राष्ट्रीय आन्दोलन में हरियाणा की भूमिका (Haryana’s Role in National Movement)
कांग्रेस की स्थापना
1885 ई. में कांग्रेस की स्थापना हुई तो 72 सदस्यों में लाला मुरलीधर भी शामिल थे। लाला मुरलीधर ने अम्बाला में तथा लाला लाजपत राय ने हिसार में कांग्रेस की शाखाएँ स्थापित कीं। बंगाल विभाजन 1905 के विरोध के कारण 1907 में लाला लाजपत राय को देश निकाला देकर मांडले जेल (म्यांमार) भेज दिया गया।
हरियाणा में सामाजिक और धार्मिक आंदोलन एक नजर में
आर्य समाज की स्थापना 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपने गुरु विरजानंद की प्रेरणा से मुंबई में की थी। 1880 में स्वामी जी ने रेवाड़ी में आर्य समाज की स्थापना की। स्वामी जी 1880 रेवाड़ी आए थे हिसार में आर्य समाज की शाखा लाला लाजपत राय ने 1886 में खोली थी।
स्वदेशी आंदोलन
स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव हरियाणा में भी पड़ा लाला मुरलीधर ने 1891 के कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल पर जोर दिया तथा लाला मुरलीधर ने स्वदेशी आंदोलन को हरियाणा के अंबाला से शुरू किया और हिसार से स्वदेशी आंदोलन को लाला लाजपत राय ने चलाया।
होम रुल आंदोलन
आयरलैंड निवासी एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक ने होम रुल की स्थापना 1916 में मद्रास और पुणे में की थी तथा हरियाणा क्षेत्र में होम रुल के प्रमुख नेता नेकीराम, एम. ए. अंसारी और शंकर लाल थे।
रॉलेट एक्ट का विरोध
हरियाणा में रॉलेट एक्ट 1919 में अंबाला से शुरू हुआ था रॉलेट एक्ट का जायजा लेने के लिए महात्मा गांधी हरियाणा होते हुए पंजाब और लाहौर जा रहे थे। 9 अप्रैल 1919 को महात्मा गांधी की गिरफ्तारी पलवल रेलवे स्टेशन से की गई और उन्हें दोबारा मुंबई जाने वाली ट्रेन में बिठा दिया गया। (स्रोत HBSE – 9वीं कक्षा के अध्याय 9 पेज न. 128)
पंजाब क्रांतिकारी आंदोलन
पंजाबी क्रांतिकारी आंदोलन के सरदार अजित सिंह, पिंडी दास, अम्बा प्रसाद, लालचंद फलक और दीनदयाल बांके प्रमुख नेता थे। बांके दयाल की कविता पगड़ी संभाल जट्टा और अजीत सिंह के भाषणों ने लोगो को उत्साह से भर दिया। हरियाणा के भाई परमानंद, बाबु बालमुकुन्द गुप्त आदि ने बढ़ चढ़ के भाग लिया था। (स्रोत HBSE – 9वीं कक्षा के अध्याय 3)
ग़दर आंदोलन
इस आंदोलन के लिए 21 अप्रैल 1913 में हिन्दुस्तान एसोसिएशन बनाई थी इसी को ग़दर पार्टी का नाम दिया गया। ग़दर पार्टी के प्रमुख नेता सोहन सिंह, मुहम्मद बरकतुल्ला, कर्तार सिंह और हरियाणा के काशी राम और भाई परमानन्द आदि थे। (स्रोत HBSE – 9वीं कक्षा के अध्याय 3)
जलियावाला बाग हत्याकांड
गांधी जी की गिरफ्तारी 9 अप्रैल 1919 ई. को गांधी जी को पलवल रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया। इसी दौरान 13 अप्रैल, 1919 ई. को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में शान्तिपूर्वक चल रही सभा पर जनरल डायर द्वारा गोलियाँ चला दी गई। (स्रोत HBSE – 9वीं कक्षा के अध्याय 9)
असहयोग आंदोलन में हरियाणा का योगदान
1920 में हरियाणा में लाला लाजपत राय, लाला दुनी चन्द, लाला मुरलीधर, गणपतराय आदि महान राष्ट्रीय नेताओं ने विभिन्न शहरों में जनसभाएँ आयोजित की। हरियाणा से हजारों की संख्या में आंदोलनकारी गिरफ्तार किये गए झज्जर के पंडित श्रीराम शर्मा ने भी असहयोग आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। (स्रोत HBSE – 9वीं कक्षा के अध्याय 9)
1920 में चलाए गए इस आंदोलन का नेतृत्व महात्मा गांधी कर रहे थे। हरियाणा में असहयोग आंदोलन के प्रमुख नेता लाला लाजपत राय थे। इधर हरियाणा में चौधरी छोटूराम ने इसका विरोध किया और कांग्रेस पार्टी छोड़ दी। महात्मा गांधी रोहतक के राम लीला मैदान में एक बहुत बड़ी रैली करते हैं। जिसमें मोहम्मद अली जिन्हा भाग लेते हैं। इसके बाद 22 अक्टूबर 1920 को भिवानी में अंबाला डिवीजन की कांफ्रेंस आयोजित होती है। इसमें महात्मा गांधी भी शामिल थे। महात्मा गांधी ने इसी सभा में अंग्रेजो के लिए शैतान शब्द का प्रयोग किया।
साइमन कमीशन का विरोध
1927 में सर साइमन की अध्यक्षता में एक कमीशन की नियुक्ति की गई जिसमे कुल 7 सदस्य थे। हरियाणा के भिवानी, रोहतक, झज्जर, हिसार और अम्बाला आदि शहरों में प्रभात फेरी निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया गया। लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हो गये और 17 नवम्बर, 1928 ई. को उनका निधन हो गया। विरोध में मार्च 1929 ई. में रोहतक की प्रांतीय कांफ्रेंस बुलाई गई जिसमें 30 हजार की भीड़ में अंग्रेजों की भरपूर निन्दा की गई। कुछ समय के बाद इसी जगह कृषक और मजदूर सम्मेलन का आयोजन करके अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का विरोध किया गया।
(स्रोत HBSE – 9वीं कक्षा के अध्याय 9)
सविनय अवज्ञा आंदोलन में हरियाणा की भागीदारी
सत्याग्रहियों ने आंदोलन को शानदार ढंग से चलाने के लिए अम्बाला के सूरजभान की अध्यक्षता में 15 अप्रैल, 1930 ई. को झज्जर के गाँव शाहिदपुर में नमक बनाकर आंदोलन की शुरुआत की। भिवानी में गणपत राय, रेवाड़ी में खडगबहादुर व भगवान दास, हिसार में नेकी राम, अम्बाला में विद्यावती और करनाल में गोपीचन्द आदि ने हजारों की संख्या में जन-आंदोलन को आगे बढ़ाया। महिलाओं द्वारा शराब व विदेशी सामान बेचने वालों की दुकानों पर धरना दिया गया। किसानों द्वारा ‘कर मत दो’ अभियान चलाया गया। विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई। विद्यार्थियों ने जुलूस निकाले तथा नारे लगाए।
प्रदेश के नेताओं ने 1938 ई. में कांग्रेस के अन्तर्गत मदीना (रोहतक) में प्रान्तीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। आंदोलन की लहर को पुनः उठाने का प्रयास किया। कुछ ही दिनों के बाद जब सुभाष चन्द्र बोस ने हरियाणा का दौरा किया तो यहाँ की जनता में एक नया जोश पैदा हुआ तथा स्वतंत्रता के लिए संघर्ष में जोर पकड़ा। राष्ट्रीय नेता पुनःभारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत हो गए। (स्रोत HBSE – 9वीं कक्षा के अध्याय 9)
भारत छोड़ो आंदोलन में हरियाणा का योगदान
8 अगस्त 1942 ई. को गांधी जी ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध हड़ताल कर दी। प्रदेश के कई शहरों जैसे हिसार, रोहतक, अम्बाला, करनाल आदि में सरकारी भवनों पर तिरंगा झण्डा फहराया गया। रेवाड़ी के सत्यानारायण वशिष्ठ 1944 ई. में मात्र 32 वर्ष की आयु में अंग्रेजी सरकार से शहीद हो गए। प्रैस एवं रेडियो पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया। (स्रोत HBSE – 9वीं कक्षा के अध्याय 9)
हरियाणा की आजाद हिन्द फौज में भूमिका
1938 ई. में कांग्रेस का अध्यक्ष रहते हुए नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने हरियाणा के हिसार जिले के सातरोड़ गाँव के अकाल सहायता केन्द्र का दौरा किया तथा सभी देशवासियों से हरियाणा के अकाल पीड़ितों की सहायता की अपील की।
हरियाणा से लगभग 398 अधिकारी तथा 2317 सैनिक आजाद हिन्द फौज में भारत की स्वतंत्रता के लिए शामिल हुए।
(स्रोत HBSE – 9वीं कक्षा के अध्याय 9)
स्वतंत्रता आंदोलन की महिलाओं की भूमिका
स्वतंत्रता आंदोलन में हरियाणा की महिला नेत्रियों में अरुणा आसफ अली व ‘सुचेता कृपलानी’ का नाम बड़े गर्व व सम्मान के साथ लिया जाता है। अरुणा आसफ अली का जन्म 16 जुलाई 1908 ई. को हरियाणा के कालका में हुआ था। भारत छोड़ो आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे भारत में महिलाओं का नेतृत्व किया। अरुणा आसफ अली ने ग्वालिया टैंक मैदान (मुम्बई) में पहली महिला रही, जिन्होंने राष्ट्र ध्वज फहराया। वे महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई। 1997 (HBSE के अनुसार 1994 में) ई. में इन्हें ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया।
सुचेता कृपलानी का जन्म 25 जून, 1908 ई. को अम्बाला में हुआ। आजादी के बाद ये स्वतन्त्र भारत में उतर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
अरुणा आसफ अली तथा सुचेता कृपलानी के अतिरिक्त रोहतक की कस्तूरी बाई, अंबाला की भाग देवी तथा विद्यावती, हिसार की चित्रा देवी, भिवानी की मोहिनी देवी, गुड़ग्राम की कमला देवी तथा सोनीपत की लीलावती ने भी विभिन्न राष्ट्रीय गतिविधियों में हिस्सा लिया। इनमें से कुछ तो जेल भी गई।
हरियाणा की देशी रियासतों में जन आन्दोलन
सन 1927 ई. में रियासतों में आंदोलन को सही दिशा से चलाने के लिए ‘आल इण्डिया स्टेट पीपुल्स कॉन्फ्रेंस’ का गठन किया गया। इसमें पं. नेकीराम शर्मा, पं. हरिराम व रामजीलाल आदि प्रमुख व्यक्ति थे। 1946 ई. में प्रजामण्डल ने हरियाणा की सभी रियासतों में आक्रामक आन्दोलन चलाया, जिसके अन्तर्गत किसानों ने कर देने से इंकार कर दिया, शेष वर्गों ने शासन से असहयोग किया तथा जनसमूह ने विरोध प्रदर्शन किया।
(स्रोत HBSE – 9वीं कक्षा के अध्याय 9)
लोहारू रियासत
लोहारू भिवानी जिले में एक छोटी-सी रियासत थी। 1935 ई. में लोहारू रियासत के लोगों ने वहाँ के तत्कालीन नवाब मिर्जा अमीनुद्दीन अहमद के कुशासन के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया। 1935 को लोहारू के नवाब ने सिंहाणी नामक गाँव में एक शांतिपूर्ण भीड़ पर गोलियाँ चलवा दी, जिसमें 22 आदमी मारे गये।
सूबेदार दिल सुख, ठाकुर भगवन्तसिंह, चौधरी मोहरसिंह, नत्थूराम, चौधरी गंगासहाय, बूजाराम, चौधरी चंदगी राम, शंकर लाल तथा पं. सत्यव्रत आदि नेताओं ने बीकानेर में प्रजामण्डल आन्दोलन के प्रवर्तक स्वामी कर्मानन्द तथा स्वामी सच्चिदानन्द से मिलकर लोहारू में भी प्रजामण्डल की स्थापना की।
जींद रियासत
जींद रियासत में प्रजामण्डल की नींव रखने वालों में हंसराज रहबर, पं. देवीदयाल, बनारसीदास गुप्त तथा राजेन्द्र कुमार जैन का सराहनीय योगदान। जींद रियासत में गठित प्रजामण्डल के अध्यक्ष श्री बनारसीदास थे 1940 ई. में दादरी नामक स्थान पर प्रथम जनसभा का आयोजन डॉ. सत्यपाल की अध्यक्षता में हुआ। इस सभा के विशेष अतिथि पं. नेकीराम शर्मा थे।
पटियाला रियासत
आधुनिक महेन्द्रगढ़ जिले का नारनौल क्षेत्र पटियाला रियासत के अन्तर्गत था।
नाभा रियासत
आधुनिक महेन्द्रगढ़ जिले का अधिकांश भाग-बावल, कनीना, अटेली आदि उन दिनों नाभा के राजा प्रतापसिंह की रियासत में शामिल थे। 1946 ई. के मध्य में प्रतापसिंह ने प्रजामण्डल के आन्दोलन को कुचलने के लिए यहाँ के सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के विरोध में यहाँ की जनता ने ‘नाभा वाले बावल छोड़ो’ आन्दोलन प्रारम्भ किया।
कैथल का विद्रोह
उत्तरी हरियाणा की सिख रियासतों में कैथल काफी महत्वपूर्ण रियासत थी। 1763 में भाई गुरबख्शसिंह ने कैथल रियासत की नींव डाली। गुरुबख्यासिंह के उत्तराधिकारी देसासिंह ने कैथल की ऐतिहासिक नगरी को अफगानों से मुक्त कराकर उसे रियासत का मुख्यालय बनाया। 1803 देसासिंह के पुत्र लालसिंह ने अंग्रेजों की दासता स्वीकार कर ली। लालसिंह के मरणोपरान्त 1818 ई. में उसका पुत्र प्रतापसिंह गद्दी पर बैठा।
1823 ई. में भाई उदयसिंह ने कैथल रियासत की बागडोर संभाली। 1843 ई. में भाई उदयसिंह की मृत्यु हो गई भाई उदयसिंह पुत्र विहीन साहबकौर और उनकी विधवा रानी सूरजकौर को रियासत बचाये रखने के लिए प्रेरित किया।
23 मार्च, 1843 को अंग्रेजों ने कैथल के प्रधानमंत्री और अन्य अधिकारियों को यह आदेश दिया कि रियासत का प्रशासन वे तुरन्त अंग्रेज अधिकारियों को सौंप दे एवं रियासत का विलय अंग्रेजी राज्य में होना स्वीकार कर लें। पर ऐसा नहीं हो पाया।
10 अप्रैल, 1843 को अंग्रेजों ने कैथल पर आक्रमण कर दिया। 16 अप्रैल, 1843 को अंग्रेजों का किले और नगर पर अधिकार हो गया। टेकसिंह जिसने अंग्रेजों के विरुद्ध कार्यवाही का संचालन किया था चीका नामक स्थान पर पकड़ा गया। टेकसिंह को आजीवन ‘काले पानी’ की सजा सुनाई गई।
कुंजपुरा का नवाब
कुंजपुरा का नवाब नजाबत खाँ था ये अहमद शाह अब्दाली का समर्थक था। मराठों ने “नजाबत खाँ” का वध कर दिया। अहमदशाह अब्दाली ने हरियाणा को दिल्ली राज्य रूहेला सरदार नजीबुदौल्ला को सौंप दिया। उस समय मुगल सम्राट ‘शाह आलम-II’ था 1770 में नजीबुदौला की मृत्यु के बाद उसके पुत्र जाबित खाँ को हिसार का उत्तराधिकारी बनाया गया 1781 में इसी दौरान ‘जींद के राजा गजपत सिंह’ ने सिखों और नफज खाँ के मध्य संधि कराई।
हरियाणा में महात्मा गांधी
रौलट एक्ट (1919) का जायजा लेने के लिए महात्मा गांधी हरियाणा होते हुए पंजाब और लाहौर जा रहे थे 9 अप्रैल 1919 (HSSC ने 10 अप्रैल 1919 माना है) को महात्मा गांधी की हरियाणा में सबसे पहले गिरफ्तारी पलवल रेलवे स्टेशन से हुई थी।
महात्मा गाँधी प्रथम बार भिवानी में शौकत अली, मौलाना अबुल कलाम, स्वामी सत्यदेव और कस्तूरबा गांधी के साथ अम्बाला डिविजन कांर्फ्रेंस में 22-10-1920 को मुख्य अतिथि के रूप में आये था इस बैठक की अध्यक्षता लाला मुरलीधरन ने की थी। महात्मा गांधी ने इसी सभा में अंग्रेजो के लिए शैतान शब्द का प्रयोग किया।
15 फरवरी 1921 में दूसरी बार महात्मा गांधी हरियाणा रूरल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने भिवानी आये थे। इसकी अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की थी 16 फरवरी 1921 को सर्वप्रथम रोहतक में महात्मा गाँधी कलानौर (रोहतक) आए थे। 17 फरवरी 1921 को महात्मा गाँधी (मौलाना आजाद के साथ आये थे) इसी दिन गाँधी ने वैश्य हाई स्कूल व कॉलेज की नींव रखी।
8 मार्च 1921 में महात्मा गाँधी ने अम्बाला में कहा था की हरियाणा में यह मेरे द्वारा किया गया आखरी भ्रमण है। 2 दिसम्बर 1947 को दूसरी बार महात्मा गांधी रोहतक आए थे। 20 दिसम्बर 1947 को नूह/मेवात के घासेड़ा गाँव (गाँधी गाँव) में महात्मा गाँधी ने जनसभा को सम्बोधित किया था। 2 दिसम्बर 1947 को महात्मा गाँधी रोहतक आये और यहाँ के लोगों को पाकिस्तान पलायन से रोका था। 9 दिसम्बर 1947 को महात्मा गाँधी पानीपत आये और यहाँ के लोगों को पाकिस्तान पलायन से रोका था। 1938 में सुभाष चन्द्र बोस ने पलवल में महात्मा गाँधी के नाम से संग्रहालय का निर्माण किया था। 15 नवम्बर 1949 को महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को अम्बाला जेल में फ़ासी दी गई थी
