- पंचायतों के संगठन का वर्णन भारतीय संविधान के भाग-4 तथा अनु. 40 के अंतर्गत किया गया है, जिसे राज्य सरकारों के अधीन रखा गया था। 1957 में सामुदायिक विकास कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय विस्तार सेवा के कार्यों की जांच करने के लिए बलवंत राय मेहता समिति का गठन किया गया। इस समिति ने नवंबर 1957 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।
अन्य समिति
- अशोक मेहता समिति (1977)
- जी.वी.के. राव समिति (1985)
- L.M. सिंघवी समिति (1986)
- पी.के. थुंगन समिति (1988)
- गॉडगिल समिति (1988)
- वी. नरसिम्हा राव की सरकार ने सितंबर 1991 में लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पेश किया। यह बिल 73वां संविधान संशोधन के रूप में पारित हुआ (अधिनियम 1992)। 24 अप्रैल 1993 को प्रभाव में आया।
- 73वें संशोधन द्वारा संविधान में एक नया भाग-9 जोड़ा गया तथा अनु. 243 से 243 ‘ण’ शामिल किए गए। इसे पंचायते नाम दिया गया। इसके द्वारा संविधान में 11वीं अनुसूची भी जोड़ी गई। इसमें 29 विषय शामिल किए गए जो 243-जी से संबंधित है।
महत्वपूर्ण अनुच्छेद
- 243 – पंचायती राज की परिभाषा
- 243(a) – ग्राम सभा
- 243(b) – पंचायतों का संविधान
- 243(c) – पंचायतों का गठन
- 243(d) – सीटों का आरक्षण
- 243(e) – पंचायतों का कार्यकाल
- 243(g) – पंचायतों की शक्तियां व अधिकार
- 243(i) – राज्य वित्त आयोग का गठन
- 243(k) – पंचायतों का चुनाव
- इस प्रकार हरियाणा में पंचायती राज 22 अप्रैल 1994 को लागू हुआ। और 1994 में पंचायती राज चुनाव नियमावली बनाई गई। हरियाणा पंचायती राज में अब तक 23 संशोधन हो चुके है। पहला संशोधन 1994 को हुआ था। अंतिम बार संशोधन 2020 में हुआ था। हरियाणा में पंचायती राज में महिला आरक्षण 50% कर दिया गया है। नगर पालिका संशोधन बिल 1994 के तहत हरियाणा में सर्वप्रथम फरीदाबाद को नगर निगम बनाया गया था। हरियाणा का नवीनतम नगर निगम मानेसर (गुरुग्राम) है। सरपंच का मानदेय 5000 और पंच का मानदेय 1600 है।
ग्राम सभा
- गाँव के 18 वर्ष की आयु से ऊपर के सभी मतदाता ग्राम सभा के सदस्य हैं। ग्राम सभा शब्द को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243(बी) के तहत परिभाषित किया गया है। इस सभा की बैठक (हरी बैठक व सावनी बैठक) साल में दो बार होगी। “हरी बैठक” 1 मई से 30 जून के बीच में तथा “सावनी बैठक” 1 नवम्बर से 31 दिसम्बर के बीच होगी।
- राज्य पंचायत राज अधिनियमों के अनुसार, ग्राम सभा की बैठक वर्ष में कम से कम दो से चार बार होनी चाहिए। लोगों की सुविधा के लिए, अधिकांश राज्यों में, इन बैठकों के लिए संदर्भ तिथियों के रूप में चार राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय दिवस निर्धारित किए गए हैं: गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), मजदूर दिवस (1 मई), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गांधी जयंती (2 अक्टूबर)।
- हालाँकि, ग्राम पंचायतें अपनी सुविधानुसार अन्य तिथियों पर भी ग्राम सभा बुलाने के लिए स्वतंत्र हैं। पंचायत सचिव को सरपंच की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ग्राम सभा का आयोजन करना चाहिए। बैठक के लिए लिखित अनुरोध बैठक की तिथि से 5 दिन पूर्व कार्यालय समय के दौरान सरपंच को सौंपना होगा।
- बैठक तभी आयोजित होगी जब सभा के सारे सदस्यों का कम से कम 1/10 हिस्सा मौजूद हो। अर्थात् अगर सभा की जनसंख्या 1000 की हो तो 100 लोगों का बैठक में होना जरूरी है।
ग्राम पंचायत
- ग्राम पंचायत कम से कम 500 जनसंख्या पर बनेगी। ग्राम पंचायत की बैठक महीने में दो बार होगी। सरपंच, गुप्त मतदान से ग्राम पंचायत के सभी मतदाताओं के द्वारा चुना जाएगा। 6-20 पंच, जो सीधे निर्वाचित सदस्य होंगे।
पंचायत समिति
- अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित सदस्य अपने बीच से करेंगे। पंचायत समिति कम से कम 40,000 की जनसंख्या पर बनेगी।
आरक्षण
- तीनों स्तरों पर अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए जनसंख्या के अनुसार सीट आरक्षित है। वर्तमान हरियाणा में महिलाओ को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।
