1757-58 में हरियाणा मराठों के अधीन आ गया था। और 1803 में सर्जी अर्जन गाँव की संधि के बाद अंग्रेजों के अधीन आ गया था। 1805 में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने हरियाणा को 2 भागो में विभाजीत किया। हरियाणा पूर्ण रूप से अंग्रेजों के अधीन 1809-10 में आया।
अंग्रेजो से पहले हरियाणा पर मुगलों का प्रशासन था। 1832 में इसे ब्रिटिश भारत के तत्कालीन उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में स्थानांतरित कर दिया गया और 1858 में हरियाणा पंजाब का हिस्सा बन गया। 1966 से पहले हरियाणा का क्षेत्र पूर्वी पंजाब का हिस्सा था। 1857 की क्रांति के बाद 1858 में हरियाणा के क्षेत्र को दिल्ली से निकालकर पंजाब में मिला दिया गया। जैसे ही 1911 में दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित कि गई। हरियाणा के लोगों ने मांग करनी शुरू कर दी कि हमें पंजाब से अलग करके दिल्ली में मिलाया जाए। 1920 के दशक में, दिल्ली में कुछ बदलाव हेतु मुस्लिम लीग और क्षेत्र के लोगों द्वारा दिल्ली के आयुक्त सर जे.पी. थॉमसन को सुझाए गए थे।
मुस्लिम लीग की बैठक 1925-26 में जो नई दिल्ली में आयोजित हुई थी। इस बैठक में स्वागत समिति के अध्यक्ष पीरजादा मोहम्मद हुसैन ने हरियाणा को पंजाब से निकालकर दिल्ली में मिलाने की बात रखी। 1928 में, दिल्ली में सर्वदलीय सम्मेलन ने फिर से दिल्ली की सीमाओं के विस्तार की मांग की। 1928 में पंडित श्रीराम शर्मा, देश बंधु गुप्ता और नेकी राम शर्मा ने महात्मा गांधी से आग्रह किया कि हरियाणा को पंजाब से निकालकर दिल्ली में मिलाया जाए।
हरियाणा के एक अलग राज्य के लिए आंदोलन का नेतृत्व लाला लाजपत राय और आसफ अली, दोनों भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में प्रमुख शख्सियतों के साथ-साथ नेकी राम शर्मा द्वारा किया गया था, जिन्होंने एक स्वायत्त राज्य की अवधारणा को विकसित करने के लिए एक समिति का नेतृत्व किया था।
1931 में दूसरा गोलमेज सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस गोलमेज सम्मेलन का नेतृत्व पंजाब की तरफ से पंजाब के सर जोफरी कार्बेट कर रहे थे। इन्होंने हरियाणा के क्षेत्र को पंजाब से निकालने की बात कही। राष्ट्रवादी नेता दीनबंधु ने 9 सितम्बर 1932 में हरियाणा क्षेत्र को एक अलग राज्य बनाने की बात कही। देशबंधु गुप्ता ने कहा कि “हिंदी भाषी क्षेत्र कभी भी पंजाब का हिस्सा नहीं रहा था इस क्षेत्र के विकास के लिए यह आवश्यक था कि इसे पंजाब से अलग किया जाए और दिल्ली, राजस्थान के कुछ आसपास के हिस्सों को इसके साथ जोड़कर एक नया राज्य बनाया जाए।
कांग्रेस के आदेश पर 1935 में पूरे हरियाणा में कांग्रेस की स्वर्ण जयंती मनाई गई थी। देश की आजादी के कुछ साल बाद से ही भाषाई आधार पर अलग राज्य बनाने की मांग उठने लगी।
1946 में काँग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. पट्टाभि सीतारमैया ने ‘अखिल भारतीय भाषाई कॉंफ्रेंस (दिल्ली)’ के सम्मुख अपने भाषण में अलग हरियाणा प्रदेश की मांग को उचित ठहराते हुये सरकार को इसे मानने की सलाह दी।
1948 में मास्टर सरदार तारा सिंह ने पंजाबी सूबे की मांग की। भाषाओं के आधार पर विवाद इतना बढ़ता गया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर को सच्चर फॉर्मूला बनाना पड़ा। इसका गठन 1 अक्टूबर 1949 को किया गया था। भाषा के आधार पर सच्चर फार्मूले ने हरियाणा को दो हिस्सों में बाँटा। परन्तु यह फार्मूला असफल रहा।
भारत सरकार ने भाषा के आधार पर हुए विवाद को समाप्त करने के लिए 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया। राज्य पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष फजल अली ने 1955 में अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसके तहत 1956 में 7वां संवैधानिक संशोधन करके 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेश के पुनर्गठन की मोहर लगी, जिसमें पंजाब राज्य का पुनर्गठन भी शामिल था। 1956 में क्षेत्रीय फार्मूला लागू किया गया। जिसमें हरियाणा और पंजाब के बीच चंडीगढ़ विवाद क्षेत्र का फार्मूला लगाया गया था। चंडीगढ़ पर हरियाणा का 40% और पंजाब का 60% हक है।
फतेह सिंह ने पंजाबी सूबे के लिए सरकार को अल्टीमेटम देकर आमरण अनशन की घोषणा की थी।
पंजाब पुनर्गठन एक्ट (Punjab Reorganization Act)
23 सितम्बर 1965 को सरदार हुकम सिंह आयोग का गठन किया गया और उसके बाद 23 अप्रैल 1966 को सरदार हुकम सिंह ने अपने नीचे शाह आयोग यानी सीमा आयोग का गठन किया। सीमा आयोग ने 31 मई 1966 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। सीमा आयोग में कुल तीन सदस्य थे। जे. सी. शाह (जयंतीलाल छोटेलाल शाह), एस. दत्त और एम. एम. फिलिप्स थे।
पंजाब पुनर्गठन बिल 18 सितम्बर 1966 को पारित हुआ। 18वें संवैधानिक संशोधन के तहत हरियाणा भारत का 17वां राज्य बना था। हरियाणा को पंजाब का 35.18 प्रतिशत हिस्सा दिया गया।
1 नवम्बर 1966 को जब हरियाणा बना उस समय 7 जिले थे। जिनमें से सबसे बड़ा हिसार (13891 वर्ग किलोमीटर) और सबसे छोटा जींद (2702 वर्ग किलोमीटर) था। सात जिलों के नाम – हिसार, जींद, महेंद्रगढ़, अम्बाला, रोहतक, गुड़ग्राम और करनाल थे।
1947 में भारत की आजादी के समय हरियाणा में केवल 5 जिले थे। गुड़ग्राम, अम्बाला, करनाल, रोहतक, और हिसार थे। 1948 में हरियाणा का 6वां जिला महेंद्रगढ़ बना। 1966 में 7वां जिला जींद बना था। 1967 जींद और सफीदों को जींद की तहसील बनाया।
नोट- हरियाणा का गठन संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किया गया था।
अनुच्छेद 3 :- यह अनु. संसद को अधिकार देता है कि :-
क. किसी राज्य में से उसका राज्य क्षेत्र अलग करके या दो या दो से अधिक राज्यों को मिलाकर नए राज्य का निर्माण कर सकेगी।
ख. किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ा सकती है।
ग. किसी राज्य के क्षेत्र घटा सकेगी।
घ. किसी राज्य की सीमाओं में परिवर्तन कर सकेगी।
ड. किसी राज के नाम में परिवर्तन कर सकेगी।
हरियाणा के 23 जिलों की स्थापना-
| जिला | क्षेत्रफल (वर्ग किमी.) | तिथि |
|---|---|---|
| हिसार | 2633.24 | 1 नवम्बर 1966 |
| गुड़ग्राम | 1258 | 1 नवम्बर 1966 |
| रोहतक | 1745 | 1 नवम्बर 1966 |
| जींद | 2702 | 1 नवम्बर 1966 |
| अम्बाला | 1569 | 1 नवम्बर 1966 |
| महेंद्रगढ़ | 1899 | 1 नवम्बर 1966 |
| करनाल | 2520 | 1 नवम्बर 1966 |
| सोनीपत | 2260 | 22 दिसम्बर 1972 |
| भिवानी | 3283 | 22 दिसम्बर 1972 |
| कुरुक्षेत्र | 1530 | 23 जनवरी 1973 |
| सिरसा | 4277 | (26 अगस्त 1975/ 1 सितम्बर 1975) |
| फरीदाबाद | 741/742.9 | 15/2 अगस्त 1979 |
| कैथल | 2317 | 1 नवम्बर 1989 |
| रेवाड़ी | 1559 | 1 नवम्बर 1989 |
| यमुनानगर | 1756 | 1 नवम्बर 1989 |
| पानीपत | 1268 | (1 नवम्बर 1989, पुन: 1 जनवरी 1992) |
| पंचकूला | 898 | 15 अगस्त 1995 |
| झज्जर | 1834 | 15 जुलाई 1997 |
| फतेहाबाद | 2538 | 15 जुलाई 1997 |
| नूंह (मेवात) | 1507 | 4 अप्रैल 2005 |
| पलवल | 1359 | 13/15 अगस्त 2008 |
| चरखी दादरी | 1370.11 | 1 दिसम्बर 2016 |
| हांसी | 1349.76 | 19 दिसम्बर 2025 |
अधिक क्षेत्रफल वाले जिले – सिरसा (4277), भिवानी (3283), जींद (2702)।
कम क्षेत्रफल वाले जिले – फरीदाबाद (741), पंचकुला (898), गुड़ग्राम (1258), पानीपत (1268)।
