Mahendragarh District Haryana GK Notes

By Reacher

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हरियाणा के हिसार (Mahendragarh District Haryana GK Notes) की पूरी जानकारी हिंदी में पढ़ें। महेंद्रगढ़ का परिचय, गठन, मुख्यालय, इतिहास, मानचित्र और महत्वपूर्ण तथ्य एक ही स्थान पर।

महेंद्रगढ़ जिला एक नज़र में

जिले की स्थापना – 01 नवम्बर 1966

शहर की स्थापना – राजा नरेन्द्र के द्वारा

नामकरण – पटियाला के राजा नरेन्द्र सिंह के बेटे महेंद्र के कारण

प्राचीन नाम – कानौड़

क्षेत्रफल – 1899 वर्ग किलोमीटर

उपनाम – खनिजों का घर, (बावड़ियों का शहर – नारनौल)

विधानसभा सीटें – महेंद्रगढ़, अटेली, नारनौल, नांगल चौधरी

उपतहसील – सतनाली

तहसील – महेंद्रगढ़, कनीना, नारनौल, अटेली, नांगल चौधरी

इतिहास

कानौड़िया ब्राह्मणों द्वारा आबाद किए जाने कि वजह से महेंद्रगढ़ शहर पहले कानौड़ के नाम से जाना जाता था। यह भी कहा जाता है कि बाबर के एक सेवक मलिक महदूद खान ने बसाया था। सत्रहवीं शताब्दी में मराठा शासक तांत्या टोपे ने यहां एक किले का निर्माण करवाया था। 1861 में पटियाला रियासत के शासक महाराजा नरेन्द्र सिंह ने अपने पुत्र मोहिन्द्र सिंह के सम्मान में इस किले का नाम महेंद्रगढ़ रख दिया था। इसी किले के नाम कि वजह से इस नगर को महेंद्रगढ़ के नाम से जाना जाने लगा।

सन 1948 में पेप्सू के गठन के दौरान पटियाला राज्य से महेंद्रगढ़ क्षेत्र, जींद से दादरी क्षेत्र (जो अब चरखी दादरी) और नाभा राज्य से नांगल क्षेत्र को मिलाकर महेंद्रगढ़ जिले का गठन हुआ, जिसका मुख्यालय नारनौल बना। उस समय जिले में तीन तहसील नारनौल, बावल, महेंद्रगढ़ तथा एक उप-तहसील थी। 1949 में महेंद्रगढ़ उप-तहसील को तहसील में परिवर्तित कर दिया गया।

साहूकार गुम्बद (चोर गुम्बद)

इसका निर्माण अफगान जमाल खान के द्वारा करवाया गया। इसका निर्माण फिरोज शाह के समय हुआ था।

जल महल

जल महल शहर के दक्षिण में आबादी के बाहर स्थित है। इसका निर्माण शाह कुली खान द्वारा 1591 में किया गया था। इतिहास के अनुसार शाह कुली खान ने पानीपत की प्रसिद्ध दूसरी लड़ाई में हेमू को पकड़ा। उस काम से, अकबर प्रसन्न हुआ और शाह कुली खान को नारनौल सौंप दिया।

छत्ता राय बालमुकुन्द दास (बीरबल का छत्ता)

यह ऐतिहासिक स्मारक शाहजहां के शासनकाल के दौरान नारनौल के दिव्य राय मुकुंद दास द्वारा बनाया गया था। यह पांच मंजिला इमारत है। बीरबल (अकबर के शासनकाल) के दौरान यहां आते रहते थे इसलिए इस स्मारक को बीरबल के छत्ते के रूप में जाना जाता है।

मंदिर चामुण्डा देवी

ऐसा माना जाता है कि क्षेत्र के शासक राजा नून करण, चामुंडा देवी के भक्त थे। उन्होंने एक पहाड़ी के तल पर देवी के मंदिर का निर्माण किया।

मोढ़ावाला मंदिर

यह भगवान शिव का मंदिर स्थित है। रक्षा बंधन के अवसर पर यहां एक बड़ा मेला आयोजित किया जाता है।

ढोसी की पहाड़ी

नारनौल शहर के लगभग आठ किलोमीटर पश्चिम में, पहाड़ी थाना और कुलताजपुर गांवों के पास स्थित है। इस पहाड़ी ने देश में प्रसिद्ध हासिल कर ली है क्योंकि यह माना जाता है कि च्यवन ऋषि यहां कई वर्षों से तपस्या करते थे। च्यवन ऋषि की याद में, सोमवती अमावस्या के अवसर पर एक बड़ा मेला आयोजित किया जाता है। राजवंश में पैदा हुए, च्यवन ऋषि को भार्गव समुदाय का संस्थापक कहा जाता है। हरियाणा के भार्गवों को भी ढोसर के नाम से जाना जाता है। मशहूर योगेंद्र-साम्राज्य, हेमू, एक ढोसर (ब्राह्मण) था। ढोसी पहाड़ी पर अन्य धार्मिक स्थल भी हैं, जैसे पंच तीर्थ और सूरज कुंड।

ऐसा कहा जाता है कि ऋषि च्यवनप्राश के नाम से जानी जाने वाली एक विशेष प्रकार की जड़ी-बूटी लेते थे। यह समझा जाता है कि उनके नाम के बाद, च्यवनप्राश के रूप में जाना जाने लगा और वह औषधि पूरे देश में बहुत लोकप्रिय हो गया।

भूगोल

  • यह धार्मिक रूप से एक बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, यहां एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है। सावन के महीने में शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर एक बड़ा मेला आयोजित किया जाता है।

बामनवास

यह गांव हरियाणा-राजस्थान सीमा पर दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित है। यह मुख्य रूप से बाबा रामेश्वर दास के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की दीवारों पर गीता के उपदेश, रामायण और अन्य धार्मिक महाकाव्य लिखे गए हैं।

माण्डोला

बाबा केसरिया के कारण, यह जगह धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। संत की भक्ति के साथ स्थानीय लोगों द्वारा पूजा की जाती है। एक मेला भी अपनी स्मृति में हर साल पहली सितंबर को आयोजित किया जाता है। यह कहा जाता है कि इस जगह की यात्रा से सांप काटने वाले व्यक्ति को ठीक करता है।

शेलंगा

कुछ रोग से ग्रस्त व्यक्ति मंदिर में ज्योति रोशनी से ठीक हो जाता है।

जिले के अन्य मुख्य बिंदु—

  • बाबा रामेश्वर धाम
  • अन्नपूर्ण तीर्थ
  • ढोसी तीर्थ (च्यवन ऋषि से सम्बन्धित)
  • चामुण्डा देवी मंदिर (नारनौल)
    इसका जीर्णोद्धार राजा नूनकरण ने करवाया था।
  • शिव मंदिर – बाघोत गांव
  • भूरा भवानी मेला – महेंद्रगढ़
  • माता मनसानी मेला – चैत्र बड़ी छठ को (महेंद्रगढ़)
  • हनुमान जी का मेला – श्योपुरासर, नारनौल
  • संत शिरोमणि बाबा मोलड़दास मेला – महेंद्रगढ़
  • बाबा भलाईनाथ का मेला – महेंद्रगढ़
  • गुरु दयाभेष गढ़हरा (नारनौल)
  • गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा (नारनौल)
  • संत हुमायूं पीर की दरगाह – नारनौल
    (कहा जाता है कि इसमें महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।)
  • इब्राहिम सूरी का मकबरा – नारनौल
    (पठान शैली से निर्मित)
  • इब्राहिम खां का मकबरा – नारनौल
  • शाह विलायत का मकबरा – नारनौल
    (पठान शैली से निर्मित)
  • शाह कुली खां का मकबरा – नारनौल
  • निपोलियन गेटवे – नारनौल (निर्माण 1589 ई.)
  • तांत्या टोपे का किला – महेंद्रगढ़
  • मिर्जा अली की बावड़ी – नारनौल
  • माधोगढ़ किला – राजा सवाई माधोसिंह द्वारा निर्मित
  • आराम-ए-कोसर (शाह कुली खां द्वारा निर्मित) – नारनौल (यह निपोलियन गेट का प्रवेश द्वार है)
  • चोरा सागर झील – नारनौल
  • हरियाणा का एकमात्र केंद्रीय विवि० – जाटपाली (2009)
  • नारनौल को तालाबों और बावड़ियों का शहर कहा जाता है।
  • 1657 में नारनौल में हिंदी कवि बीरभान ने सतनामी सम्प्रदाय की स्थापना की थी। बीरभान का गुरु उदयदास था।
  • प्रमुख खनिज तांबा अयस्क – नारनौल
  • एस्बेस्टस (ऐसा पदार्थ जो आग में नहीं जलता) – महेंद्रगढ़
  • हरियाणा में अरावली मैदान का सबसे ऊँचा भाग कुलताजपुर है जो 652 मीटर ऊँचा है और यही ढोसी की पहाड़ियाँ कहलाती हैं।
  • उद्दालक ऋषि का आश्रम – स्याणा (महेंद्रगढ़)
  • सिहों का द्वार – नारनौल
  • उत्तर भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक पार्क – नारनौल
  • नसीबपुर – यहां 1857 के क्रांतिकारियों का शहीदी स्मारक है।
  • दोहान नदी – यह एक मौसमी नदी है जो साहिबी नदी के साथ बहती है। यह ढोसी की पहाड़ी से निकलती है।
  • सबसे कम फल व सब्जी का उत्पादन – महेंद्रगढ़
  • प्रदेश में सबसे अधिक झाड़ियों का विस्तार – महेंद्रगढ़
    नोट- पहले कम झाड़ियां गुरुग्राम में थी।
  • सबसे अधिक खनिज संसाधन – महेंद्रगढ़
  • लाख की चूड़िया उद्योग
  • नाइट्रोजन प्लांट – नारनौल
  • सांड वीर्य बैंक (हरियाणा का प्रथम)

प्रमुख व्यक्तित्व—

  • सतीश कौशिक – अभिनेता, निर्माता व निर्देशक (इनकी पहली फिल्म “रूप की रानी चोरों का राजा”)
  • सुरेन्द्र शर्मा – हास्य रस कवि (नांगल चौधरी) शैलाइन – चार लाइनों से रचते हैं।
  • गुलशन ग्रोवर – प्रसिद्ध बिजनेसमैन
  • बाबा रामदेव – सैयद अलीपुर
  • संदीप कुमार – पैदल चल (Race Walk) खिलाड़ी

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