षेत्र28.92 हेक्टेयर; 28 नवम्बर 1986 को वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत घोषित; हरियाणा का सबसे छोटा वन्यजीव अभ्यारण
खप्परवासझज्जरस्थापना 30 जनवरी 1987; 82.70 हेक्टेयर
भिंडावासझज्जरसुंदर झील हेतु प्रसिद्ध; स्थापना 5 जुलाई 1986; ≈411 हेक्टेयर; साहिबी नदी गुजरती है; 3 जून 2009 को पक्षी अभयारण घोषित; भूरे हंस, बत्तख, लाल बुलबुल, किंगफिशर हेतु प्रसिद्ध (≈250 पक्षी प्रजातियाँ)
खोल ही रैतानपंचकुलाअधिसूचना 2004 के तहत 07-09-2007 को घोषित; 2226 हेक्टेयर
वीर शिकारगढ़पंचकुला29 मई 1987 को बना; 767.30 हेक्टेयर
नाहर/नाहड़रेवाड़ी30-01-1987 को बना; 211.35 हेक्टेयर; समीप बड़खल झील; सियार, लोमड़ी, काला हिरण; जून 2009 में संवेदनशील क्षेत्र घोषित

नोट — अशोला भट्टी वन्यजीव अभयारण हरियाणा (फरीदाबाद व गुरुग्राम के उत्तरी भाग) और दिल्ली की सीमा पर है।

संरक्षित वन्यजीव अभ्यारण

नामजिलामुख्य तथ्य
सरस्वती वन्यजीव अभयारणकैथल“सुंदर जंगल”/”स्योंसर वन” भी कहते हैं; 11-10-2007 को (अधिनियम 29 जुलाई 1988) संरक्षित; 4452.85 हेक्टेयर
बीरबारा वन्यजीव अभयारणजींदस्थापना 11-10-2007 (अधिनियम 2004); 419 हेक्टेयर; वन्य प्राणी, वनस्पति व परंपरागत संस्कृति संरक्षित क्षेत्र

गोल्डन जुबली ब्रह्म सरोवर को सामुदायिक आरक्षित के रूप में 2017 में लिया गया। असोला भट्टी वन्य अभ्यारण्य — दिल्ली रिज में गुरुग्राम व फरीदाबाद जिलों में; स्थापना 1986; तेंदुए के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण; अरावली को सिन्धु-गंगा मैदान से जोड़ने वाला क्षेत्र; 32.71 वर्ग किमी।

हरियाणा वन विभाग

स्थापना 7 दिसम्बर 1989; मुख्यालय पंचकुला। वन प्रकारों (1968) के चैंपियन एवं सेठ वर्गीकरण के अनुसार हरियाणा में 3 प्रकार के वन हैं — उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन, उष्णकटिबंधीय कांटेदार वन और उपोष्ण कटिबंधीय देवदार वन।

  • 1966 में वन क्षेत्र 3.9% था, वर्तमान में 6.8% है, जबकि राज्य वन नीति के अनुसार 20% वन क्षेत्र होना चाहिए। राष्ट्रीय वन नीति 1988 के अनुसार भारत का लक्ष्य 33% तथा हरियाणा के कुल भू-भाग का लक्ष्य 10% वन विस्तार है।
  • वनाच्छादित क्षेत्र 1603.48 वर्ग किमी — कुल भौगोलिक क्षेत्र का 3.63%।

हरियाणा वन रिपोर्ट — जिलेवार श्रेणियाँ

श्रेणीअग्रणी जिले (क्रमशः)
सर्वाधिक वन क्षेत्रफलपंचकुला, यमुनानगर
न्यूनतम वन क्षेत्रफलपलवल, पानीपत, फतेहाबाद
सर्वाधिक वन % (प्रतिशत आधार पर)पंचकुला, यमुनानगर, फरीदाबाद
न्यूनतम वन % (प्रतिशत आधार पर)फतेहाबाद, जींद, पलवल
सर्वाधिक सघन वनयमुनानगर, पंचकुला
सर्वाधिक मध्यम सघन वनपंचकुला
सर्वाधिक खुले वनपंचकुला
सर्वाधिक झाड़ियाँमहेंद्रगढ़

वनों का वर्गीकरण (2 आधार पर)

  • उष्ण कटिबंधीय शुष्क पतझड़ वन — 20-40 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों (महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, भिवानी, यमुनानगर, कैथल, करनाल, सोनीपत आदि मैदानी भाग) में। वृक्ष — शीशम, पीपल, नीम, आम, जामुन, इमली, बड़, रेडू, लसूड़ा, सेमल। शुष्क क्षेत्रों में — कीकर, फिरास, झरबेरी, पीलू, नीम, खैर, ओक, पाठा, थूर, सरकण्डा, बुई, संजिया।
  • उपोष्ण कटिबंधीय पाइन वन — 100 सेमी वर्षा वाले पहाड़ी क्षेत्रों (अम्बाला, पंचकुला, यमुनानगर व हिमाचल सीमावर्ती क्षेत्र) में। मुख्यतः चीड़ व पाइन; साथ ही सिरस, कचनार, खैर, बियुल, जिंगन, अमलतास। कालका व मोरनी में जामुन, बहेड़ा, महुआ भी मिलते हैं।

हरियाणा की वन परियोजनाएँ एवं कार्यक्रम

योजनावर्षविवरण
सामुदायिकी वानिकी योजना1998-99 (पूर्ण 2006-07)यूरोपीय संघ की सहायता से; ≈27,000 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण
हर घर हरियाली योजना2015स्थानीय प्रजातियों के विकास पर बल — पीपल, नींबू, अनार, देसी आम, जामुन, हरड़, बहेड़ा, शहतूत, बेरी, बकैन, रोहेड़ा, बड़ आदि
कण्डी योजना1974विश्व बैंक सम्पोषित; अम्बाला व यमुनानगर के उत्तरवर्ती शिवालिक क्षेत्र में पुनः वृक्षारोपण; वन-कृषि-पशुपालन-बागवानी विभागों की संयुक्त योजना
अरावली पर्वत श्रृंखला पुनर्वास योजना1991-2000यूरोपीय आर्थिक समुदाय सम्पोषित; अनावृत्त अरावली पहाड़ियों पर पुनः वृक्षारोपण
ग्रीनिंग ऑफ हरियाणा1989-90नदियों, नहरों, सड़कों, रेल मार्गों व गाँवों के चारों ओर वृक्षों की पेटियाँ — गिलोय, बथुआ, गोखरू, अश्वगंधा, सदाबहार, मकोय आदि
  • वृक्षारोपण का प्रथम कार्य ‘Greening of Haryana’ है; राज्य वन नीति-2006 में घोषित की गई।
  • हरियाणा में 2 पर्यावरण अदालतें (फरीदाबाद व कुरुक्षेत्र) हैं; विशेष अदालत (कैम्प कोर्ट) करनाल में (1998) लगती है।
  • फरीदाबाद में खैर/खादिर वृक्ष अधिक मात्रा में — इसकी छाल सर्दियों में पशु-चारे के रूप में प्रयोग होती है।
  • 2014 से 15 जुलाई को ‘तरु दिवस’ मनाया जाता है। दक्षिण-पश्चिमी भाग में जांटी/खेजड़ी वृक्ष को “हरियाणा का चंदन वृक्ष” कहते हैं।
  • वन विभाग की प्रथम महिला प्रमुख (देश की भी प्रथम) — अमरिंदर कौर। बागवानी विभाग द्वारा फलोत्पादन बढ़ाने हेतु ‘क्लस्टर पद्धति’ अपनाई गई।
  • वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम राज्य में 12 मार्च 1972 से लागू हुआ; संशोधन कर 2 सितम्बर 1991 से शिकार पर प्रतिबंध लगाया गया।
  • पंचकुला-मोरनी में चीड़ तथा करनाल में ढाक/पलाश के पेड़ पाए जाते हैं।

हरियाणा प्रदेश में मिट्टी

केंद्रीय मिट्टी लवणता शोध संस्थान की स्थापना करनाल जिले में 01-03-1969 में हुई थी। हरियाणा की भूमि को तीन भागों में बाँटा गया है — पहाड़ी भूमि, मैदानी भूमि, रेतीली भूमि। अत्यंत हल्की मिट्टी को रोसली मिट्टी भी कहते हैं।

मिट्टी का प्रकारजिला
शिवालिक मृदापंचकुला
लाल चेस्टनट मृदायमुनानगर
डाकर मिट्टीयमुनानगर
गिरिपाद मृदायमुनानगर
जलोढ़ मृदाकरनाल
डाबरकुरुक्षेत्र
भारी दोमट मृदानूंह
दलदला क्षेत्रसिरसा
बलुई दोमटसिरसा

तीन मुख्य प्रकार

  1. पहाड़ी मिट्टी — पथरीली; मोरनी की पहाड़ियों पर पाई जाती है; दक्षिणी भाग में अरावली के कारण पथरीली-रेतीली मिट्टी; पहाड़ी क्षेत्र में मिट्टी पतली व कठोर होती है।
  2. मैदानी मिट्टी — उपजाऊ; यमुना-सरस्वती जैसी नदियों के बहाव से आती है; हरियाणा का सबसे उपजाऊ क्षेत्र मैदानी भाग ही है; भूरे-पीले रंग की मिट्टी।
  3. रेतीली मिट्टी — दक्षिण-पश्चिमी भाग में; हल्के भूरे रंग की; राजस्थान से चलने वाली हवाओं के साथ आती है; कृषि हेतु अधिक उपजाऊ नहीं मानी जाती।
  • अत्यंत हल्की रेतीली मिट्टी — सिरसा के दक्षिणी भाग, भिवानी, फतेहाबाद, हिसार व महेंद्रगढ़ जिलों में; जल-ग्रहण क्षमता कम; मोटे अनाज व दालों की कृषि उपयोगी; चूने की मात्रा अधिक; रौंसली मिट्टी भी कहते हैं।
  • दोमट मिट्टी — मध्यवर्ती भाग (जींद, कैथल, सोनीपत, पानीपत, कुरुक्षेत्र, करनाल, गुरुग्राम, फरीदाबाद)।
  • बालू दोमट मिट्टी — हिसार, भिवानी, रेवाड़ी, गुरुग्राम, झज्जर।
  • मोटी दोमट मिट्टी — मेवात के मध्य-पश्चिमी भाग व सिरसा के कुछ क्षेत्र।
  • हल्की दोमट मिट्टी — मुख्यतः अम्बाला के दक्षिणी-पश्चिमी भाग।
  • सामान्यतः भारी मिट्टी — यमुना के साथ के क्षेत्र (यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद के पूर्वी किनारे); सिल्टयुक्त — रवादार मिट्टी भी कहते हैं।

शिवालिक गिरिपादीय तथा चट्टानी तल की मिट्टियाँ

  • शिवालिक मिट्टी — पंचकुला के कालका व अम्बाला के नारायणगढ़ क्षेत्र में; बलुआ पत्थर, चीका, बजरी तत्वों की मात्रा अधिक।
  • गिरिपादीय मिट्टी — पंचकुला के कालका, अंबाला के नारायणगढ़ और यमुनानगर के जगाधरी क्षेत्रों में।
  • चट्टानी तल की मिट्टियाँ — दक्षिणी भाग में अरावली के कारण पथरीली-रेतीली। यमुनानगर में लाल चेस्टनट मिट्टी; जगाधरी में डाकर मिट्टी। सिरसा में काली मिट्टी — यहीं कपास का सर्वाधिक उत्पादन होता है।
  • खादर — नदियों द्वारा बहाकर लाई नई उपजाऊ मिट्टी (यमुना व मारकंडा द्वारा निर्मित); बाढ़-ग्रस्त नदी-किनारे क्षेत्रों में मिलती है।
  • बांगर — नदियों द्वारा बहाकर लाई पुरानी, कम उपजाऊ मिट्टी (जलोढ़ मिट्टी का ही प्रकार)।
  • सिरसा जिले के दक्षिणी क्षेत्र में दलदली मिट्टी पाई जाती है। लवणता व क्षारीयता ग्रस्त मृदा को रेह/कल्लर कहते हैं। मृदा अपरदन को “रेंगती हुई मृत्यु/निर्दयी शत्रु” कहते हैं — हरियाणा में सर्वाधिक मृदा अपरदन वायु व जल के कारण होता है।

हरियाणा राज्य में परिवहन

हरियाणा परिवहन विभाग की स्थापना 1966 में हुई थी; परिवहन का राष्ट्रीयकरण 1972 में हुआ। मुख्यालय चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में है। हरियाणा में नया मोटर व्हीकल्स एक्ट 1 अप्रैल 2018 को लागू हुआ। परिवहन 3 प्रकार का है — सड़क मार्ग, रेल मार्ग, वायु मार्ग।

सड़क मार्ग

परिवहन विभाग की 4 प्रकार की बसें — शक्ति बस (सबसे तेज रफ्तार), गौरव बस (साधारण), उदय बस (CNG), वॉल्वो बस (AC युक्त)।

  • सर्वाधिक सड़क घनत्व वाला जिला — अंबाला। कम सड़क घनत्व वाला जिला — जींद।
  • सबसे अधिक सड़कों की लंबाई — हिसार व सिरसा। सबसे कम (क्षेत्रफल अनुसार) — पंचकुला व फरीदाबाद।
  • सर्वाधिक कच्ची सड़कों वाला जिला — जींद। सर्वाधिक पक्की सड़कों वाला जिला — अंबाला।
  • सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग — NH9 (पुराना नाम NH10), 286 किमी। सबसे लंबा राजकीय राजमार्ग — SH17 (निजामपुर, महेंद्रगढ़ से मुनक, करनाल), 200 किमी। सबसे छोटा राजकीय राजमार्ग — SH6-A (जगाधरी से पोंटा साहिब), 5 किमी।
  • पहला बस अड्डा — अंबाला (1950); नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज के नाम पर। कुल 24 बस डिपो व 13 सब बस डिपो। सबसे बड़ा बस स्टैंड — झज्जर। पहला 4-मंजिला बस स्टैंड — फतेहाबाद। भारी वाहन चालक केंद्र — मुरथल (सोनीपत)। वाहन निरीक्षण व प्रमाण पत्र केंद्र — रोहतक।
  • प्रथम महिला बस ड्राइवर — पंकज चौधरी। प्रथम महिला बस कंडक्टर — शर्मिला।
  • सबसे कम राष्ट्रीय राजमार्ग वाला जिला — महेंद्रगढ़; सर्वाधिक — अंबाला व रोहतक।
प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग (NH)
NHमार्ग / मुख्य तथ्य
NH44NH1+NH2 को जोड़कर बना; कुल लंबाई 3745 किमी (हरियाणा में 257 किमी); अंबाला, शाहबाद, पीपली, निलोखेड़ी, तराइन, घरौंडा, समालखा, गन्नौर, खरखौदा, मुरथल, राई, बल्लभगढ़, होडल से गुजरता है
NH9हरियाणा में 286 किमी — दिल्ली, बहादुरगढ़, रोहतक, महम, हांसी, हिसार, अग्रोहा, फतेहाबाद, सिरसा, डबवाली से पंजाब; ग्रांड ट्रंक रोड नाम से प्रसिद्ध; निर्माता — फिरोजशाह तुगलक; हरियाणा का सबसे लंबा NH; पुराना नाम NH10
NH54डबवाली से चंडीगढ़; हरियाणा में लंबाई 5 किमी; पुराना नाम NH64; हरियाणा का सबसे छोटा NH
NH11रेवाड़ी से जैसलमेर
NH709पानीपत–रोहतक–महेंद्रगढ़; पुराना नाम NH71(A)
NH48दिल्ली–मानेसर–बावल होते मुंबई; सबसे व्यस्त NH; पुराना नाम NH08
NH152D227 किमी (प्रस्तावित); महेंद्रगढ़ को अंबाला से जोड़ेगा; कुरुक्षेत्र के इस्मालाबाद से नारनौल तक
NH148Bटोहाना, बरवाला, हांसी, बवानी खेड़ा, भिवानी, दादरी, महेंद्रगढ़, नारनौल से पंजाब के भटिंडा तक
NH105पिंजौर को स्वरघाट से जोड़ता है; पुराना नाम NH21(A)
NH5अंबाला को शिपकीला से जोड़ता है; पुराना नाम NH22
NH352बावल, झज्जर, रोहतक को नरवाना से जोड़ता है; पुराना नाम NH71
NH919रेवाड़ी से पलवल; पुराना नाम NH71B

एक्सप्रेस-वे

  • KMP एक्सप्रेस-वे (कुंडली-मानेसर-पलवल) — कुल लंबाई 135.65 किमी; 5 जिलों से गुजरता है — मानेसर (गुरुग्राम), सोनीपत, बहादुरगढ़ (झज्जर), नूंह, हथीन (पलवल); वर्ष 2018 में बनकर तैयार; दिल्ली के पश्चिम की ओर से गुजरता है।
  • KGP एक्सप्रेस-वे (कुंडली-गाज़ियाबाद-पलवल) — कुल लंबाई 135 किमी; दिल्ली के पूर्वी ओर से गुजरता है।

वायु मार्ग

हरियाणा नागरिक उड्डयन विभाग की स्थापना 1 नवम्बर 1966 को हुई थी। वर्तमान में कुल 7 हवाई पट्टियाँ हैं (HSSC के अनुसार 5 वायु पत्तन)।

हवाई अड्डावर्ष / विशेष तथ्य
हिसार हवाई अड्डा1965 — हरियाणा का पहला नागरिक हवाई अड्डा; 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा हिसार-अयोध्या पहली उड़ान शुरू की गई
नारनौल हवाई अड्डा (महेंद्रगढ़)1948
करनाल हवाई अड्डा1967
भिवानी हवाई अड्डा2013
पिंजौर हवाई अड्डा2013

भिवानी में एक और नया हवाई अड्डा प्रस्तावित है।

2 सैनिक हवाई अड्डे

  • सिरसा वायुसेना स्टेशन — स्थापना 1960; सुखोई, मिराज, मिग जैसे लड़ाकू विमान।
  • अंबाला वायुसेना स्टेशन — हरियाणा का सबसे पुराना व सबसे बड़ा हवाई अड्डा; 1919 में एयरफोर्स स्टेशन बना, 1938 में स्थाई एयरफोर्स स्टेशन, 1948 में एयरफोर्स पट्टी बनी; 10 सितम्बर 2020 में यहाँ राफेल विमान स्थापित किए गए।

रेल मार्ग

हरियाणा में रेल नेटवर्क 3 रेलवे क्षेत्र और 5 मंडलों में बँटा है:

रेलवे क्षेत्रमंडल
उत्तर पश्चिम रेलवे क्षेत्रबीकानेर रेलवे डिवीजन, जयपुर रेलवे डिवीजन
उत्तर रेलवे क्षेत्रदिल्ली रेलवे डिवीजन, अम्बाला रेलवे डिवीजन
उत्तर मध्य रेलवे क्षेत्रआगरा रेलवे डिवीजन
  • हरियाणा में पहली रेलवे लाइन 14 फरवरी 1873 को रेवाड़ी से दिल्ली नमक ढोने के लिए चलाई गई थी। पहली CNG डेमू रेल 13 जनवरी 2015 को रेवाड़ी से रोहतक चलाई गई।
  • पहली बार मेट्रो 2010 में गुरुग्राम शहर में चली। गुरुग्राम में रैपिड मेट्रो 2013 में चली। वर्तमान में मेट्रो गुरुग्राम, फरीदाबाद व बहादुरगढ़ (झज्जर) में चलती है; सोनीपत में प्रस्तावित है।
  • हरियाणा के मेवात (नूंह) जिले से कोई रेलवे लाइन नहीं गुजरती।
  • सबसे बड़ी रेलवे वर्कशॉप — जगाधरी (यमुनानगर), स्थापना 1952; यहाँ शताब्दी एक्सप्रेस के डिब्बों की मरम्मत होती है।
  • सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन — रेवाड़ी जंक्शन; सबसे पुराना भाप इंजन “फेरी क्वीन” रेवाड़ी में है।
  • हरियाणा की छोटी रेल लाइन (नैरो गेज, 0.610 मीटर) कालका से शिमला तक जाती है — निर्माण 1898, 8 जुलाई 2008 को UNESCO विश्व धरोहर में शामिल।
  • दिल्ली से अमृतसर हरियाणा का प्रमुख प्रथम रेलमार्ग है। सोनीपत में नई रेलवे कोच वर्कशॉप प्रस्तावित है।

हरियाणा में खनिज और उद्योग

खनिज संस्थान

खनिजजिला
रेवादार चूनाअम्बाला
चूनारोहतक/अम्बाला
चीनी मिट्टी/कांच/बालूगुरुग्राम
बजरी/क्रेशर/रेतफरीदाबाद
स्लेट पत्थरकुंड ग्राम (रेवाड़ी), गुरुग्राम
शोराहिसार
लोहा, मैंगनीजभिवानी
ग्रेनाइटभिवानी/महेंद्रगढ़
डोलोमाइटअम्बाला/महेंद्रगढ़
तांबाभिवानी/महेंद्रगढ़
टंगस्टन/टीनतोशाम
हिलना पत्थर (कलियाना)चरखी दादरी
शेष सभी खनिजमहेंद्रगढ़

सर्वाधिक खनिज उत्पादन वाला जिला — महेंद्रगढ़।

प्रमुख उद्योग (जिलेवार)

जिलाप्रमुख उद्योग
पंचकुलासूरजपुर सीमेंट, एच.एम.टी.
अम्बालाट्रैक्टर के औजार, मिक्सी उद्योग, सिलाई मशीन
कुरुक्षेत्रशाहबाद सुगर मिल
जींदचमड़ा उद्योग
सिरसाजगदम्बे पेपर मिल
हिसारस्टील उद्योग, 555 बिस्कुट
भिवानीबी.टी.एम. (1937)
झज्जरपैनासोनिक, पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री, सेनेटरी
रेवाड़ीहीरो
गुरुग्रामआई.बी.एम., होंडा, मारुति उद्योग, रतन एवं आभूषण पार्क (हीरो–धारूहेड़ा)
पलवलकॉटन उद्योग
फरीदाबादटायर ट्यूब, ट्रैक्टर, रॉयल बाइक, राजदूत बाइक, बाटा शू
रोहतकएशियन पेंट
सोनीपतएटलस साईकिल (1952)
पानीपतबुनकरों का शहर, तेल शोधक कारखाना
करनाललिबर्टी शू (1954)
यमुनानगरबिल्ट पेपर मिल, सरस्वती सुगर मिल, टिम्बर मार्केट, गोला बारूद, रेलवे वर्कशॉप
  • हरियाणा में सर्वाधिक उद्योग फरीदाबाद में हैं, इसलिए इसे “औद्योगिक शहर” कहते हैं। गुरुग्राम को “उद्योग विहार” व फरीदाबाद को “उद्योग नगरी” कहते हैं। अंबाला शहर को “साइंस सिटी” कहा जाता है।
  • वीटा प्लांट — जींद, सिरसा, रोहतक व हिसार में। हरियाणा लघु उद्योग नीति 1967 में लागू हुई। हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की स्थापना 1 फरवरी 1969। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) एक्ट 2006 में लागू हुआ। पहली उद्योग नीति 1 जनवरी 2011 से; नई उद्योग नीति 1 जनवरी 2021 से 2025 तक लागू है।
  • हरियाणा भारत में सर्वाधिक ट्रैक्टरों का निर्माण करता है। सिरसा में उद्योग व वाणिज्य विभाग द्वारा एक टेक्सटाइल पार्क प्रस्तावित है। लघु व सूक्ष्म उद्योगों हेतु हरियाणा पावर टैरिफ सब्सिडी योजना लागू है।

मारुति कार उद्योग

P.V.T.-1970, गुरुग्राम — 1981-82 में सरकार ने अपने अधीन लिया। मारुति सुजुकी को जापान से सबसे पहले संजय गांधी लेकर आए थे। हरियाणा में मारुति की 3 इकाइयाँ हैं; उत्पादन की बिक्री 1983 में शुरू हुई; नई इकाई सोनीपत में खुली है।

अन्य प्रमुख कारखाने

  • चरखी दादरी सीमेंट फैक्ट्री — स्थापना 1939, सेठ रामकृष्ण डालमिया द्वारा; निर्माण जर्मन इंजीनियरों द्वारा; 23 जून 1981 को सीमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा अधिगृहीत।
  • TITS (टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मिल) — 1943, भिवानी; यहाँ से तुर्की, बांग्लादेश, बेल्जियम आदि को माल निर्यात होता है।
  • तेल शोधक कारखाना — स्थापना 1998, बाहोली (पानीपत); जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, उत्तराखंड व दिल्ली को पेट्रोलियम आपूर्ति करता है।
  • बिल्ट पेपर मिल — यमुनानगर में 1929 में स्थापित; 1945 में सरकार द्वारा अधिकृत।
  • BTM (भिवानी टेक्सटाइल मिल) — स्थापना 1937; 1945 में सूती वस्त्र बनाने की पहली मिल लगाई गई।

चीनी (शुगर) मिलें

मिलवर्ष
सरस्वती सुगर मिल (यमुनानगर) — हरियाणा की पहली सुगर मिल1933
पानीपत सुगर मिल1956
रोहतक सुगर मिल1956
करनाल सहकारी सुगर मिल1977
शाहबाद सहकारी सुगर मिल1984-85
कैथल सुगर मिल1991
महम सुगर मिल1991
देवीलाल सुगर मिल (सोनीपत)2001

हरियाणा में प्रजनन केंद्र और पार्क

  • पंचकुला — रेड जंगल फाउल गौरिय प्रजनन केंद्र, तीतर प्रजनन (मोरनी), फिज़ेंट प्रजनन केंद्र (मोरनी हिल्स), गिद्ध संरक्षण केंद्र (पिंजौर)
  • यमुनानगर — हाथी पुनर्वास केंद्र (बनसंतोर)
  • कुरुक्षेत्र — मधुमक्खी पालन केंद्र (शाहबाद), काला तीतर प्रजनन केंद्र (पिपली), मगरमच्छ प्रजनन (भौर सैदान)
  • सिरसा — ऊंट प्रजनन केंद्र
  • हिसार — भेड़ प्रजनन केंद्र, हिरण पार्क

हरियाणा सरकार की देखरेख में 5 प्रजनन केंद्र और 1 हिरण उद्यान है (HSSC के अनुसार):

#प्रजनन केंद्रस्थान
1चिंकारा प्रजननकैरू (भिवानी)
2मोर व चिंकारा प्रजननझाबुआ (रेवाड़ी)
3तीतर प्रजननमोरनी (पंचकुला)
4गिद्ध संरक्षण केंद्र (2001)पिंजौर (पंचकुला)
5मगरमच्छ प्रजननभौर सैदान (कुरुक्षेत्र)
  • हरियाणा पर्यटन विभाग की स्थापना अधिनियम 1956 के तहत 1 सितम्बर 1974 को हुई थी। हरियाणा में कुल 43 पर्यटक स्थल हैं।
  • हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन — मोरनी हिल्स। लगभग सभी पर्यटन स्थलों के नाम पक्षियों के नाम पर रखे गए हैं।
  • हरियाणा सरकार कर्ण झील व ब्लू बर्ड झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है।
  • सर्वाधिक पर्यटन स्थल — कुरुक्षेत्र; सबसे कम — फतेहाबाद
  • पर्यटन विभाग का लोगो — “Comes Holiday With Us”; चिन्ह — मोर; ब्रांड एम्बेसडर — धर्मेंद्र और हेमा मालिनी

हरियाणा में पर्यटक स्थल

हरियाणा के अधिकतर पर्यटक स्थलों का नामकरण पक्षियों के नाम पर हुआ है (हरियाणा पर्यटन विभाग की सूची अनुसार):

पर्यटक स्थल (पक्षी-नाम)जिला
किंगफिशरअम्बाला
बयाभिवानी
बड़खल लेक, होटल राजहंस, हरमीटेज, सनबर्ड, लेक व्यू हट्स (सूरजकुंड), अरावली गोल्फ कोर्स, मेगपाईफरीदाबाद
डबचिक (होडल, 1974-75)पलवल
राजा नाहर सिंह प्लेसबल्लभगढ़ (फरीदाबाद)
पपीहाफतेहाबाद
शमा, सारस (दमदमा), सोहना, बर्ड सेन्चुरी रोज़ी पेलिकनगुरुग्राम
फ्लेमिंगो, ब्लू बर्ड (1996)हिसार
बुलबुलजींद
कोयलकैथल
ओयसिस, कर्ण झील (उचाना, 1972)करनाल
पैराकीट (पिपली), नीलकांती कृष्णा धामकुरुक्षेत्र
अंजनपेहोवा
स्काईलार्क, ब्लू जे (समालखा)पानीपत
माउंटेन क्वेल (मोरनी हिल्स), रेड बिशप, यादवेन्द्र गार्डन (पिंजौर), मनसा देवी यात्रिका, टिक्कर तालपंचकुला
जंगल बबलर (धारूहेड़ा), सैंडपाइपररेवाड़ी
तिल्यार लेक (1976), मैनारोहतक
गौरियाबहादुरगढ़ (झज्जर)
सुर्खाब (1980), शिकारा (असाखेड़ा)सिरसा
ग्रे पेलिकन, आदिबद्रीयमुनानगर

चिड़ियाघर

हरियाणा में 3 चिड़ियाघर हैं:

चिड़ियाघरस्थापनाक्षेत्रफल
भिवानी छोटा चिड़ियाघर1982 (अधिनियम 1972 के तहत मिनी चिड़ियाघर दर्जा — 14 अगस्त 2008)7 एकड़
पिपली छोटा चिड़ियाघर (कुरुक्षेत्र)198227 एकड़
रोहतक चिड़ियाघर198744 एकड़
  • महम हिरण उद्यान — रोहतक जिले में स्थित।
  • हिसार हिरण उद्यान — निर्माण 1970-71; इसमें 8 चितकबरी हिरण, 8 कृष्ण मृग व 3 सांभर हैं; इसे चिड़ियाघर बनाने की घोषणा की गई है; क्षेत्रफल 48 एकड़।

हरियाणा के राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारक

हरियाणा में 23 राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारक हैं:

#स्मारकजिला
1यूरोपीय कब्रिस्तानअंबाला
2प्राचीन टीला (भिरड़ाना)फतेहाबाद
3प्राचीन टीला (कुणाल)फतेहाबाद
4शीशमहलगुड़गाँव
5देहरा मंदिरनूंह (गुरुग्राम)
6प्राचीन गुम्बदहिसार
7चार कुतुब दरगाहहांसी
8जहाज कोठीहिसार
9शेख तैय्यब का मकबराकैथल
10प्राचीन पुलकरनाल
11प्राचीन शिव मंदिरकुरुक्षेत्र
12विश्वामित्र का टीलाकुरुक्षेत्र
13पीर तुर्कमान मस्जिद और मकबरामहेंद्रगढ़
14त्रिपोलिया गेटवेमहेंद्रगढ़
15शाह निज़ाम का मकबरामहेंद्रगढ़
16चोर गुम्बदमहेंद्रगढ़
17शोभा तालाबमहेंद्रगढ़
18चट्टा राय बाल मुकुंद दासमहेंद्रगढ़
19मिर्ज़ा अली जान और बाउरी का सिंहासनमहेंद्रगढ़
20भीमा देवी मंदिरपंचकुला
21तकिया बनवा फकीरपंचकुला
22प्राचीन टीला (सुघ)यमुनानगर
23बौद्ध स्तूपयमुनानगर

हरियाणा में शिक्षा

हरियाणा का पहला विश्वविद्यालय — कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (स्थापना 11 जनवरी 1956; नींव डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा रखी गई; सर्वप्रथम केवल संस्कृत भाषा में पढ़ाई शुरू हुई)।

  • हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय — स्थापना 2 फरवरी 1970; पहले नाम HAU था, 1991 में चौधरी चरण सिंह के नाम पर रखा गया; प्रथम कुलपति — A.L. फ्लेचर; क्षेत्रफल 4500 एकड़; पहले पंजाब विश्वविद्यालय का हिस्सा था।
  • हरियाणा का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज — NIT कुरुक्षेत्र (1963)। पहला बागवानी विश्वविद्यालय — महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल (2016)। प्रथम कॉलेज — पंडित नेकीराम कॉलेज, रोहतक (स्थापना 1926)।

जिलेवार प्रमुख विश्वविद्यालय

जिलाविश्वविद्यालय
हिसारचौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय (2-2-1970)
गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (20-10-1995)
लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटनरी एंड एनिमल साइंस (1-12-2010)
महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा (1994, O.P. जिंदल द्वारा)
कुरुक्षेत्रकुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (1956); श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय (2017)
कैथलसंस्कृत विश्वविद्यालय, मुंदरी (2018)
जींदचौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी (2014)
अम्बालामहर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय, मुलाना (1993)
सोनीपतदीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल — 2006 (1987 में संस्थान रूप में स्थापित)
भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां (2006)
अशोक विश्वविद्यालय (2013)
ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय (2009)
गुरुग्रामAMITY यूनिवर्सिटी, मानेसर (2010); नॉर्थ कैप विश्वविद्यालय (1996)
फरीदाबादYMCA विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (1969) — नया नाम जगदीश चन्द्र बसु विश्वविद्यालय, 2017 में रखा गया
मानव रचना विश्वविद्यालय (2009); लिंग्याज विश्वविद्यालय (2009)
पलवलकौशल विश्वविद्यालय
सिरसाचौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (2 अप्रैल 2003)
भिवानीचौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (2014)
महेंद्रगढ़केंद्रीय विश्वविद्यालय, जाटपाली (2009)
रोहतकमहर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (1976)
पंडित बी.डी. शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (2008)
बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय (अस्थल बोहर)
रेवाड़ीइंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर (2013)
नूंहहसन खां मेवाती मेडिकल (2012)
मानेसरब्रेन सेंटर विश्वविद्यालय (1997)

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE)

भिवानी बोर्ड की स्थापना “हरियाणा शिक्षा विभाग” के नाम से चौधरी बंसीलाल द्वारा 31 जनवरी 1969 को चंडीगढ़ में की गई थी। 1981 में नाम बदलकर HBSE कर दिया गया और मुख्यालय चंडीगढ़ से भिवानी स्थानांतरित हुआ।

  • HBSE द्वारा पहली बार 10वीं की परीक्षा 1970 में तथा 12वीं की परीक्षा 1987 में आयोजित की गई। (10+2+3 प्रणाली 1985-86 में अपनाई गई)
  • ओपन बोर्ड की स्थापना 1994 में हुई। तकनीकी शिक्षा बोर्ड की स्थापना 2008 में हुई।
  • पंडित लख्मीचंद विश्वविद्यालय अटेरना (सोनीपत) में बनेगा।

हरियाणा के हर्बल पार्क, हवेली और संस्थान

हर्बल पार्क

हरियाणा में कुल 61 हर्बल पार्क हैं। विश्व का सबसे बड़ा हर्बल पार्क चुहड़पुर (यमुनानगर) में है; सबसे बड़ा हर्बल पार्क मोरनी में प्रस्तावित है।

जिलाहर्बल पार्क
अम्बालामहावीर पार्क, सुभाष चंद्र पार्क, इंदिरा गांधी पार्क, केंट सुनील पार्क, द्राड पार्क
पंचकुलाटिक्करताल, थापली, पिंजौर, कपूर, कैक्टस
यमुनानगरदेवीलाल पार्क (2001, रुद्राक्ष वाटिका), आदिबद्री पार्क, सिटी सेंट्रल पार्क
गुरुग्रामअरावली, वाटर पार्क, सॉफ्टवेयर पार्क, लेज़र वैली, नाचीटैक पार्क
फरीदाबादफाइटेन पार्क, नरही, कुंडा, रत्नामोल वाटिका
हिसारजिंदल पार्क, टाउन पार्क
भिवानीबंसीलाल पार्क, सुरेंद्र पार्क
रेवाड़ीशहीद भगत सिंह पार्क, राजीव गांधी पार्क, भूगोल वाटिका, खलीलपुर वाटिका, मसानी पार्क, कर्णवास वाटिका, रामगढ़ पार्क

प्रमुख हवेली और कोठी

जिलाहवेली / कोठी
पंचकुलानाहन कोठी, रायपुर रानी महल, रामगढ़ महल
अम्बालागंगाराम की हवेली
यमुनानगरबुढ़िया का रंग महल व कोठी
करनालएडम्स व अक्टरलोनी हाउस
झज्जरद्वारका व जोगी सेठ की हवेली, बाग वाली कोठी
फरीदाबादराजा नाहर सिंह हवेली
पलवलबलवान और काशीराम की हवेली, किशोरी महल
रेवाड़ीहेमू की हवेली, रामपुरा महल (1801, राव तेज सिंह)
फतेहाबादराज्य की सबसे पुरानी हवेली
हिसारजार्ज थामस की कोठी
भिवानीजयराम दास की हवेली, सेठ छज्जूराम की हवेली
गुरुग्रामसिक्खों की हवेली, हवेली ऑफ उदयवीर
रोहतकप्रेम निवास/नीली कोठी, सेठ नर सिंह की हवेली

हरियाणा के प्रमुख कृषि व पशु अनुसंधान संस्थान

जिलासंस्थानस्थापना
करनालराष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संस्थान1984
गेहूं अनुसंधान निदेशालय1978
केंद्रीय मिट्टी लवणता अनुसंधान संस्थान01 मार्च 1969
राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संसाधन ब्यूरो19 जुलाई 1985
सोनीपतकेंद्रीय प्लास्टिक इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान, मुरथल2006
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान IIIT, किलोहड़2014
हिसारकेंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र1 फरवरी 1985
अश्व अनुसंधान केंद्र7 जनवरी 1986
कुरुक्षेत्रराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT)1963
झज्जरकैंसर संस्थान व हृदय अनुसंधान संस्थान (AIIMS), बाढसा2018
फरीदाबादकेंद्रीय समन्वित पेस्ट मैनेजमेंट शोध संस्थान1988
रेवाड़ीऔद्योगिक विकास केंद्र, बावल
गुरुग्रामराष्ट्रीय ब्रेन शोध संस्थान, नैनवाल (मानेसर)14 नवम्बर 1997

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली — स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त निकाय, चिकित्सा शिक्षा-अनुसंधान-रोगी देखभाल के क्षेत्र में भारत का एक प्रमुख संस्थान है।

हरियाणा GK के बाकी सभी चैप्टर यहाँ पढ़ें — Haryana GK Chapter Wise

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