यौधेय गण
यौधेय कौन थे इस बात को लेकर विद्वानों में मतभेद है। कहा जाता है की यौधेय लोग युधिष्ठिर के वंशज थे। कुषाणों को यौधेयों ने सतलुज व यमुना के बीच के इलाके से बाहर खदेड़ा और अपना शासन स्थापित किया।
कुछ विद्वान मानते है की इनकी उत्पति यौधेय शब्द से हुई है। जिसका अर्थ है वीर यानि लड़ाकू।
पाणिनि ने अपनी पुस्तक अष्टाध्यायी में यौधेयो को ‘आयुद्ध जीवी’ कहा है और इनकी राजधानी रोहतक बताई है। तथा कुछ अन्य विद्वानों ने इनकी राजधानी नौरंगाबाद बताई है।
अग्र गण
अग्र गण का पता हमें सर्वप्रथम इनके सिक्को से लगता है। जो की अग्रोहा और बरवाला से मिले है। अग्रोहा का पुराना नाम अग्रोदक था। अग्र गण की राजधानी अग्रोहा थी। यहाँ के राजा अग्रसेन थे।
कुणिद गण
मौर्य के बाद कुणिद गण का उदय हुआ। कुणिद काल के सिक्के हमें नारायणगढ़, करनाल, और सढौरा (यमुनानगर) से मिले है।
अर्जुनायन गण
अर्जुनायन गण हरियाणा और राजस्थान में फैला हुआ था। हरियाणा में यह महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और नारनौल आदि क्षेत्रों में फैला हुआ था। डा० अल्तेकर के मतानुसार जिन मुद्राओं पर ‘द्वि’ शब्द अंकित था
